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सोशल मीडिया बना उम्मीद की किरण: हरियाणा पुलिस के SI ने झारखंड के लापता बच्चे को परिवार से मिलाया
अंबाला में मिले 11 वर्षीय बच्चे का सोशल मीडिया पोस्ट से चला पता, वीडियो वायरल होने के बाद झारखंड से परिवार ने की पहचान
हरियाणा पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करते हुए झारखंड के 11 वर्षीय लापता बच्चे को उसके परिवार से मिलाने में अहम भूमिका निभाई। वीडियो पोस्ट के जरिए परिवार ने बच्चे की पहचान की और भावुक मिलन संभव हो सका।
सोशल मीडिया से परिवार तक पहुंचा लापता बच्चा
जहां एक ओर सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, वहीं हरियाणा पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने इसी माध्यम का सकारात्मक उपयोग कर झारखंड के एक लापता बच्चे को उसके परिवार से मिलाने का सराहनीय कार्य किया।
बुधवार को झारखंड के एक परिवार की अपने 11 वर्षीय बेटे से भावुक मुलाकात हुई, जो 5 जून से लापता था और बाद में हरियाणा के अंबाला में मिला।
झारखंड से लापता होकर अंबाला पहुंचा बच्चा
परिजनों के अनुसार, बच्चा 5 जून को झारखंड से लापता हो गया था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।काफी तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला। बाद में हरियाणा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और जानकारी को देखकर परिवार को पता चला कि उनका बेटा अंबाला में सुरक्षित है।
ट्रेन में मिला था बच्चा
पंचकूला स्थित राज्य अपराध शाखा (स्टेट क्राइम ब्रांच) की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट में तैनात सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि 14 जून को उन्हें नारायणगढ़ स्थित राधा कृष्ण बाल आश्रम के अधीक्षक से बच्चे के बारे में सूचना मिली।
उन्होंने बताया कि बच्चे को 12 जून को एक ट्रेन में पाया गया था। बाद में उसे अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर उतारकर बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत राधा कृष्ण बाल आश्रम भेज दिया गया।
भाषा और मानसिक स्थिति बनी चुनौती
पुलिस के अनुसार, बच्चा मानसिक रूप से कमजोर था और भाषा संबंधी कठिनाइयों के कारण अपने बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था।
राजेश कुमार ने बताया कि बातचीत के दौरान बच्चा केवल अपना नाम बता सका। इसके बाद उन्होंने बच्चे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया ताकि उसकी पहचान हो सके।
वीडियो देखकर परिवार ने की पहचान
सब-इंस्पेक्टर ने बताया कि 14 जून को ही झारखंड से प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद बच्चे और उसके परिवार के बीच वीडियो कॉल कराई गई, जिसमें परिजनों ने तुरंत उसकी पहचान कर ली।
स्थानीय पुलिस से पुष्टि करने के बाद 17 जून को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के निर्देशानुसार बच्चे को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।
परिवार ने खो दी थी उम्मीद
राजेश कुमार ने बताया कि यह बच्चा अपने माता-पिता की इकलौती संतान है। परिवार को आशंका थी कि उसका अपहरण कर उसे कहीं बेच दिया गया होगा।
उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनका बेटा हरियाणा पहुंच चुका है। सुरक्षित वापसी के बाद परिवार ने हरियाणा पुलिस और संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
Key Highlights:
- सोशल मीडिया की मदद से झारखंड का लापता बच्चा परिवार से मिला।
- 11 वर्षीय बच्चा 5 जून से लापता था।
- अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर मिलने के बाद बाल आश्रम भेजा गया।
- SI राजेश कुमार ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया।
- वीडियो कॉल के जरिए परिवार ने बच्चे की पहचान की।
- 17 जून को बाल कल्याण समिति के निर्देश पर परिवार को सौंपा गया।
FAQ Section:
Q1. बच्चा कब लापता हुआ था?
बच्चा 5 जून को झारखंड से लापता हुआ था।
Q2. बच्चे का पता कैसे चला?
हरियाणा पुलिस के SI राजेश कुमार द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के जरिए परिवार ने उसकी पहचान की।
Q3. बच्चा कहां मिला था?
बच्चा ट्रेन में मिला था और बाद में अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से राधा कृष्ण बाल आश्रम, नारायणगढ़ भेजा गया।
Q4. बच्चे को परिवार को कब सौंपा गया?
17 जून को बाल कल्याण समिति के निर्देश पर बच्चे को उसके परिवार को सौंप दिया गया।
Conclusion:
यह घटना दर्शाती है कि सोशल मीडिया का सकारात्मक और जिम्मेदार उपयोग समाज के लिए कितना प्रभावी साबित हो सकता है। हरियाणा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की तत्परता और सूझबूझ से एक लापता बच्चा सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच सका, जो पुलिस और समाज के बीच विश्वास को भी मजबूत करता है।

