- Hindi News
- राज्य
- उत्तर प्रदेश
- यूपी में D.El.Ed को लेकर घट रही रुचि, बाहरी राज्यों के छात्रों की बढ़ी भागीदारी
यूपी में D.El.Ed को लेकर घट रही रुचि, बाहरी राज्यों के छात्रों की बढ़ी भागीदारी
स्थानीय अभ्यर्थियों की संख्या में गिरावट, नौकरी के कम अवसर बड़ी वजह
उत्तर प्रदेश में D.El.Ed कोर्स के प्रति स्थानीय युवाओं की रुचि कम हो रही है, जबकि अन्य राज्यों के छात्रों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश में Diploma in Elementary Education (डी.एल.एड), जो कभी शिक्षक बनने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए एक लोकप्रिय विकल्प था, अब स्थानीय अभ्यर्थियों के बीच तेजी से अपनी लोकप्रियता खो रहा है।
हालांकि, 2024 में इस कार्यक्रम को अन्य राज्यों के उम्मीदवारों के लिए खोलने के बाद बाहरी राज्यों से आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अन्य राज्यों से 34,124 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जो 2025 में बढ़कर 37,333 हो गया।
इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश के भीतर से दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 2024 में जहां 1,91,162 उम्मीदवारों ने प्रवेश लिया था, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर केवल 95,817 रह गई, जो कुल सीटों का लगभग 40% ही भर पाई।
2025 सत्र के लिए राज्य में कुल 2,39,500 सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 10,600 सीटें 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में और 2,28,900 सीटें निजी एवं अल्पसंख्यक कॉलेजों में थीं, जिनमें 10,309 सीटें अल्पसंख्यक संस्थानों में शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 30% यानी करीब 29,000 सीटों पर बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे राज्यों के छात्रों ने प्रवेश लिया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के युवाओं में घटती रुचि का मुख्य कारण सरकारी स्कूलों में नौकरी के सीमित अवसर हैं, क्योंकि 2018 के बाद से राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक भर्ती नहीं हुई है।
इसके अलावा, युवाओं की बदलती करियर प्राथमिकताएं भी इस गिरावट की एक अहम वजह मानी जा रही हैं।
डी.एल.एड कार्यक्रम, जिसे पहले बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (BTC) के नाम से जाना जाता था, एक दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है, जो अभ्यर्थियों को सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए तैयार करता है।

