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राजस्व घाटा अनुदान अस्थायी व्यवस्था थी, हिमाचल को दंडित नहीं किया गया: अनुराग ठाकुर
16वें वित्त आयोग के फैसले पर मुख्यमंत्री सुक्खू के आरोपों को भाजपा सांसद ने किया खारिज
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने को हिमाचल के साथ अन्याय बताने पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि RDG एक अस्थायी और संक्रमणकालीन व्यवस्था थी और 16वें वित्त आयोग ने इसे जारी न रखने का निर्णय ठोस तथ्यों के आधार पर लिया।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी, बल्कि इसे कोविड महामारी के दौरान राज्यों को राहत देने के उद्देश्य से सीमित अवधि के लिए लागू किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि 16वें वित्त आयोग ने इसे इसलिए आगे नहीं बढ़ाया, क्योंकि कई लाभार्थी राज्यों में कमजोर कर संग्रह प्रयास और अधिक प्रतिबद्ध खर्च का लगातार पैटर्न देखा गया।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय करों में हिमाचल की हिस्सेदारी 0.83 प्रतिशत से बढ़कर 0.91 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने कहा, “नए फार्मूले के तहत कर हस्तांतरण के बाद हिमाचल की प्राप्तियां वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान के 11,561 करोड़ रुपये से बढ़कर 13,949 करोड़ रुपये हो गई हैं, यानी लगभग 2,388 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इससे यह स्पष्ट है कि राज्य को वित्त आयोग द्वारा दंडित नहीं किया गया।”
भाजपा सांसद ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत RDG व्यवस्था को जानबूझकर फ्रंट-लोडेड रखा गया था, ताकि महामारी के आर्थिक झटके से राज्यों को उबारा जा सके। यह व्यवस्था 2025-26 तक राज्यों को लगभग शून्य राजस्व घाटे की स्थिति में लाने के लिए बनाई गई थी।
उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने परिणामों की समीक्षा के बाद पाया कि बड़े पैमाने पर RDG मिलने के बावजूद कई राज्यों में राजस्व घाटा अपेक्षित मानक के अनुरूप नहीं घटा, क्योंकि राजस्व बढ़ाने और खर्च में सुधार के प्रयास नहीं किए गए। इसी आधार पर आयोग ने RDG को आगे जारी न रखने का निर्णय लिया।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि तथ्यों को नजरअंदाज कर केंद्र सरकार या वित्त आयोग पर आरोप लगाना उचित नहीं है और राज्य सरकार को वित्तीय अनुशासन और संसाधन जुटाने पर ध्यान देना चाहिए।
