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कांगड़ा में ‘टीबी मुक्त भारत’ मिशन को शिक्षण संस्थानों का समर्थन
एचपी बोर्ड में कार्यशाला, 58 संस्थानों ने फेफड़ों के स्वास्थ्य और तंबाकू-मुक्त परिसर पर बनाई कार्ययोजना
Kangra के शिक्षण संस्थानों ने ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान को मजबूत करने का संकल्प लिया। एचपी बोर्ड में आयोजित कार्यशाला में 58 संस्थानों ने जागरूकता, शुरुआती जांच और तंबाकू-मुक्त परिसर के लिए रोडमैप तैयार किया।
‘टीबी मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय मिशन को सशक्त बनाने के लिए Kangra के शिक्षण संस्थानों ने नई प्रतिबद्धता के साथ भागीदारी की। Himachal Pradesh Board of School Education में आयोजित कार्यशाला में 58 संस्थानों के प्राचार्यों और शिक्षाविदों ने व्यापक स्वास्थ्य प्रोत्साहन की रूपरेखा तैयार की, जिसमें फेफड़ों के स्वास्थ्य और तंबाकू-मुक्त परिसर पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला में युवाओं की रचनात्मक क्षमता को अभियान की प्रमुख ताकत बताया गया। कॉलेजों, आईटीआई और नर्सिंग संस्थानों को पोस्टर निर्माण, डिजिटल अभियान, वाद-विवाद और नवाचार प्रतियोगिताओं के माध्यम से जागरूकता को जनआंदोलन में बदलने के लिए प्रेरित किया गया। सोशल मीडिया को युवाओं की आवाज को सशक्त करने, टीबी से जुड़े कलंक को कम करने और सही स्वास्थ्य जानकारी फैलाने का प्रभावी माध्यम बताया गया।
सीएमओ कांगड़ा डॉ. विवेक करोल ने युवाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा में समाज के सभी वर्गों की जिम्मेदारी रेखांकित की। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को स्वस्थ वातावरण तैयार कर, सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देकर और निरंतर स्वास्थ्य जागरूकता चलाकर उदाहरण पेश करना चाहिए।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी सह-टीबी अधिकारी डॉ. आर.के. सूद ने कहा कि टीबी रोगी उपचार शुरू करने के तुरंत बाद संक्रामक नहीं रहते, इसलिए उन्हें सामाजिक अलगाव का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने संवेदनशील समूहों में हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक के माध्यम से शीघ्र जांच और निवारक उपचार पर बल दिया।
अधिकारियों ने विश्वास जताया कि शिक्षण संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से जिले में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकेगा।
