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भर्ती घोटाले के आरोपों पर सदन में गरजे सीएम नायब सैनी
कांग्रेस शासन में 7,338 अभ्यर्थियों की 11 भर्तियां रद्द हुईं, भाजपा सरकार में पारदर्शिता का दावा
हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग में कथित भर्ती घोटालों को लेकर कांग्रेस के प्रस्ताव का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कांग्रेस शासन पर गंभीर आरोप लगाए और अपनी सरकार के कार्यकाल में पारदर्शी भर्तियों का दावा किया।
Nayab Singh Saini ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) और Haryana Staff Selection Commission (HSSC) में कथित भर्ती घोटालों को लेकर कांग्रेस के प्रस्ताव का जवाब देते हुए सदन में कहा कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान की गई 11 भर्तियों को अदालतों ने रद्द कर दिया था, जिनमें 7,338 अभ्यर्थी शामिल थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय “भतीजों और भांजों” को नौकरी दी जाती थी और अंतिम परिणाम घोषित होने से पहले ही अखबारों में नाम छप जाते थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में राजनेता तय करते थे कि किसे नौकरी मिलेगी और HPSC तथा HSSC पर दबाव रहता था, जबकि भाजपा सरकार में आयोग तेज़ी और पारदर्शिता से काम कर रहे हैं।
पूर्व कांग्रेस मंत्री Capt Ajay Yadav के एक हालिया बयान का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि उस समय नौकरियां नेताओं के बीच बांटी जाती थीं। “मुख्यमंत्री को 50 प्रतिशत और सुरजेवाला को 30 प्रतिशत मिलते थे—यह आपके ही नेता ने बताया है,” सैनी ने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार यह कहते थे कि यदि 50 वोट लाओगे तो नौकरी मिलेगी। उन्होंने कांग्रेस विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि 2029 में उन्हें सदन से बाहर कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा के 10 वर्षों के शासनकाल में HPSC के माध्यम से 11,017 भर्तियां की गईं, जबकि कांग्रेस के कार्यकाल में यह संख्या 3,593 थी।
तीन परीक्षाओं के रद्द होने और 8,653 पदों के विज्ञापन वापस लेने के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) आयोजित किए जाने के कारण उठाया गया, ताकि नए अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।
उन्होंने बताया कि ग्राम सचिव परीक्षा पेपर लीक की आशंका के चलते रद्द की गई थी। इसे 28 जून 2024 को दोबारा विज्ञापित किया गया, 17 अगस्त 2024 को परीक्षा कराई गई और 17 अक्टूबर 2024 को परिणाम घोषित किया गया।
पटवारी और नहर पटवारी परीक्षाएं पात्रता मानदंड में बदलाव के कारण रद्द की गई थीं, जिन्हें बाद में CET ढांचे के तहत पूरा किया गया। इसी प्रकार 2022 में सिपाही भर्ती परीक्षा भी पेपर लीक की आशंका के चलते रद्द की गई थी।
अंग्रेजी के सहायक प्राध्यापक पद की भर्ती के संबंध में उन्होंने कहा कि प्रक्रिया नियमानुसार की गई, लेकिन हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के कारण अंतिम परिणाम लंबित है।
भूगोल के सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में 32 प्रश्नों के Bihar Public Service Commission के प्रश्नपत्र से लिए जाने तथा इतिहास विषय में 24 प्रश्न अन्य राज्य के प्रश्नपत्र से लिए जाने के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास संबंधी याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है, जबकि भूगोल का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
