ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा पर “गहरी चिंता” जताते हुए विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि “75 प्रतिशत टैरिफ पर कोई भी भारतीय कंपनी अमेरिका को निर्यात करने में सक्षम नहीं रह जाएगी।”
कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह शुरुआत से ही अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था को लेकर “चिंतित” रहे हैं और भारत पहले से ही अपने क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में नुकसान की स्थिति में है।
बुधवार को एएनआई से बातचीत में थरूर ने कहा,
“मैं इन टैरिफ को लेकर हमेशा से परेशान रहा हूं, क्योंकि भारत पर लगाया गया शुरुआती 25 प्रतिशत टैरिफ ही एक बड़ी समस्या था। दक्षिण-पूर्व एशिया की वे अर्थव्यवस्थाएं, जो हमारे साथ श्रम-प्रधान उद्योगों—जैसे रत्न, आभूषण, समुद्री उत्पाद, झींगा, चमड़ा आदि—में प्रतिस्पर्धा करती हैं, उन्हें 15 से 19 प्रतिशत के बीच टैरिफ दिया गया। इनमें वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त प्रतिबंधों से स्थिति और खराब हो गई है।
“25 प्रतिशत पहले ही समस्या था। अब रूसी प्रतिबंधों के कारण 25 प्रतिशत और जुड़ जाता है, जिससे यह 50 प्रतिशत हो जाता है। अगर ईरानी प्रतिबंधों के तहत 25 प्रतिशत और जुड़ता है, तो यह 75 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। साफ है कि 75 प्रतिशत टैरिफ पर कोई भी भारतीय कंपनी अमेरिका को निर्यात नहीं कर पाएगी,” थरूर ने कहा।
उन्होंने कहा कि केवल वे वस्तुएं ही निर्यात योग्य रहेंगी जिन पर फिलहाल प्रतिबंध नहीं हैं, जैसे दवाइयां। “बाकी उत्पाद व्यावहारिक नहीं रहेंगे। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकार क्या कह रही है, मुझे नहीं पता, लेकिन मेरी नजर में यह बहुत गंभीर मामला है,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस सांसद ने उम्मीद जताई कि नए अमेरिकी राजदूत व्यापार समझौते में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा,
“मुझे उम्मीद है कि नए अमेरिकी राजदूत अपनी सरकार और हमारी सरकार के साथ मिलकर तेजी से किसी सहमति तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।”
थरूर की यह टिप्पणी उस घोषणा के बाद आई है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि जो देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उनके साथ अमेरिका के सभी कारोबारी लेन-देन पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा,
“तत्काल प्रभाव से, जो भी देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी व्यवसाय पर 25% टैरिफ देना होगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।”
इसके अलावा, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा,
“व्यापार समझौता 2026 की पहली तिमाही में ही हो जाना चाहिए। हम पूरे साल इंतजार नहीं कर सकते। यह बहुत जल्द होना चाहिए।”
उन्होंने पैक्स सिलिका की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि क्वाड शिखर सम्मेलन की घोषणा में भी देरी नहीं होनी चाहिए और भारत को अपने अधिकारों का जल्द प्रयोग करना चाहिए।

