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देशभर में बैंक हड़ताल आज, SBI–PNB समेत सार्वजनिक बैंकों की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग, चौथे लगातार दिन कई शाखाएं बंद
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर मंगलवार को देशव्यापी बैंक हड़ताल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेवाएं बाधित रहने की संभावना है। इससे पहले तीन दिन लगातार छुट्टियां रहने के कारण ग्राहकों को पहले ही परेशानी का सामना करना पड़ा है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा मंगलवार को घोषित राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने की संभावना है। हालांकि इसे औपचारिक बैंक अवकाश घोषित नहीं किया गया है, लेकिन हड़ताल के कारण कई शाखाओं में कामकाज ठप रह सकता है।
उल्लेखनीय है कि बैंक पहले ही 24, 25 और 26 जनवरी को चौथे शनिवार, रविवार और गणतंत्र दिवस के कारण बंद रहे। ऐसे में मंगलवार की हड़ताल के चलते कुछ शाखाएं लगातार चौथे दिन बंद रहेंगी, जिससे ग्राहकों की परेशानी और बढ़ सकती है।
इस हड़ताल से भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूनियन बैंक, केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अधिकांश सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रभावित होने की आशंका है।
क्या हैं बैंक यूनियनों की मांगें?
UFBU, जिसमें बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली नौ यूनियनें शामिल हैं, पांच दिवसीय कार्य सप्ताह को तत्काल लागू करने की मांग कर रहा है।
23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई सुलह बैठक में कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलने के बाद यूनियनों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयीज एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव सी. एच. वेंकटाचलम ने कहा,
“सुलह प्रक्रिया के दौरान विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन हमारी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, इसलिए हमें हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा।”
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के महासचिव रूपम रॉय ने कहा कि मार्च 2024 में वेतन संशोधन समझौते के दौरान भारतीय बैंक संघ और UFBU के बीच सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने पर सहमति बनी थी।
नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉयीज (NCBE) के महासचिव एल. चंद्रशेखर ने कहा,
“यह आंदोलन ग्राहकों के खिलाफ नहीं, बल्कि एक संतुलित, मानवीय और कुशल बैंकिंग प्रणाली के लिए है। पांच दिवसीय बैंकिंग कोई विलासिता नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय आवश्यकता है।”
