यूपी में बैंकिंग रफ्तार तेज, पांच जिले कर्ज वितरण में पीछे

अयोध्या, आजमगढ़ समेत 5 जिलों का CD रेशियो 40% से कम

On

उत्तर प्रदेश में बैंकिंग गतिविधियां बढ़ने के बावजूद कुछ जिले अब भी कर्ज वितरण में पिछड़े हुए हैं, जहां CD रेशियो 40% से नीचे है।

उत्तर प्रदेश में बैंकिंग गतिविधियां तेज होने के बावजूद पांच जिले—अयोध्या, आजमगढ़, प्रतापगढ़, बलिया और उन्नाव—अब भी कर्ज वितरण के मामले में पीछे चल रहे हैं। इन जिलों का क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो 40% से कम बना हुआ है।

इसके विपरीत, राज्य का कुल CD रेशियो दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 60.39% हो गया, जो सितंबर 2025 में 59.56% था। यह 60% के मानक को पार कर चुका है, जिसे बैंकिंग गतिविधियों के लिए एक स्वस्थ स्तर माना जाता है।

CD रेशियो इस बात का संकेतक होता है कि बैंकों द्वारा जमा की गई राशि का कितना हिस्सा ऋण (लोन) के रूप में दिया जा रहा है। सामान्य तौर पर 60% से 80% के बीच का रेशियो संतुलित और स्वस्थ माना जाता है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कर्ज वितरण की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उत्तर प्रदेश में बैंक ऑफ बड़ौदा इस समिति का संयोजक है, जो समय-समय पर बैंकिंग प्रदर्शन, वित्तीय समावेशन और कर्ज विस्तार की समीक्षा करता है।

SLBC ने अब मार्च 2026 तक CD रेशियो 62% और वित्त वर्ष 2026-27 में 65% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

दिसंबर तिमाही में सभी आठ प्रमुख बैंकों ने अपने CD रेशियो में वृद्धि दर्ज की। यूनियन बैंक और सेंट्रल बैंक में सुधार देखा गया, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक ने भी तिमाही आधार पर बेहतर प्रदर्शन किया।

कम CD रेशियो वाले जिलों का मतलब है कि वहां बैंकों में जमा धन का बड़ा हिस्सा ऋण के रूप में इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और विकास की गति प्रभावित हो सकती है।Screenshot_675

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर IAF का दो दिवसीय एयर एक्सरसाइज शुरू

नवीनतम

Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software