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झज्जर सिविल अस्पताल के ब्लड सेंटर में 19.14 लाख रुपये के गबन का खुलासा, NHM अकाउंटेंट पर FIR की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग की जांच समिति ने तीन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं पकड़ीं, कानूनी कार्रवाई और विशेष ऑडिट की सिफारिश।
झज्जर सिविल अस्पताल के ब्लड सेंटर में प्रोसेसिंग फीस से जुड़े 19.14 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच समिति ने NHM के एक अकाउंटेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और विस्तृत वित्तीय ऑडिट की सिफारिश की है।
झज्जर के ब्लड सेंटर में 19.14 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा
हरियाणा के झज्जर स्थित सिविल अस्पताल के ब्लड सेंटर में प्रोसेसिंग फीस से जुड़े 19.14 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के एक अकाउंटेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
जांच समिति में उप सिविल सर्जन सहित स्वास्थ्य विभाग के तीन अधिकारी शामिल थे।
तीन वर्षों में लाखों रुपये बैंक खाते में जमा नहीं हुए
जांच रिपोर्ट के अनुसार ब्लड सेंटर से निजी अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाने वाली रक्त इकाइयों (Blood Units) की प्रोसेसिंग फीस जमा कराने की जिम्मेदारी संबंधित अकाउंटेंट की थी।जांच में पाया गया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान प्राप्त पूरी राशि अधिकृत बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई, जिससे विभाग को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
वर्षवार सामने आया गड़बड़ी का आंकड़ा
जांच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय अनियमितताओं का विवरण इस प्रकार है—
वर्ष 2023-24
- कुल प्राप्त राशि: 10,97,700 रुपये
- बैंक खाते में जमा: 82,500 रुपये
- अंतर: 10,15,200 रुपये
वर्ष 2024-25
- कुल प्राप्त राशि: 7,34,700 रुपये
- बैंक खाते में जमा: 2,37,600 रुपये
- अंतर: 4,97,100 रुपये
वर्ष 2025-26
- कुल प्राप्त राशि: 5,90,600 रुपये
- बैंक खाते में जमा: 1,88,100 रुपये
- अंतर: 4,02,500 रुपये
कुल मिलाकर 19,14,800 रुपये अधिकृत बैंक खाते में जमा नहीं किए गए।
जांच समिति ने बताया वित्तीय गड़बड़ी का मामला
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इसे वित्तीय अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और कर्तव्य में लापरवाही का मामला बताया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ब्लड सेंटर से जुड़े दूसरे बैंक खाते में भी कोई राशि जमा नहीं कराई गई।
FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस को दी शिकायत
झज्जर की सिविल सर्जन डॉ. मंजू कादियान ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि संबंधित अकाउंटेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को शिकायत भेज दी गई है।
साथ ही आरोपी अकाउंटेंट को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस भी जारी किया गया है।
2019 से अब तक के खातों की विशेष ऑडिट की सिफारिश
जांच समिति ने सिफारिश की है कि वर्ष 2019 में नियुक्ति के बाद से संबंधित अकाउंटेंट द्वारा किए गए सभी वित्तीय लेन-देन की व्यापक ऑडिट कराई जाए।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यह ऑडिट NHM हरियाणा के प्रबंध निदेशक (MD) या हरियाणा स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी, पंचकूला के परियोजना निदेशक की निगरानी में कराया जाए।
समिति का मानना है कि विस्तृत जांच में और भी वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
Key Highlights
- झज्जर सिविल अस्पताल के ब्लड सेंटर में 19.14 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी।
- NHM के अकाउंटेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश।
- पुलिस में शिकायत देकर FIR दर्ज कराने की मांग।
- तीन वर्षों में प्रोसेसिंग फीस की पूरी राशि बैंक खाते में जमा नहीं हुई।
- वर्ष 2019 से अब तक के सभी वित्तीय रिकॉर्ड की विशेष ऑडिट की सिफारिश।
FAQ Section
Q1. मामला किस अस्पताल से जुड़ा है?
झज्जर शहर के सिविल अस्पताल स्थित ब्लड सेंटर से।
Q2. कितनी राशि की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है?
जांच समिति के अनुसार 19,14,800 रुपये अधिकृत बैंक खाते में जमा नहीं किए गए।
Q3. किसके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश हुई है?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के एक अकाउंटेंट के खिलाफ।
Q4. आगे क्या कार्रवाई होगी?
पुलिस में शिकायत देकर FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही विस्तृत वित्तीय ऑडिट की भी सिफारिश की गई है।
Conclusion
झज्जर सिविल अस्पताल के ब्लड सेंटर में सामने आई यह कथित वित्तीय अनियमितता सरकारी धन के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद अब पुलिस कार्रवाई और विशेष ऑडिट से पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

