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29 साल बाद फिर छपी पंजाबी लेखिका परवेज संधू की ‘मुट्ठी भर सपने’, खालसा कॉलेज में हुआ दूसरा संस्करण जारी
1997 में प्रकाशित कहानी संग्रह में प्रवासी पंजाबी जीवन, रिश्तों की जटिलता और संघर्षों की संवेदनशील तस्वीर
प्रसिद्ध पंजाबी लेखिका परवेज संधू के कहानी संग्रह ‘मुट्ठी भर सपने’ का दूसरा संस्करण अमृतसर के खालसा कॉलेज में जारी किया गया। यह संग्रह पहली बार 1997 में प्रकाशित हुआ था और करीब तीन दशक बाद दोबारा पाठकों के सामने आया है।
पंजाबी साहित्य की चर्चित लेखिका परवेज संधू के कहानी संग्रह ‘मुट्ठी भर सपने’ का दूसरा संस्करण अमृतसर स्थित खालसा कॉलेज में जारी किया गया। वर्ष 1997 में पहली बार प्रकाशित इस पुस्तक का दोबारा प्रकाशन करीब तीन दशक बाद हुआ है।
अमेरिका के वेलिंगहैम में रह रहीं परवेज संधू अपने लेखन में प्रवासी पंजाबी जीवन के अनुभवों, सामाजिक जटिलताओं और विदेश में रहने वाले लोगों की भावनात्मक दुनिया को प्रमुखता से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं।
‘मुट्ठी भर सपने’ में 12 कहानियां
खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल आत्म सिंह रंधावा ने पुस्तक के दूसरे संस्करण के विमोचन के दौरान बताया कि ‘मुट्ठी भर सपने’ में कुल 12 कहानियां शामिल हैं।इन कहानियों में मानवीय अनुभवों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखा गया है। रचनाओं में पंजाब के जीवन और प्रवास के अनुभवों के बीच पैदा होने वाले तनाव को संवेदनशील तरीके से सामने लाया गया है।
प्रवासी जीवन की चुनौतियों और रिश्तों की तस्वीर
कहानी संग्रह में विदेश में रहने वाले लोगों के संघर्ष, जीवन की कठोर वास्तविकताएं, रिश्तों की जटिलताएं और भावनात्मक अनुभव प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
लेखिका ने प्रवासी पंजाबी समाज की परिस्थितियों को केवल सामाजिक नजरिए से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से भी प्रस्तुत किया है।
करीब तीन दशक बाद पुनर्प्रकाशन
‘मुट्ठी भर सपने’ का पहला संस्करण 1997 में प्रकाशित हुआ था। करीब 29 वर्ष बाद इसके दूसरे संस्करण का जारी होना पंजाबी साहित्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रिंसिपल आत्म सिंह रंधावा ने पुस्तक के पुनर्प्रकाशन को पंजाबी साहित्य के लिए सकारात्मक विकास बताया। उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल के बाद संग्रह का दोबारा पाठकों तक पहुंचना इसकी साहित्यिक प्रासंगिकता को भी दर्शाता है।
परवेज संधू की अन्य प्रमुख रचनाएं
परवेज संधू ने पंजाबी साहित्य में कहानी और गद्य दोनों विधाओं में योगदान दिया है। उन्होंने कई कहानी संग्रह और अन्य रचनाएं लिखी हैं।
उनकी प्रमुख कृतियों में ‘तहनियां टूटे’, ‘कोड ब्लू’, ‘बालोरी अख वाला मुंडा’ और ‘परहीन परिंदे’ जैसे कहानी संग्रह शामिल हैं। इसके अलावा उनकी गद्य रचना ‘कंगनी’ भी चर्चित रही है।
आत्म सिंह रंधावा के अनुसार, इन रचनाओं के माध्यम से परवेज संधू ने पंजाबी साहित्य में अपनी अलग पहचान स्थापित की है।
Key Highlights:
- परवेज संधू के कहानी संग्रह ‘मुट्ठी भर सपने’ का दूसरा संस्करण जारी हुआ।
- पुस्तक का पहला संस्करण 1997 में प्रकाशित हुआ था।
- करीब तीन दशक बाद इसका पुनर्प्रकाशन किया गया है।
- अमृतसर के खालसा कॉलेज में पुस्तक का दूसरा संस्करण जारी किया गया।
- संग्रह में कुल 12 कहानियां शामिल हैं।
- कहानियों में प्रवासी पंजाबी जीवन और मानवीय अनुभवों को केंद्र में रखा गया है।
- रचनाओं में संघर्ष, रिश्तों की जटिलता और विदेश में जीवन की कठोर वास्तविकताओं को दर्शाया गया है।
- परवेज संधू की अन्य रचनाओं में ‘तहनियां टूटे’, ‘कोड ब्लू’, ‘बालोरी अख वाला मुंडा’, ‘परहीन परिंदे’ और ‘कंगनी’ शामिल हैं।
FAQ Section:
‘मुट्ठी भर सपने’ किसकी रचना है?
‘मुट्ठी भर सपने’ प्रसिद्ध पंजाबी लेखिका परवेज संधू का कहानी संग्रह है।
‘मुट्ठी भर सपने’ पहली बार कब प्रकाशित हुआ था?
इस कहानी संग्रह का पहला संस्करण वर्ष 1997 में प्रकाशित हुआ था।
‘मुट्ठी भर सपने’ में कितनी कहानियां हैं?
इस संग्रह में कुल 12 कहानियां शामिल हैं।
कहानी संग्रह में किन विषयों को जगह दी गई है?
कहानियों में मानवीय अनुभव, पंजाब और प्रवासी जीवन के बीच का तनाव, संघर्ष, रिश्तों की जटिलताएं और विदेश में रहने वाले लोगों के भावनात्मक अनुभवों को प्रमुखता दी गई है।
परवेज संधू की अन्य प्रमुख रचनाएं कौन-सी हैं?
उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘तहनियां टूटे’, ‘कोड ब्लू’, ‘बालोरी अख वाला मुंडा’, ‘परहीन परिंदे’ और गद्य रचना ‘कंगनी’ शामिल हैं।
Conclusion:
परवेज संधू की ‘मुट्ठी भर सपने’ का करीब तीन दशक बाद दूसरा संस्करण सामने आना पंजाबी साहित्य के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। 12 कहानियों वाला यह संग्रह पंजाब और प्रवासी जीवन के बीच के अनुभवों, संघर्षों और रिश्तों की जटिलताओं को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करता है। खालसा कॉलेज में हुए पुनर्प्रकाशन ने इस साहित्यिक कृति को नई पीढ़ी के पाठकों तक पहुंचाने का रास्ता भी तैयार किया है।

