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अंबाला कैंट स्टेशन पर 7 महीने में 228 नाबालिग बच्चों को बचाया, पंजाब-हरियाणा में मजदूरी के लिए ले जाने का आरोप
जननायक एक्सप्रेस और कर्मभूमि एक्सप्रेस से 26 संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में बच्चों को बचाया गया, कई को कथित तौर पर खेतों, फैक्ट्रियों और दुकानों में काम के लिए ले जाया जा रहा था।
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पिछले सात महीनों में 228 नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर बाल श्रम के लिए पंजाब और हरियाणा के विभिन्न शहरों में ले जाते समय बचाया गया। संयुक्त टीमों ने फरवरी से अब तक 26 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए हैं।
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
हरियाणा के अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पिछले सात महीनों के दौरान ट्रेनों से 228 नाबालिग बच्चों को बचाया गया है। अधिकारियों और बचाव कार्य में शामिल संगठनों के अनुसार, इन बच्चों को कथित तौर पर पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग शहरों में मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था।
फरवरी से अब तक जननायक एक्सप्रेस और कर्मभूमि एक्सप्रेस में कुल 26 संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए। बचाए गए बच्चों का संबंध बिहार, उत्तर प्रदेश, नेपाल और पश्चिम बंगाल से बताया गया है। रेस्क्यू के बाद बच्चों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात उनके परिवारों के सुपुर्द कर दिया गया।
पंजाब की ओर जा रही ट्रेनों में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार, दोनों ट्रेनें पश्चिम बंगाल और बिहार से पंजाब की ओर जा रही थीं। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर जिला युवा विकास संगठन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त टीमों ने बच्चों को बचाने के लिए अभियान चलाया।जिला युवा विकास संगठन के कार्यक्रम समन्वयक अजय तिवारी ने बताया कि लगातार कार्रवाई के बावजूद इन्हीं दो ट्रेनों में बच्चों को कथित तौर पर मजदूरी के लिए ले जाने की शिकायतें मिलती रही हैं।
कुछ मिनटों के ठहराव से बढ़ती है चुनौती
अजय तिवारी के अनुसार, इन ट्रेनों का स्टेशन पर ठहराव केवल कुछ मिनटों का होता है। ऐसे में बचाव दल के सामने सभी कोचों की जांच करने और संदिग्ध परिस्थितियों में यात्रा कर रहे बच्चों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण होता है।
उन्होंने बताया कि लगातार निगरानी और रेस्क्यू अभियान के बावजूद बच्चों को दूसरे राज्यों में काम के लिए ले जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
पहले बाल श्रम कर चुके बच्चे भी कथित तौर पर ला रहे अन्य बच्चों को
रेस्क्यू अभियान से जुड़े लोगों ने एक चिंताजनक पैटर्न का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, कुछ ऐसे युवा लड़के, जो पहले स्वयं बाल मजदूर के रूप में काम कर चुके थे, बाद में अपने गांवों से अन्य बच्चों को उसी तरह के काम के लिए लाने लगे।
तिवारी ने बताया कि विभिन्न गैर-सरकारी संगठन देश के अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी इसी तरह के बचाव अभियान चला रहे हैं।
20 अगस्त को बिहार के पांच बच्चों को बचाया गया
हाल ही में 20 अगस्त को कर्मभूमि एक्सप्रेस से बिहार के पांच नाबालिग लड़कों को बचाया गया था।
बताया गया कि:
- दो बच्चों को कथित तौर पर जालंधर में कृषि कार्य और किराना दुकान में काम के लिए ले जाया जा रहा था।
- दो बच्चों को करनाल के एक राइस मिल में काम कराने के लिए ले जाने का आरोप था।
- एक बच्चे को पटियाला में किराना दुकान पर काम के लिए ले जाया जा रहा था।
बचाव के बाद सभी बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश किया गया। वहां उनकी काउंसलिंग कराई गई और बाद में उन्हें उनके माता-पिता को सौंप दिया गया। परिजनों को बच्चों को मजदूरी में न लगाने के संबंध में चेतावनी भी दी गई।
RPF कर रही है नियमित जांच
अंबाला RPF पोस्ट के प्रभारी रविंदर सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में नियमित निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि नाबालिग बच्चों को कथित बाल श्रम के लिए ले जाने के मामलों को रोका जा सके।
उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों में बड़ी संख्या उन ट्रेनों से मिली, जो बिहार से आ रही थीं।
Key Highlights:
- अंबाला कैंट स्टेशन पर 7 महीनों में 228 नाबालिग बच्चे रेस्क्यू किए गए।
- फरवरी से अब तक 26 संयुक्त बचाव अभियान चलाए गए।
- जननायक एक्सप्रेस और कर्मभूमि एक्सप्रेस में कार्रवाई की गई।
- बच्चों का संबंध बिहार, उत्तर प्रदेश, नेपाल और पश्चिम बंगाल से बताया गया।
- कई बच्चों को कथित तौर पर पंजाब और हरियाणा में खेतों, दुकानों और फैक्ट्रियों में काम के लिए ले जाया जा रहा था।
- 20 अगस्त को कर्मभूमि एक्सप्रेस से पांच नाबालिग बच्चों को बचाया गया।
- RPF, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और सामाजिक संगठनों की संयुक्त टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
FAQ Section:
अंबाला कैंट स्टेशन पर कितने नाबालिग बच्चों को बचाया गया?
पिछले सात महीनों में कुल 228 नाबालिग बच्चों को बचाया गया है।
कितने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए?
फरवरी से जननायक एक्सप्रेस और कर्मभूमि एक्सप्रेस में कुल 26 संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन किए गए।
बच्चों को कहां से लाया जा रहा था?
रेस्क्यू किए गए बच्चों का संबंध बिहार, उत्तर प्रदेश, नेपाल और पश्चिम बंगाल से बताया गया है।
बच्चों को कहां ले जाया जा रहा था?
आरोप है कि बच्चों को पंजाब और हरियाणा के विभिन्न शहरों में खेतों, फैक्ट्रियों, राइस मिलों और दुकानों में काम कराने के लिए ले जाया जा रहा था।
रेस्क्यू के बाद बच्चों के साथ क्या किया जाता है?
बचाव के बाद बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश किया जाता है, जहां काउंसलिंग के बाद उन्हें उनके परिवारों के सुपुर्द किया जाता है।
Conclusion:
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर सात महीनों में 228 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू होना बाल श्रम और बच्चों को काम के लिए दूसरे राज्यों में ले जाने की गंभीर चुनौती को सामने लाता है। संयुक्त एजेंसियों द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कम समय के ठहराव वाली ट्रेनों में सभी यात्रियों और कोचों की जांच करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए रेलवे, पुलिस, सामाजिक संगठनों और परिवारों के बीच बेहतर जागरूकता और समन्वय की आवश्यकता है।
