हर साल बाढ़ में डूबता असम, आखिर क्यों? ब्रह्मपुत्र की गाद से भारी बारिश तक ये हैं बड़ी वजहें

असम में इस साल बाढ़ से 98 लोगों की मौत हो चुकी है और 1.68 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। ब्रह्मपुत्र का बढ़ता जलस्तर, भारी बारिश, गाद का जमाव, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन संकट को और गंभीर बना रहे हैं।

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असम में हर साल बाढ़ का कहर बड़ी आबादी को प्रभावित करता है। इस साल भी 98 लोगों की जान जा चुकी है और 1.68 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। ब्रह्मपुत्र की गाद, मूसलाधार बारिश और बदलते मौसम ने समस्या को और विकराल बना दिया है।

असम में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन हर साल इसका असर बड़े पैमाने पर देखने को मिलता है। इस साल भी राज्य में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1.68 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का बढ़ता जलस्तर, लगातार भारी बारिश, नदी में जमा होती गाद, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन जैसे कई कारण असम की बाढ़ की समस्या को गंभीर बनाते हैं।

ब्रह्मपुत्र क्यों बढ़ाती है असम की बाढ़ की परेशानी?

ब्रह्मपुत्र असम की जीवनरेखा है, लेकिन मानसून के दौरान यही नदी बड़े बाढ़ संकट का कारण भी बन जाती है। भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और कई इलाकों में पानी फैल जाता है।

नदी के साथ बहकर आने वाली गाद भी बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करती है। गाद के लगातार जमाव से नदी की जलधारण क्षमता और प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे तेज बारिश के दौरान पानी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

मूसलाधार बारिश से बढ़ता जलस्तर

असम में मानसून के दौरान भारी बारिश होती है। जब कम समय में बहुत अधिक बारिश होती है, तो नदियों और जलधाराओं में पानी तेजी से बढ़ जाता है।

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

जंगलों की कटाई भी बनी बड़ी चुनौती

जंगलों की कटाई का असर भी बाढ़ के जोखिम पर पड़ सकता है। वन क्षेत्र कम होने से मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता प्रभावित होती है और बारिश का पानी तेजी से बहकर नदियों और जलधाराओं में पहुंच सकता है।

इसके साथ ही मिट्टी का कटाव बढ़ने से अधिक तलछट नदियों तक पहुंच सकती है, जिससे गाद की समस्या और गंभीर हो सकती है।

जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चिंता

बदलता मौसम भी असम के बाढ़ संकट को नई चुनौती दे रहा है। बारिश के पैटर्न में बदलाव और कम समय में अत्यधिक बारिश जैसी घटनाएं बाढ़ के खतरे को बढ़ा सकती हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की चरम घटनाओं में संभावित वृद्धि असम जैसे बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

इस साल 1.68 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

इस साल असम में बाढ़ का असर बड़े स्तर पर देखने को मिला है। अब तक 98 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 1.68 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने से राहत, बचाव और पुनर्वास की चुनौती भी बढ़ जाती है।

Key Highlights:

  • असम में इस साल बाढ़ से 98 लोगों की मौत हुई।
  • 1.68 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
  • ब्रह्मपुत्र का बढ़ता जलस्तर बाढ़ की प्रमुख वजहों में शामिल है।
  • भारी बारिश और गाद का जमाव समस्या को गंभीर बनाते हैं।
  • जंगलों की कटाई से मिट्टी का कटाव और जल बहाव बढ़ सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के पैटर्न ने चिंता बढ़ाई है।

FAQ Section:

सवाल: असम में हर साल बाढ़ क्यों आती है?

जवाब: असम में बाढ़ के पीछे भारी मानसूनी बारिश, ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का बढ़ता जलस्तर, गाद का जमाव, नदी कटाव और भौगोलिक परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं।

सवाल: ब्रह्मपुत्र की गाद बाढ़ को कैसे प्रभावित करती है?

जवाब: नदी में गाद जमा होने से जल प्रवाह और नदी की क्षमता प्रभावित हो सकती है। भारी बारिश के दौरान इससे पानी के आसपास के क्षेत्रों में फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।

सवाल: क्या जंगलों की कटाई से बाढ़ बढ़ सकती है?

जवाब: जंगलों की कटाई से मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता कम हो सकती है और सतही जल बहाव बढ़ सकता है। इससे नदियों में अधिक पानी और तलछट पहुंचने की संभावना रहती है।

सवाल: जलवायु परिवर्तन का असम की बाढ़ से क्या संबंध है?

जवाब: बदलते मौसम के कारण बारिश के पैटर्न में बदलाव और अत्यधिक बारिश जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सामने नई चुनौतियां पैदा होती हैं।

Conclusion:

असम की बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि कई पर्यावरणीय और भौगोलिक कारकों का परिणाम है। ब्रह्मपुत्र का जलस्तर, भारी बारिश, गाद, जंगलों की कटाई और बदलता मौसम मिलकर समस्या को गंभीर बनाते हैं। इस साल 98 मौतों और 1.68 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने के आंकड़े बताते हैं कि असम के लिए बाढ़ प्रबंधन और दीर्घकालिक समाधान कितने जरूरी हैं।

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Edited By: Atul Sharma

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