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कैथल में ज्ञान भारतम मिशन को गति, 10 जून तक पूरा होगा राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे
डीसी अपराजिता ने अधिकारियों को दिए निर्देश, 75 साल से अधिक पुरानी पांडुलिपियों और दस्तावेजों की होगी डिजिटल रिकॉर्डिंग
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से कैथल जिला प्रशासन ने ज्ञान भारतम मिशन के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे को तेज कर दिया है। डीसी अपराजिता ने 10 जून तक सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
कैथल में तेज हुआ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे अभियान
हरियाणा के कैथल जिले में भारत की प्राचीन बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे अभियान को तेज कर दिया गया है। जिला उपायुक्त अपराजिता ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत चल रहे इस सर्वे को 10 जून तक पूरा किया जाए।
इस संबंध में सोमवार को मिनी सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
केंद्र सरकार ने शुरू किया था ज्ञान भारतम मिशन
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने 16 मार्च 2026 को ज्ञान भारतम पहल के तहत “ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे” की शुरुआत की थी।इस मिशन का उद्देश्य देशभर में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों और अभिलेखीय दस्तावेजों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण करना है।
75 साल पुराने दस्तावेजों की होगी पहचान
डीसी अपराजिता ने बताया कि मिशन के तहत:
- धार्मिक स्थलों
- शिक्षण संस्थानों
- पुस्तकालयों
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के निजी संग्रहों
में मौजूद 75 वर्ष से अधिक पुराने दस्तावेजों और पांडुलिपियों की पहचान की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक स्मृतियों की धरोहर हैं।
डिजिटल संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
प्रशासन का उद्देश्य इन दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि कैथल जिले से अब तक 387 पांडुलिपियां ज्ञान भारतम मिशन पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी हैं।
सर्वे के दौरान जुटाए गए सभी आंकड़ों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा।
मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेंगी पांडुलिपियां
डीसी ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास पांडुलिपियां या अभिलेखीय दस्तावेज हैं, उनका स्वामित्व उन्हीं के पास रहेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल इनका रिकॉर्ड तैयार कर संरक्षण में मदद कर रही है। लोगों से अपील की गई है कि वे स्वेच्छा से आगे आकर ऐसी धरोहरों की जानकारी साझा करें।
जिला स्तर पर बनाई गई समिति
मिशन के सफल संचालन के लिए जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया गया है। एडीसी सुशील कुमार को इस अभियान का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
साथ ही सभी एसडीएम को अपने-अपने उपमंडलों में नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
Key Highlights:
- कैथल में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे अभियान तेज
- 10 जून तक सर्वे पूरा करने के निर्देश
- 75 साल पुराने दस्तावेजों की होगी पहचान
- अब तक 387 पांडुलिपियां पोर्टल पर अपलोड
- डिजिटल संरक्षण पर सरकार का जोर
- लोगों से स्वेच्छा से जानकारी साझा करने की अपील
FAQ Section:
Q1. ज्ञान भारतम मिशन क्या है?
यह केंद्र सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य प्राचीन पांडुलिपियों और दस्तावेजों का संरक्षण और डिजिटलीकरण करना है।
Q2. कैथल में सर्वे कब तक पूरा होगा?
जिला प्रशासन ने 10 जून तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
Q3. किन दस्तावेजों की पहचान की जाएगी?
75 वर्ष से अधिक पुराने पांडुलिपियों और अभिलेखीय दस्तावेजों की पहचान की जाएगी।
Q4. क्या सरकार पांडुलिपियों का स्वामित्व लेगी?
नहीं, दस्तावेज उनके मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेंगे।
Q5. अब तक कितनी पांडुलिपियां अपलोड हुई हैं?
कैथल जिले से अब तक 387 पांडुलिपियां पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी हैं।
Conclusion:
ज्ञान भारतम मिशन के तहत कैथल में चल रहा राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डिजिटल संरक्षण के जरिए आने वाली पीढ़ियों तक भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

