कांग्रेस का हरियाणा सरकार पर हमला, गेहूं खरीद को बताया ‘राजनीतिक ड्रामा’

रांदीप सुरजेवाला ने मंडियों में अव्यवस्था का लगाया आरोप, किसानों और आढ़तियों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया

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कांग्रेस सांसद रांदीप सुरजेवाला और विधायक आदित्य सुरजेवाला ने हरियाणा की मंडियों का दौरा कर सरकार पर गेहूं खरीद में लापरवाही और अव्यवस्था के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर और आढ़ती परेशान हैं और फसल का समय पर उठान नहीं हो रहा।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रांदीप सुरजेवाला और उनके बेटे, कैथल से विधायक आदित्य सुरजेवाला ने हरियाणा की अनाज मंडियों का दौरा करने के बाद राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ बीजेपी ने गेहूं खरीद प्रक्रिया को “राजनीतिक ड्रामा” बना दिया है, जिससे किसान, आढ़ती और मंडी मजदूर सभी परेशान हैं।

रांदीप सुरजेवाला ने कहा, “कड़ी धूप में किसान, मजदूर और आढ़ती बिना उचित व्यवस्थाओं के परेशान हो रहे हैं। सरकार की नीयत साफ है—मंडियां भरी हुई हैं, लेकिन किसानों की जेब खाली है।”

उन्होंने दावा किया कि हरियाणा की मंडियों में अब तक 78.68 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं आ चुका है, लेकिन करीब 18 LMT गेहूं खुले आसमान के नीचे बिना बिके पड़ा है और 37.07 LMT खरीदा गया गेहूं अभी तक उठाया नहीं गया है।

कैथल में ही 21 अप्रैल तक 6.15 LMT गेहूं की खरीद हुई, लेकिन केवल 2.61 LMT का उठान हुआ, यानी लगभग 62 प्रतिशत फसल अभी भी मंडी में पड़ी है।

सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार पर आरोप लगाया कि उसने बायोमेट्रिक सत्यापन, ट्रैक्टर नंबर अपलोड और सर्वर समस्याओं जैसे नियम लागू कर किसानों के लिए बाधाएं खड़ी कर दी हैं, जिन्हें उन्होंने “किसान विरोधी फैसले” बताया।

उन्होंने आढ़तियों के कमीशन में कटौती की भी आलोचना की और कहा कि व्यापारियों के साथ विश्वासघात हुआ है, क्योंकि उन्हें मंडी मजदूरों का भुगतान अपनी जेब से करना पड़ रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि मंडियों में भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, बेमौसम बारिश के दौरान तिरपाल की कमी है और 48 घंटे में भुगतान के वादे के बावजूद देरी हो रही है।

उन्होंने कहा, “किसानों की फसल मंडियों में खराब हो रही है, लेकिन सरकार उन्हें बुनियादी सुरक्षा या मुआवजा देने में भी विफल है।”

सुरजेवाला ने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि खरीद प्रक्रिया को बिना तकनीकी बाधाओं के सुचारू बनाया जाए और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

 
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Edited By: Karan Singh

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