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माघ मेले के विवाद पर प्रयागराज प्रशासन माफी को तैयार: शंकराचार्य के सहयोगी का दावा
मौनी अमावस्या पर संगम स्नान से रोके जाने को लेकर हुआ था विवाद, दो शर्तों पर अड़े शंकराचार्य
माघ मेले के दौरान संगम स्नान से रोके जाने के विवाद के बाद प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से माफी मांगने को तैयार है। शंकराचार्य के सहयोगी ने दावा किया है कि प्रशासन उन्हें वापस मेला क्षेत्र में लाने की कोशिश कर रहा है।
माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान से रोके जाने के विवाद के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज प्रशासन के सुर बदले नजर आ रहे हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सहयोगी का दावा है कि जिला प्रशासन अब इस पूरे मामले पर माफी मांगने के लिए तैयार है।
शंकराचार्य और उनके समर्थकों का आरोप था कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर उन्हें संगम में पवित्र स्नान करने से रोका गया। यह दिन माघ मेले के दौरान अत्यंत शुभ माना जाता है।
हालांकि प्रशासन का कहना था कि शंकराचार्य के रथ को भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में संभावित भगदड़ को रोकने के लिए रोका गया था और उनसे अन्य श्रद्धालुओं की तरह पैदल आगे बढ़ने का अनुरोध किया गया था।
इस घटना से आहत शंकराचार्य ने धरना दिया और बुधवार को बिना संगम स्नान किए प्रयागराज छोड़कर वाराणसी चले गए। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उन्हें गहरे स्तर पर झकझोर दिया है।
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने बताया कि प्रशासन को उनके अचानक माघ मेला छोड़ने की उम्मीद नहीं थी।
उन्होंने कहा, “प्रयागराज के अधिकारियों को लगा था कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा यानी एक फरवरी को स्नान के बाद जाएंगे और तब तक उन्हें मना लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।”
योगीराज सरकार के अनुसार, शंकराचार्य के वाराणसी पहुंचने के बाद लखनऊ से दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और माघ पूर्णिमा के अवसर पर संगम स्नान के लिए वापस आने का अनुरोध किया।
इस पर शंकराचार्य ने दो शर्तें रखीं। पहली शर्त यह कि घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लिखित रूप में माफी मांगी जाए। दूसरी शर्त यह कि भविष्य में चारों शंकराचार्यों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाए।
सहयोगी के अनुसार, प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पालकी के माध्यम से शंकराचार्य को संगम तक ले जाने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया कि उनका मन अभी दुख और आक्रोश से भरा हुआ है।
