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गुरुग्राम में 100 से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के छिपे होने की आशंका, पुलिस ने तेज किया सत्यापन अभियान
हिरासत में बंद 13 बांग्लादेशी नागरिकों से पूछताछ के बाद खुलासा, पुलिस की कई इलाकों में दिन-रात छापेमारी और दस्तावेजों की जांच
गुरुग्राम पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। हिरासत में मौजूद 13 बांग्लादेशी नागरिकों से पूछताछ में 100 से अधिक अन्य अवैध प्रवासियों के गुरुग्राम और दिल्ली-एनसीआर में छिपे होने की आशंका सामने आई है।
पूछताछ में सामने आया बड़ा खुलासा
गुरुग्राम में हिरासत केंद्र में रखे गए 13 बांग्लादेशी नागरिकों से पूछताछ के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन लोगों ने बताया कि गुरुग्राम और आसपास के दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध बांग्लादेशी नागरिक छिपकर रह रहे हो सकते हैं।
इसी जानकारी के आधार पर अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने कई स्थानों पर व्यापक सत्यापन और जांच अभियान शुरू कर दिया है।
एजेंटों के जरिए होती थी अवैध घुसपैठ
जांच में सामने आया है कि बांग्लादेश से भारत में अवैध प्रवेश कराने के लिए एजेंट प्रति व्यक्ति करीब 15,000 रुपये वसूलते थे।पुलिस अब उन स्थानीय लोगों और एजेंटों की पहचान करने में जुटी है, जिन पर अवैध प्रवासियों के लिए रोजगार, किराये का मकान और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का आरोप है।
मोबाइल फोन और व्हाट्सएप ग्रुप की हो रही जांच
जांच एजेंसियों ने हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, मोबाइल से कई व्हाट्सएप ग्रुप और चैट नेटवर्क मिले हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध प्रवेश, आवाजाही और विभिन्न राज्यों में ठहरने के लिए किया जाता था।
इसके अलावा पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सोशल मीडिया गतिविधियों और GPS लोकेशन हिस्ट्री का भी विश्लेषण कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
गुरुग्राम में 100 से अधिक स्थान पुलिस की निगरानी में
जांच के दौरान गुरुग्राम में 100 से अधिक ऐसे स्थानों की पहचान की गई है, जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की आशंका है।
इनमें शामिल हैं:
- बड़े निर्माण स्थल
- मजदूर चौक
- अनधिकृत बस्तियां
- शहर के बाहरी इलाकों के खाली प्लॉट
- प्रमुख एक्सप्रेसवे के आसपास की बस्तियां
पुलिस का मानना है कि बड़ी निर्माण परियोजनाओं और प्रवासी श्रमिकों वाले इलाकों में विशेष निगरानी की जरूरत है।
किरायेदारों और कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील
पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), सोसायटी प्रबंधन और मकान मालिकों से सभी किरायेदारों, घरेलू सहायकों और अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील की गई है।
साथ ही नागरिकों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने के लिए कहा गया है।
दिन-रात चल रहा सत्यापन अभियान
पुलिस ने चिन्हित इलाकों में दिन-रात सत्यापन अभियान तेज कर दिया है।
टीमें दस्तावेजों की जांच, नागरिकता का सत्यापन और उन नेटवर्कों की पहचान करने में जुटी हैं, जिन्होंने कथित रूप से अवैध घुसपैठियों को गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में बसने में मदद की।
Key Highlights:
- 13 बांग्लादेशी नागरिकों से पूछताछ में बड़ा खुलासा।
- गुरुग्राम और एनसीआर में 100 से अधिक अवैध प्रवासियों के छिपे होने की आशंका।
- क्राइम ब्रांच ने कई स्थानों पर सत्यापन अभियान शुरू किया।
- एजेंट कथित तौर पर अवैध प्रवेश के लिए 15,000 रुपये लेते थे।
- व्हाट्सएप ग्रुप, CDR और GPS डेटा की जांच जारी।
- 100 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की निगरानी।
- मकान मालिकों और RWA से पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करने की अपील।
FAQ Section:
Q1. पुलिस को यह जानकारी कैसे मिली?
हिरासत में रखे गए 13 बांग्लादेशी नागरिकों से पूछताछ के दौरान यह जानकारी सामने आई।
Q2. कितने अवैध प्रवासियों के छिपे होने की आशंका है?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 100 से अधिक अवैध प्रवासी गुरुग्राम और दिल्ली-एनसीआर में रह रहे हो सकते हैं।
Q3. पुलिस किन पहलुओं की जांच कर रही है?
पुलिस मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सोशल मीडिया गतिविधियों और GPS लोकेशन की जांच कर रही है।
Q4. लोगों से क्या अपील की गई है?
मकान मालिकों, RWA और सोसायटी प्रबंधन से किरायेदारों एवं कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देने की अपील की गई है।
Conclusion:
गुरुग्राम पुलिस ने अवैध घुसपैठ और उससे जुड़े संभावित नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। हिरासत में लिए गए लोगों से मिली जानकारी के आधार पर कई इलाकों में सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और वास्तविक संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

