हरियाणा में 5,700 करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित जल प्रबंधन परियोजना शुरू, सिंचाई व्यवस्था होगी हाईटेक

सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा- आधुनिक SCADA सिस्टम से होगी नहरों की रियल-टाइम निगरानी, जल संरक्षण और समान वितरण पर रहेगा फोकस

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हरियाणा सरकार ने पहली बार विश्व बैंक के सहयोग से लगभग 5,700 करोड़ रुपये की एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना शुरू की है। सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि यह परियोजना राज्य में जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

हरियाणा में शुरू हुई 5,700 करोड़ रुपये की एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना

हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने गुरुवार को घोषणा की कि राज्य में पहली बार विश्व बैंक समर्थित एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना (Integrated Water Management Project) लागू की जा रही है। करीब 5,700 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य जल संसाधनों का वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

रोहतक के डीआरडीए हॉल में जिला जनसंपर्क एवं शिकायत निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने कहा कि यह परियोजना हरियाणा के लिए "गेम चेंजर" साबित होगी।


वैज्ञानिक और दीर्घकालिक जल प्रबंधन पर सरकार का जोर

श्रुति चौधरी ने कहा कि वर्तमान सरकार जल प्रबंधन को लेकर दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले जल वितरण के लिए स्थानीय और अस्थायी उपायों पर अधिक जोर दिया जाता था, जबकि अब पूरे सिंचाई तंत्र को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आधुनिक बनाया जा रहा है।


SCADA सिस्टम से होगी नहरों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग

मंत्री ने बताया कि परियोजना के तहत राज्य के सभी प्रमुख जल नियंत्रण केंद्रों पर आधुनिक SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम लगाए जाएंगे।

इससे नहरों में जल प्रवाह, वितरण प्रणाली और अंतिम छोर (टेल-एंड) तक पानी की उपलब्धता की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे जल वितरण अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगा।


जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई पर भी रहेगा विशेष फोकस

परियोजना में केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कई अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation)
  • भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge)
  • जल संरक्षण
  • कृषि में जल के बेहतर उपयोग की तकनीक
  • जल संसाधनों का संतुलित एवं प्रभावी उपयोग

सरकार का लक्ष्य राज्यभर में जल का समान और कुशल वितरण सुनिश्चित करना है।


रोहतक के 19 गांवों में बाढ़ सुरक्षा कार्यों को मंजूरी

श्रुति चौधरी ने बताया कि बाढ़ प्रबंधन और आपदा तैयारी को मजबूत करने के लिए रोहतक जिले के 19 गांवों में 24.36 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा कार्यों को मंजूरी दी गई है।

उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र निचले इलाकों में स्थित हैं और भारी बारिश के दौरान जलभराव व बाढ़ की आशंका अधिक रहती है। विभाग ने पिछले वर्ष भी प्रभावी ढंग से स्थिति को संभाला था और आगामी मानसून को देखते हुए पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।


विपक्ष पर भी साधा निशाना

मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जनहित से जुड़े विकास कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार आधुनिक तकनीक और दीर्घकालिक योजनाओं के माध्यम से जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रही है।


Key Highlights:

  • हरियाणा में पहली बार 5,700 करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित जल प्रबंधन परियोजना।
  • राज्यभर में आधुनिक SCADA सिस्टम लगाए जाएंगे।
  • नहरों के जल प्रवाह की रियल-टाइम निगरानी होगी।
  • माइक्रो इरिगेशन, भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण पर विशेष फोकस।
  • रोहतक के 19 गांवों में 24.36 करोड़ रुपये की बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं स्वीकृत।
  • आगामी मानसून को लेकर तैयारियां तेज।

FAQ Section:

Q1. परियोजना की कुल लागत कितनी है?

करीब 5,700 करोड़ रुपये

Q2. परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, समान जल वितरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देना।

Q3. SCADA सिस्टम से क्या लाभ होगा?

इससे नहरों में पानी के प्रवाह और वितरण की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।

Q4. रोहतक में बाढ़ सुरक्षा के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?

24.36 करोड़ रुपये, जिससे 19 गांवों में बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाएंगे।


Conclusion:

हरियाणा सरकार की विश्व बैंक समर्थित एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना राज्य की सिंचाई व्यवस्था और जल संरक्षण को नई दिशा देने की पहल है। आधुनिक तकनीक, रियल-टाइम निगरानी और दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीति के जरिए सरकार का उद्देश्य किसानों और आम नागरिकों को बेहतर जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है। साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को मजबूत कर मानसून के दौरान संभावित जोखिम को कम करने की तैयारी भी की जा रही है।Screenshot_2581

Edited By: Karan Singh

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