भोगपुर FPO बना मिसाल: 700 एकड़ में पराली प्रबंधन कर प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा

CRM स्कीम 2025 के तहत किसानों ने अपनाई आधुनिक मशीनरी, बिना पराली जलाए वैज्ञानिक तरीके से किया फसल अवशेष प्रबंधन

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भोगपुर के Farmer Pure Harvest FPCL ने 700 एकड़ में पराली प्रबंधन कर टिकाऊ कृषि का उदाहरण पेश किया है। CRM स्कीम 2025 के तहत इस पहल से पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय दोनों को बढ़ावा मिला है।

भोगपुर में कृषि नवाचार की नई मिसाल

पंजाब के भोगपुर ब्लॉक में Farmer Pure Harvest FPCL (FPO) ने टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। Crop Residue Management (CRM) Scheme 2025 के तहत संगठन ने लगभग 700 एकड़ कृषि भूमि पर पराली प्रबंधन सफलतापूर्वक किया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की प्रथा को समाप्त करना और किसानों को वैज्ञानिक फसल अवशेष प्रबंधन की ओर प्रेरित करना है।

सरकारी सहायता और आधुनिक मशीनरी का उपयोग

सरकारी सब्सिडी की मदद से FPO ने आधुनिक कृषि मशीनरी का उपयोग कर फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित किया।

इस प्रक्रिया के तहत:

  • पराली जलाने की आवश्यकता समाप्त हुई
  • मशीनों के माध्यम से अवशेषों का प्रबंधन किया गया
  • किसानों को जागरूक कर पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया

पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता में सुधार

इस पहल से न केवल वायु प्रदूषण में कमी आई है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी संरक्षित करने में मदद मिली है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पराली प्रबंधन से खेतों की गुणवत्ता बेहतर होती है और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता में सुधार होता है।

CEO रामदीप कौर के नेतृत्व में सफल कार्यान्वयन

यह पूरा प्रोजेक्ट मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रामदीप कौर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक लागू किया गया।

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, सदस्य किसानों और स्टाफ ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल ने संगठन की कार्यक्षमता और किसान भागीदारी को मजबूत किया है।

किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार

FPO के अनुसार, इस योजना ने किसानों को न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरित किया है, बल्कि संगठन की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है।

CRM स्कीम के प्रभावी क्रियान्वयन से:

  • किसानों को अतिरिक्त सेवाओं का लाभ मिला
  • संगठन की आय में वृद्धि हुई
  • ग्रामीण स्तर पर कृषि मॉडल मजबूत हुआ

Key Highlights:

  • भोगपुर FPO ने 700 एकड़ में किया पराली प्रबंधन
  • CRM स्कीम 2025 के तहत सफल पहल
  • आधुनिक मशीनरी से वैज्ञानिक फसल अवशेष प्रबंधन
  • प्रदूषण में कमी और मिट्टी की उर्वरता में सुधार
  • CEO रामदीप कौर के नेतृत्व में सफल कार्यान्वयन

FAQ Section:

Q1. यह पहल कहां की है?

यह पहल पंजाब के भोगपुर ब्लॉक की है।

Q2. कितने क्षेत्र में पराली प्रबंधन किया गया?

लगभग 700 एकड़ कृषि भूमि में।

Q3. कौन सी योजना के तहत यह काम हुआ?

Crop Residue Management (CRM) Scheme 2025 के तहत।

Q4. इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

पराली जलाने को रोकना और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना।

Q5. इस परियोजना का लाभ क्या हुआ?

प्रदूषण में कमी, मिट्टी की उर्वरता में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि।


Conclusion:

भोगपुर FPO की यह पहल टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है। पराली प्रबंधन के इस मॉडल ने यह साबित किया है कि सही तकनीक और जागरूकता के साथ किसान पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूत कर सकते हैं।Screenshot_1712

Edited By: Karan Singh

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