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अकाल तख्त का पंजाब सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम, बेअदबी कानून की आपत्तिजनक धाराएं हटाने के निर्देश
जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट में संशोधन तक कानून लागू न करने की सलाह, सभी दलों के सिख विधायकों ने बदलाव करने पर जताई सहमति।
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने पंजाब सरकार को एक महीने के भीतर बेअदबी कानून की विवादित धाराओं में संशोधन करने का निर्देश दिया है। अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए सभी सिख विधायकों और मंत्रियों ने आवश्यक बदलाव करने पर सहमति जताई।
अकाल तख्त का पंजाब सरकार को बड़ा निर्देश, एक महीने में बदलें बेअदबी कानून की विवादित धाराएं
पंजाब में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार को अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि कानून की सभी "आपत्तिजनक" धाराओं को एक महीने के भीतर संशोधित किया जाए। साथ ही उन्होंने संशोधन होने तक इस कानून को लागू न करने की सलाह भी दी।
अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित सभी सिख मंत्रियों और विधायकों ने आवश्यक संशोधन कराने का भरोसा दिया।
पहली बार सभी दलों के सिख विधायक एक साथ पहुंचे अकाल तख्त
यह पहला अवसर था जब सभी राजनीतिक दलों के सिख विधायक और मंत्री एक साथ अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए।बैठक में कुल 87 विधायक शामिल हुए, जिनमें:
- 69 विधायक आम आदमी पार्टी (AAP) के
- 15 विधायक कांग्रेस के
- 2 विधायक शिरोमणि अकाली दल (SAD) के
- 1 निर्दलीय विधायक शामिल थे।
इससे पहले अलग-अलग मामलों में नेता व्यक्तिगत रूप से अकाल तख्त के समक्ष पेश होते रहे हैं।
'सिख परंपराओं की समझ के बिना तैयार किया गया कानून'
ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा कि सरकार को कानून का मसौदा तैयार करते समय गलत सलाह दी गई।
उन्होंने कहा कि विधेयक तैयार करने वालों को सिख परंपराओं और पंथक मर्यादाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं थी, जिसके कारण अनावश्यक विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि कानून के मौजूदा स्वरूप ने श्रद्धालुओं में आशंका और असमंजस पैदा किया है।
जत्थेदार ने भरोसा दिलाया कि यदि सरकार सिख भावनाओं और पंथक परंपराओं के अनुरूप संशोधन करती है तो अकाल तख्त पूरा सहयोग देगा।
'कस्टोडियन' और गुरु ग्रंथ साहिब के रजिस्टर पर जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा कानून में प्रयुक्त "कस्टोडियन" शब्द और गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का केंद्रीय रजिस्टर बनाने के प्रस्ताव पर हुई।
ज्ञानी गर्गज ने कहा कि यदि इन स्वरूपों का ऑनलाइन रिकॉर्ड सार्वजनिक किया गया तो निजी घरों और गुरुद्वारों में रखे गुरु ग्रंथ साहिब के स्थान सार्वजनिक हो जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब की बीड़ों का रिकॉर्ड रखना और उनके प्रकाशन की निगरानी करना सरकार नहीं बल्कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की जिम्मेदारी है।
साथ ही उन्होंने कानून में "सरूप" शब्द के उपयोग पर भी आपत्ति जताते हुए पारंपरिक "बीड़" शब्द इस्तेमाल करने की सलाह दी।
कई विधायकों ने माना, बिना पढ़े पारित कर दिया था बिल
बैठक के दौरान जत्थेदार ने विधायकों से पूछा कि क्या उन्होंने बिल पढ़ा था।
इस पर अधिकांश विधायकों ने बताया कि उन्हें विधानसभा में पेश होने से कुछ समय पहले ही बिल की प्रति मिली थी और उसे विस्तार से पढ़ने का समय नहीं मिला।
आम आदमी पार्टी के विधायक जगरूप सिंह गिल और कुलवंत सिंह ने स्वीकार किया कि उन्होंने बिल को पूरी तरह पढ़े बिना ही समर्थन दे दिया था।
विधानसभा स्पीकर बोले- संशोधन के लिए तैयार है सरकार
विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने बताया कि मई में अकाल तख्त से मिले आपत्ति पत्र को उन्होंने तुरंत पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया था।
उन्होंने कहा कि विधानसभा के पास कानून में संशोधन करने का पूरा अधिकार है और सरकार आवश्यक बदलाव करने के लिए तैयार है।
इस पर जत्थेदार ने स्पष्ट कहा कि सभी आपत्तियां लिखित रूप में सरकार को दी जाएंगी और विधानसभा बुलाकर एक महीने के भीतर उन्हें दूर किया जाए।
विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मांग की कि संशोधित विधेयक पेश करने से पहले सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट विधानसभा में रखी जाए और उस पर चर्चा कराई जाए।
कांग्रेस विधायक त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि कैबिनेट ने 11 अप्रैल को बिल मंजूर किया, 12 अप्रैल की देर रात इसे वेबसाइट पर अपलोड किया गया और 13 अप्रैल को ही विधानसभा में पारित कर दिया गया।
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने आरोप लगाया कि पेपरलेस विधानसभा होने के कारण सदस्यों को बिल केवल सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद स्क्रीन पर देखने को मिला और सरकार ने इसे जल्दबाजी तथा गोपनीय तरीके से पारित कराया।
अकाल तख्त ने स्पष्ट किया धार्मिक और कानूनी दंड का अंतर
बैठक के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने "कस्टोडियन" शब्द को लेकर पहले जारी एक हुकमनामे का उल्लेख किया।
इस पर जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि उस हुकमनामे में केवल धार्मिक जिम्मेदारी और धार्मिक दंड का उल्लेख था, किसी प्रकार की कानूनी सजा का नहीं।
सभी विधायकों ने संशोधन करने पर जताई सहमति
बैठक के अंत में उपस्थित सभी विधायकों ने हाथ उठाकर अकाल तख्त द्वारा सुझाए गए संशोधनों को स्वीकार करने और विधानसभा में आवश्यक बदलाव कराने पर सहमति जताई।
Key Highlights
- अकाल तख्त ने पंजाब सरकार को एक महीने में कानून संशोधित करने का निर्देश दिया।
- संशोधन तक जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट को लागू न करने की सलाह।
- पहली बार सभी दलों के 87 विधायक एक साथ अकाल तख्त पहुंचे।
- कई विधायकों ने माना कि बिल बिना पूरी तरह पढ़े पारित किया गया।
- "कस्टोडियन", "सरूप" और केंद्रीय रजिस्टर पर अकाल तख्त ने गंभीर आपत्तियां जताईं।
- सभी विधायकों ने कानून में संशोधन कराने पर सहमति जताई।
FAQ Section
Q1. अकाल तख्त ने पंजाब सरकार को क्या निर्देश दिया?
एक महीने के भीतर कानून की विवादित धाराओं में संशोधन करने और तब तक कानून लागू न करने का निर्देश दिया।
Q2. किन प्रावधानों पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई गई?
"कस्टोडियन" की परिभाषा, गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का केंद्रीय रजिस्टर और "सरूप" शब्द के उपयोग पर।
Q3. क्या विधायकों ने संशोधन के लिए सहमति दी?
हाँ। बैठक के अंत में सभी विधायकों ने हाथ उठाकर आवश्यक संशोधन कराने पर सहमति जताई।
Q4. विपक्ष ने क्या आरोप लगाए?
विपक्ष ने आरोप लगाया कि बिल को जल्दबाजी और पर्याप्त चर्चा के बिना विधानसभा से पारित कराया गया।
Conclusion
जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट को लेकर अकाल तख्त और पंजाब सरकार के बीच संवाद का नया दौर शुरू हो गया है। एक महीने में संशोधन करने के निर्देश और सभी दलों के विधायकों की सहमति से यह स्पष्ट है कि सरकार अब विवादित प्रावधानों पर पुनर्विचार कर सकती है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस कानून में संशोधन को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

