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हरियाणा से राजस्थान तक बनेगी 295 किमी लंबी भूमिगत नहर, हथिनीकुंड से पहुंचेगा यमुना जल
हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल समझौते को मिली रफ्तार, RCC पाइपलाइन से चूरू तक पहुंचेगा पानी
हरियाणा और राजस्थान सरकार के बीच यमुना जल समझौते के तहत नई भूमिगत नहर परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी यह नहर हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के चूरू जिले तक पानी पहुंचाएगी।
हरियाणा-राजस्थान के बीच नई भूमिगत नहर परियोजना प्रस्तावित
हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की त्रिपक्षीय बैठक के बाद हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हंसियावास तक नई भूमिगत नहर बनाने का प्रस्ताव सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार राजस्थान सरकार ने इस परियोजना की लगभग 400 पन्नों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर हरियाणा सिंचाई विभाग को सौंप दी है।
295.5 किलोमीटर लंबी होगी भूमिगत नहर
DPR के अनुसार प्रस्तावित नहर की कुल लंबाई 295.5 किलोमीटर होगी और इसकी क्षमता 1,900 क्यूसेक पानी ले जाने की होगी।RCC पाइपों से बनेगी पूरी नहर
परियोजना के तहत नहर पूरी तरह भूमिगत बनाई जाएगी और इसके निर्माण में RCC पाइपों का उपयोग किया जाएगा। परियोजना का पूरा खर्च राजस्थान सरकार उठाएगी।
दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बनी सहमति
सूत्रों के मुताबिक 13 मई को नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस परियोजना पर सहमति बनी।
बैठक में शामिल रहे बड़े नेता
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे।
इस दौरान यमुना जल समझौते के तहत पाइपलाइन नहर परियोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
छह जिलों से होकर गुजरेगी नहर
प्रस्तावित नहर हरियाणा के छह जिलों से होकर राजस्थान पहुंचेगी।
इन जिलों से निकलेगी पाइपलाइन
- यमुनानगर
- करनाल
- कुरुक्षेत्र
- कैथल
- जींद
- हिसार
इसके बाद नहर राजस्थान के चूरू जिले में प्रवेश करेगी।
मानसून में राजस्थान को मिलेगा पानी
17 फरवरी 2024 को हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए MoU के तहत जुलाई से अक्टूबर तक हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों को यमुना जल उपलब्ध कराया जाएगा।
बाकी नौ महीने हरियाणा करेगा उपयोग
DPR में बताया गया है कि शेष नौ महीनों के दौरान हरियाणा सिंचाई विभाग आवश्यकता पड़ने पर इस नहर का उपयोग पेयजल आपूर्ति और अन्य जरूरतों के लिए कर सकेगा।
परियोजना के साथ बनेगी निगरानी सड़क
रिपोर्ट के अनुसार नहर के साथ सुरक्षा और मॉनिटरिंग के लिए सड़क भी बनाई जाएगी।
हिसार में बनाए जाएंगे चार आउटलेट
हिसार जिले में चार स्थानों पर आउटलेट प्रस्तावित किए गए हैं, जिनके जरिए हरियाणा की अन्य नहरों में पानी छोड़ा जा सकेगा।
इन स्थानों में शामिल हैं:
- चौधरी माइनर
- सरसाना क्रॉसिंग
- बरवाला नहर
- दनोदा कलां
Central Water Commission करेगी DPR की जांच
संयुक्त DPR जल्द ही केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
मंजूरी के बाद शुरू होगा निर्माण कार्य
हरियाणा सरकार और केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
Key Highlights:
- हथिनीकुंड से राजस्थान तक बनेगी भूमिगत नहर
- कुल लंबाई 295.5 किलोमीटर होगी
- नहर की क्षमता 1,900 क्यूसेक पानी
- RCC पाइपलाइन से होगा निर्माण
- छह हरियाणा जिलों से होकर गुजरेगी परियोजना
- राजस्थान सरकार उठाएगी पूरा खर्च
FAQ Section:
Q1. नई नहर परियोजना कहां से कहां तक बनेगी?
यह नहर हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हंसियावास, चूरू तक बनेगी।
Q2. नहर की कुल लंबाई कितनी होगी?
प्रस्तावित नहर की लंबाई 295.5 किलोमीटर होगी।
Q3. परियोजना का खर्च कौन उठाएगा?
पूरी परियोजना का खर्च राजस्थान सरकार वहन करेगी।
Q4. हरियाणा को इस परियोजना से क्या लाभ होगा?
हरियाणा शेष नौ महीनों में इस नहर का उपयोग पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए कर सकेगा।
Conclusion:
हरियाणा और राजस्थान के बीच प्रस्तावित यह भूमिगत नहर परियोजना जल प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। यमुना जल समझौते के तहत तैयार की गई यह योजना दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्रीय जल संकट को काफी हद तक कम करने की उम्मीद जताई जा रही है।

