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सनी देओल की फिल्म ‘सूर्या’ की रिलीज रोकने की मांग, डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाने पर IMA ने जताई आपत्ति
हरियाणा IMA ने सेंसर बोर्ड को लिखा पत्र, आरोप लगाया कि फिल्म का ट्रेलर डॉक्टरों पर अनावश्यक जांच करने का आरोप लगाकर पूरे चिकित्सा पेशे की छवि खराब करता है
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हरियाणा शाखा ने सनी देओल अभिनीत फिल्म ‘सूर्या – आरंभ से अंत तक’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि फिल्म का ट्रेलर डॉक्टरों को गलत तरीके से पेश करता है और मरीजों व डॉक्टरों के बीच भरोसे को नुकसान पहुंचा सकता है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की हरियाणा शाखा ने आगामी फिल्म ‘सूर्या – आरंभ से अंत तक’ की रिलीज रोकने की मांग की है। एसोसिएशन ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि फिल्म के ट्रेलर में डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाया गया है और उन पर अनावश्यक मेडिकल जांच कराने के आरोप लगाए गए हैं।
गुरुवार को CBFC के अध्यक्ष को लिखे पत्र में IMA ने कहा कि वह राज्य के 10,000 से अधिक डॉक्टरों की ओर से अपनी आपत्ति दर्ज करा रही है। एसोसिएशन के अनुसार, ट्रेलर में डॉक्टरों पर जरूरत से ज्यादा जांच कराने का आरोप लगाकर पूरे चिकित्सा पेशे की छवि खराब की गई है।
पत्र पर IMA हरियाणा की अध्यक्ष डॉ. सुनीला सोनी, मानद सचिव डॉ. योगेश जिंदल और IMA हरियाणा के चेयरमैन डॉ. अजय महाजन के हस्ताक्षर हैं।
सनी देओल मुख्य भूमिका में
फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इसके टीजर में उन्हें अपनी बेटी की मौत के बाद शोक में डूबे हुए दिखाया गया है। टीजर में फिल्म को वास्तविक घटनाओं पर आधारित बताया गया है और चिकित्सा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को दर्शाया गया है।
IMA ने पत्र में रखीं पांच प्रमुख बातें
IMA ने अपने पत्र में पांच प्रमुख बिंदु उठाए। एसोसिएशन ने कहा कि लगभग 99 प्रतिशत डॉक्टर नैतिक तरीके से काम करते हैं और ईमानदारी से मरीजों की सेवा करते हैं। डॉक्टरों को इस पेशे के लिए 10 से 12 वर्षों तक कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि चिकित्सा विज्ञान को गणित की तरह नहीं देखा जा सकता, क्योंकि बीमारी का बढ़ना और उसका स्वरूप बदलना हमेशा अनुमान के मुताबिक नहीं होता। मरीज की सही स्थिति का पता लगाने और उचित इलाज तय करने के लिए मेडिकल जांच जरूरी होती है, न कि पैसे कमाने का जरिया।
पत्र में डॉक्टरों पर काम के भारी दबाव, सीमित संसाधनों और हिंसा व कानूनी कार्रवाई के लगातार खतरे का भी उल्लेख किया गया। IMA के अनुसार, लापरवाही के आरोपों और मुकदमों के डर से डॉक्टर कई बार संभावित जोखिमों को ध्यान में रखकर अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं।
डॉक्टर-मरीज के भरोसे पर असर पड़ने की आशंका
IMA ने कहा कि चिकित्सा पेशे को एकतरफा और नकारात्मक तरीके से दिखाने से डॉक्टरों तथा मरीजों के बीच भरोसा कमजोर हो सकता है। एसोसिएशन ने आशंका जताई कि इस तरह की प्रस्तुति डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे सकती है। उसने इसके लिए CBFC को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए फिल्म की रिलीज रोकने की मांग की है।

