पंजाब कांग्रेस के सभी 15 विधायक अकाल तख्त के समक्ष पेश, पार्टी हाईकमान से बिना सलाह के बड़ा राजनीतिक कदम

नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने गोल्डन टेंपल परिसर में की पेशी, ‘जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतरकार एक्ट’ विवाद से जुड़ा मामला।

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पंजाब कांग्रेस के सभी 15 विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में अकाल तख्त के पांच सिंह साहिबानों के समक्ष पेश होकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह कदम पार्टी हाईकमान से बिना पूर्व सलाह के उठाया गया बताया जा रहा है।

पंजाब कांग्रेस के सभी 15 विधायक अकाल तख्त के समक्ष पेश

पंजाब की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब कांग्रेस के सभी 15 विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) परिसर में स्थित अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

यह पूरी प्रक्रिया सिख धर्म के पांच सिंह साहिबानों और कार्यवाहक जत्थेदार गियानी कुलदीप सिंह गड़गज की अध्यक्षता में हुई।


बिना हाईकमान की सलाह के लिया गया फैसला

सूत्रों के अनुसार, यह कदम कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से बिना किसी पूर्व परामर्श के उठाया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

प्रताप सिंह बाजवा ने बताया कि उन्होंने विधायकों की बैठक अमृतसर में पहले ही बुलाई थी, जिसके बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सभी विधायक अकाल तख्त के समक्ष पेश होंगे।


‘जागृत जोत सतरकार एक्ट’ विवाद से जुड़ा मामला

यह पूरा मामला ‘जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतरकार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसे लेकर धार्मिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था।

इस कानून के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिसे लेकर अकाल तख्त ने भी आपत्ति जताई थी।


अकाल तख्त के समक्ष सामूहिक पेशी से बढ़ी राजनीतिक हलचल

कांग्रेस विधायकों की इस सामूहिक पेशी को पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल धार्मिक संस्थानों के प्रति राजनीतिक दलों के रुख को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा पर भी असर डाल सकता है।


बाजवा बोले- सर्वसम्मति से लिया गया फैसला

नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि विधायकों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया कि वे अकाल तख्त के सामने उपस्थित होंगे।

उन्होंने कहा कि यह कदम किसी दबाव में नहीं बल्कि सामूहिक निर्णय के तहत लिया गया है।


कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के बीच बढ़ी हलचल

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव की चर्चा चल रही है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष पद में फेरबदल की संभावना भी शामिल है।


Key Highlights

  • पंजाब कांग्रेस के सभी 15 विधायक अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए।
  • नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने नेतृत्व किया।
  • फैसला पार्टी हाईकमान की सलाह के बिना लिया गया।
  • मामला ‘जागृत जोत सतरकार एक्ट’ विवाद से जुड़ा।
  • पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की चर्चा के बीच बड़ा घटनाक्रम।

FAQ Section

Q1. कांग्रेस विधायक अकाल तख्त क्यों पहुंचे?

वे ‘जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतरकार एक्ट’ से जुड़े विवाद के कारण अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए।

Q2. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?

नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने।

Q3. क्या यह फैसला पार्टी हाईकमान की सहमति से लिया गया?

सूत्रों के अनुसार यह निर्णय बिना केंद्रीय हाईकमान से परामर्श के लिया गया।

Q4. यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह घटना पंजाब की राजनीति और धार्मिक संस्थानों के बीच संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


Conclusion

पंजाब कांग्रेस के सभी विधायकों की अकाल तख्त के समक्ष सामूहिक पेशी ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यह कदम जहां धार्मिक भावनाओं और परंपराओं से जुड़ा माना जा रहा है, वहीं इसके राजनीतिक निहितार्थ भी दूरगामी हो सकते हैं।Screenshot_2867

Edited By: Karan Singh

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