पेहोवा में 15 दिवसीय राष्ट्रीय समकालीन शिल्प संगोष्ठी का समापन

सरस्वती महोत्सव–2026 के तहत 16 भव्य पत्थर मूर्तियों का हुआ सृजन

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अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव–2026 के अंतर्गत पेहोवा में आयोजित 15 दिवसीय राष्ट्रीय समकालीन पत्थर शिल्प (स्टोन कार्विंग) संगोष्ठी का सोमवार को समापन हो गया। संगोष्ठी के दौरान देशभर के कलाकारों ने काले संगमरमर से 16 विशाल समकालीन मूर्तियों का निर्माण किया।

अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव–2026 के तहत पेहोवा में आयोजित 15 दिवसीय राष्ट्रीय समकालीन पत्थर शिल्प संगोष्ठी सोमवार को संपन्न हो गई। इस संगोष्ठी का आयोजन हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड (एचएसएचडीबी) द्वारा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सहयोग से किया गया।

संगोष्ठी के दौरान विशाल प्राकृतिक काले संगमरमर के शिलाखंडों से 16 भव्य समकालीन पत्थर मूर्तियों का निर्माण किया गया। इन मूर्तियों को 15 दिनों की कठिन और सूक्ष्म शिल्प प्रक्रिया के माध्यम से आकार दिया गया। इसमें मूर्तिकार विशाल, नंदकिशोर, सविप राज, आशीष, सुमन, संजीव, नरेंद्र, वीएस कुंडू, हृदय कौशल, डॉ. रश्मि, शालिनी, धर्म नेतम, धर्मपाल, संगम, रणजीत, अमित तथा सहायक मूर्तिकार स्मृति ने भाग लिया।

कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा के कला अधिकारी (मूर्तिकला) हृदय कौशल ने बताया कि ये सशक्त कलाकृतियां सरस्वती नदी के पुनरुत्थान, हरियाणा की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं और प्राचीन सिंधु–सरस्वती सभ्यता से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी हरियाणा में लुप्त होती जा रही पत्थर शिल्प परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही सार्वजनिक समकालीन कला में नवीन तकनीकों को भी बढ़ावा देती है।

उन्होंने बताया कि एचएसएचडीबी और कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा पेहोवा तीर्थ में एक समकालीन मूर्तिकला पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां इन सभी मूर्तियों को स्थायी रूप से स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित पार्क वर्षभर एक रचनात्मक केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिसमें स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को प्रशिक्षण, आधारभूत ढांचा और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे पारंपरिक पत्थर शिल्प तकनीकों और आधुनिक कलात्मक नवाचार का समन्वय संभव हो सकेगा।

हृदय कौशल ने कहा कि सरस्वती महोत्सव–2026 के तहत आयोजित इस संगोष्ठी से पेहोवा को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि पारंपरिक मूर्तिकला संरक्षण, समकालीन कला का प्रसार, सामुदायिक गौरव तथा स्कूलों, कॉलेजों और स्वशिक्षित युवाओं को कलात्मक प्रशिक्षण के अवसर भी मिलेंगे। इसके साथ ही यह पहल कुरुक्षेत्र को सरस्वती और सिंधु–सरस्वती अध्ययन का वैश्विक केंद्र बनाने में सहायक होगी।

इस अवसर पर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच ने कहा कि यह संगोष्ठी केवल एक कला आयोजन नहीं, बल्कि प्राचीन विरासत और रचनात्मक भविष्य के बीच एक सजीव सेतु है। उन्होंने कहा कि समकालीन मूर्तिकला पार्क और राष्ट्रीय स्तर के शिल्प शिविरों जैसी पहलों से हरियाणा समकालीन कला और सतत सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।Screenshot_857

Edited By: Atul Sharma

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