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पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की याद में भावुक हुआ परिवार
एक फोन कॉल ने उजाड़ दी दुनिया, बहन ने कहा— “उनका बलिदान हमेशा प्रेरणा देगा”
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। परिवार आज भी गहरे दुख में है, लेकिन उनके सपनों और देशभक्ति को याद कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए दुखद आतंकी हमले को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन इस हमले में शहीद हुए 26 लोगों में शामिल लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार के लिए यह दर्द आज भी ताजा है।
उस दिन की दर्दनाक यादें आज भी उनके परिवार को झकझोर देती हैं। एक फोन कॉल ने उनकी पूरी दुनिया बदल दी थी। समय बीतने के बावजूद परिवार इस दुख से उबर नहीं पाया है और हर दिन उनकी यादों के सहारे जी रहा है।
विनय की बहन सृष्टि नरवाल ने अपने भाई को खोने का दर्द बयां करते हुए कहा, “एक साल पहले आया एक फोन कॉल हमारी दुनिया उजाड़ गया। सबसे ज्यादा मुश्किल अपने माता-पिता को इस दुख में देखना है। मैं उन्हें संभालने की कोशिश करती हूं और विनय के साथ बिताए अच्छे पलों को याद दिलाती हूं, ताकि वह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहें।”
उन्होंने बताया कि हादसे से ठीक पहले परिवार की विनय से आखिरी बातचीत हुई थी, जिसकी याद आज भी एक ऐसा घाव है जो कभी नहीं भरेगा।
सृष्टि ने कहा कि विनय के लिए देश सेवा एक सपना था। “देश हमेशा उनके लिए सबसे पहले था। बचपन से ही वह सेना में जाना चाहते थे और भारत की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करना चाहते थे। उनका बलिदान हम सभी को अच्छे नागरिक बनने और देश के लिए योगदान देने की प्रेरणा देता है।”
उन्होंने अपने और विनय के स्कूल सेंट कबीर पब्लिक स्कूल में उन्हें श्रद्धांजलि दी, जहां परिवार, शिक्षक और छात्रों ने मिलकर उन्हें याद किया।
सृष्टि ने सरकार से मांग की कि विनय की स्मृति में किसी मेडिकल कॉलेज या शैक्षणिक संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा जाए, जिसे उन्होंने उनके बलिदान के लिए सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि 1 मई को विनय के जन्मदिन पर एक रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने आम जनता से इसमें भाग लेने की अपील करते हुए कहा, “इस सेवा के माध्यम से हम उनकी आत्मा को जीवित रखेंगे।”
सृष्टि ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने की भी बात कही। उन्होंने कहा, “आतंकवाद एक ऐसी बीमारी है जो पूरे विश्व को नुकसान पहुंचाती है। इसे जड़ से खत्म करना जरूरी है, ताकि कोई और परिवार इस दर्द से न गुजरे।”
विनय के दादा हवा सिंह ने कहा कि हर दिन उन्हें अपने पोते की बहादुरी और बलिदान की याद दिलाता है। “मैं अपने पोते को कभी नहीं भूल सकता, वह मेरे बहुत करीब था,” उन्होंने कहा।
वहीं, उनके पिता राजेश नरवाल ने ‘वॉल ऑफ वेलर’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। स्कूल प्रबंधन के अनुसार यह स्मारक छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
इससे पहले, सेंट कबीर पब्लिक स्कूल के होनहार छात्र रहे लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पहली पुण्यतिथि उनके परिवार और स्कूल द्वारा श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
