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अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, सिख इतिहास में परिवार से जुड़ा बना दूसरा बड़ा उदाहरण
जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट के मुद्दे पर अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, पूरे राज्य के सिख विधायक और मंत्री भी रहे मौजूद।
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां सोमवार को अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए। इस दौरान राज्य के सभी सिख विधायक और मंत्री भी उपस्थित रहे। यह सिख इतिहास का दूसरा अवसर है जब संधवां परिवार के दो सदस्य अलग-अलग समय पर अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए हैं।
अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां सोमवार को जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट के मुद्दे पर अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए। कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के समन के बाद राज्य के सभी सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री भी अकाल तख्त पहुंचे।
यह घटनाक्रम पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिख इतिहास में दूसरी बार बना ऐसा पारिवारिक उदाहरण
कुलतार सिंह संधवां की पेशी सिख इतिहास में एक विशेष महत्व रखती है। यह दूसरा अवसर है जब संधवां परिवार के दो सदस्यों को अलग-अलग समय पर अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होना पड़ा।इससे पहले जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति और भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर ज्ञानी जैल सिंह को अकाल तख्त ने नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए तलब किया था।
हालांकि अक्सर कुलतार सिंह संधवां को ज्ञानी जैल सिंह का पोता माना जाता है, जबकि वे वास्तव में जैल सिंह के भाई जंगीर सिंह के पोते हैं।
42 साल बाद दोबारा दोहराया गया इतिहास
करीब 42 वर्ष बाद कुलतार सिंह संधवां अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए, जिससे संधवां परिवार सिख इतिहास में दूसरी बार इस तरह की धार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा बना।
इससे पहले ऐसा उदाहरण केवल बादल परिवार में देखने को मिला था।
बादल परिवार भी बन चुका है मिसाल
साल 1978 में अमृतसर में सिखों और निरंकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को अकाल तख्त ने तलब किया था।
इसके बाद वर्ष 2024 में पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को 2007 से 2017 के दौरान शिरोमणि अकाली दल सरकार के कार्यकाल में बेअदबी मामलों और अन्य पंथ विरोधी फैसलों के संबंध में 'तनखैया' घोषित करते हुए धार्मिक दंड सुनाया गया था।
अकाल तख्त के अधिकारों पर विशेषज्ञों की राय
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त राजनीति विज्ञान प्रोफेसर कुलदीप सिंह के अनुसार अकाल तख्त के जत्थेदार के पास कानूनी दंड देने का अधिकार नहीं है। वे किसी व्यक्ति को जेल या जुर्माना नहीं दे सकते।
हालांकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार किसी व्यक्ति को 'तनखैया' घोषित किया जा सकता है और प्रायश्चित के रूप में सेवा, अरदास, बर्तन या जूते साफ करने जैसी धार्मिक जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। कुछ मामलों में गले में तख्ती पहनकर सार्वजनिक रूप से पश्चाताप करने का निर्देश भी दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को भी 1986 के ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर में पुलिस भेजने के मामले में अकाल तख्त के समक्ष जवाब देना पड़ा था।
Key Highlights
- पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए।
- जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट के मुद्दे पर हुई पेशी।
- सभी सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री भी अकाल तख्त पहुंचे।
- संधवां परिवार सिख इतिहास में दूसरी बार अकाल तख्त के समक्ष पेश होने वाला परिवार बना।
- विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अकाल तख्त धार्मिक दंड दे सकता है, लेकिन कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकता।
FAQ Section
Q1. कुलतार सिंह संधवां अकाल तख्त के समक्ष क्यों पेश हुए?
वे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट से जुड़े मामले में अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए।
Q2. क्या सभी सिख विधायक भी अकाल तख्त पहुंचे थे?
हाँ, कार्यवाहक जत्थेदार के समन के बाद राज्य के सभी सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री अकाल तख्त पहुंचे।
Q3. क्या कुलतार सिंह संधवां, ज्ञानी जैल सिंह के पोते हैं?
नहीं। वे ज्ञानी जैल सिंह के भाई जंगीर सिंह के पोते हैं।
Q4. क्या अकाल तख्त कानूनी सजा दे सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार अकाल तख्त धार्मिक और नैतिक दंड दे सकता है, लेकिन कानूनी सजा जैसे जुर्माना या कारावास नहीं दे सकता।
Conclusion
पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां की अकाल तख्त के समक्ष पेशी ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई चर्चा को जन्म दिया है। सिख इतिहास में संधवां परिवार से जुड़ा यह दूसरा महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। चुनावी माहौल के बीच यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति और धार्मिक विमर्श पर प्रभाव डाल सकता है।

