अमेरिका और चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहते: एआई पर भारत-फ्रांस की साझा सोच — मैक्रों

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में बोले फ्रांसीसी राष्ट्रपति, एआई में ‘सॉवरेन क्षमता’ और नैतिक विकास पर जोर

On

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने कहा कि भारत और फ्रांस एआई के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के मॉडलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते। उन्होंने कंप्यूटिंग क्षमता, प्रतिभा और पूंजी में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। इस दौरान All India Institute of Medical Sciences Delhi में इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ की भी शुरुआत की गई।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत और फ्रांस की “एक जैसी सोच” है और दोनों देश अमेरिका और चीन के मॉडलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते।

उन्होंने कहा,
“मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत और फ्रांस की एक समान प्रतिबद्धता है — हम अमेरिका और चीन के मॉडलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते। हम समाधान का हिस्सा बनना चाहते हैं और चाहते हैं कि हमारे देश के खिलाड़ी भी इस समाधान का हिस्सा बनें।”

मैक्रों ने कहा कि मजबूत एआई पारिस्थितिकी तंत्र के लिए तीन प्रमुख स्तंभों — कंप्यूटिंग क्षमता, प्रतिभा और पूंजी — में निवेश आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और फ्रांस दोनों को पर्याप्त डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमताएं सुनिश्चित करनी होंगी।

उन्होंने India AI Impact Summit के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा,
“भारत द्वारा आयोजित यह शिखर सम्मेलन इन सभी मुद्दों पर अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक वर्ष पहले हुए एक्शन समिट के बाद हमने बातचीत जारी रखी, ताकि हमारे देश नवाचार का लाभ उठा सकें और यह सुनिश्चित कर सकें कि यह नवाचार मानवता और हमारे साझा हितों की सेवा करे।”

मैक्रों ने स्वीकार किया कि अमेरिका और चीन इस क्षेत्र में आगे हैं, लेकिन भारत और फ्रांस भी प्रतिस्पर्धा में मजबूती से बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सही नैतिक दृष्टिकोण के साथ एआई का उपयोग वैज्ञानिक खोजों को गति दे सकता है, जिसमें नई दवाओं और उपचारों की खोज भी शामिल है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और फ्रांस को सॉवरेन एआई क्षमता और प्रतिभा विकसित करनी चाहिए, ताकि एआई का विकास मानवता के हित में हो और कुछ वैश्विक शक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।

मैक्रों ने जिम्मेदार शासन की आवश्यकता पर बल देते हुए बच्चों की सुरक्षा, एल्गोरिदम में पारदर्शिता (ताकि पक्षपात और लोकतांत्रिक जोखिमों को कम किया जा सके) और एआई प्रणालियों में भाषाई विविधता के संरक्षण को जरूरी बताया — यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत और फ्रांस की साझा दृष्टि है।

इसी अवसर पर भारत और फ्रांस ने राष्ट्रीय राजधानी में स्थित एम्स (AIIMS) में इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ (IF-CAIH) की भी शुरुआत की।

इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda और राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से किया।

यह केंद्र एआई आधारित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और क्लिनिकल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है, ताकि जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान किया जा सके।

इसे AIIMS New Delhi, Sorbonne University और Paris Brain Institute के बीच हस्ताक्षरित संयुक्त समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत स्थापित किया गया है।Screenshot_1328

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

अमेरिका और चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहते: एआई पर भारत-फ्रांस की साझा सोच — मैक्रों

नवीनतम

Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software