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हरियाणा सरकार को ₹434 करोड़ का नुकसान? ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ लीज मामले में लोकायुक्त की रिपोर्ट से मचा हड़कंप
गुरुग्राम की 5.66 एकड़ जमीन से जुड़े मामले में लोकायुक्त ने अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल, CBI जांच की सिफारिश
गुरुग्राम के ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ से जुड़े लीज मामले में हरियाणा लोकायुक्त ने ₹434.02 करोड़ के नुकसान का उल्लेख किया है। रिपोर्ट में कई अधिकारियों की भूमिका और बकाया वसूली में कथित लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
हरियाणा के गुरुग्राम स्थित चर्चित मनोरंजन केंद्र ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ से जुड़ा जमीन लीज मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हरियाणा लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरि पाल वर्मा (सेवानिवृत्त) की रिपोर्ट में राज्य सरकार को ₹434.02 करोड़ के नुकसान का उल्लेख किया गया है।
The Tribune की रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त ने मामले में कुछ अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर टिप्पणियां की हैं और कथित अनियमितताओं की जांच CBI को सौंपने की जरूरत बताई है। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और कंपनी से राशि की वसूली की सिफारिश की है।
5.66 एकड़ जमीन से शुरू हुआ पूरा मामला
मामला वर्ष 2007 का है, जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने गुरुग्राम के सेक्टर-29 में अपनी करीब 5.66 एकड़ जमीन को लीज पर देने के लिए टेंडर जारी किया था।Great Indian Nautanki Company (GINC) ने यह बोली हासिल की और जमीन को 15 साल के लिए करीब ₹36 लाख प्रति माह के किराये पर लीज पर लिया। इसी जमीन पर ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ विकसित किया गया था।
किराये का भुगतान नहीं होने से बढ़ता गया बकाया
लोकायुक्त की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी की ओर से किराये के भुगतान में शुरुआती दौर से ही डिफॉल्ट शुरू हो गया था। हालांकि पहली डिफॉल्ट नोटिस जून 2011 में जारी की गई।
जून 2022 तक किराया और ब्याज मिलाकर बकाया राशि ₹107.15 करोड़ तक पहुंच गई थी। इसके बाद रिकवरी नोटिस जारी किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने कथित तौर पर 1.34 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर कब्जा कर रखा था। इसके लिए कंपनी को ₹114.15 करोड़ की मांग का नोटिस दिया गया। बाद में जुलाई 2022 में लीज समाप्त कर दी गई और ₹100 करोड़ की पेनल्टी भी लगाई गई।
अधिकारियों की भूमिका पर लोकायुक्त ने उठाए सवाल
लोकायुक्त की रिपोर्ट में HSVP गुरुग्राम में अलग-अलग समय पर Estate Officer रहे हरियाणा सिविल सर्विस के अधिकारियों मुकेश सोलंकी, मुकुल कुमार, मनोज खत्री और नरेंद्र यादव को मामले के लिए पूरी तरह जिम्मेदार बताया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कंपनी की बैंक गारंटी वर्ष 2011 में समाप्त होने के बाद उसे समय पर नवीनीकृत नहीं कराया गया।
इसके अलावा IAS अधिकारियों नितिन यादव, प्रवीण कुमार और पीसी मीणा पर अपने-अपने कार्यकाल में HUDA/HSVP के प्रशासक रहते हुए पर्याप्त निगरानी नहीं रखने का आरोप लगाया गया है।
विजिलेंस रिपोर्ट को लेकर भी सवाल
लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि HSVP अधिकारियों के साथ-साथ तत्कालीन मुख्य सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट को कमजोर करने और आरोपित अधिकारियों को राहत देने के लिए कथित तौर पर कनिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई गई थी।
2015 में ही सामने आ गई थीं अनियमितताएं?
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य विजिलेंस ब्यूरो ने वर्ष 2015 में ही कंपनी से जुड़ी अनियमितताओं का संज्ञान लिया था। यह कार्रवाई तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से भेजे गए एक नोट के आधार पर शुरू हुई थी।
विजिलेंस प्रमुख प्रभात रंजन देव ने 2017 में तत्कालीन मुख्य सचिव डीएस ढेसी को रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें तत्कालीन HSVP समिति पर GINC को कथित तौर पर “अनुचित लाभ” देने का आरोप लगाया गया था।
टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल
लोकायुक्त की रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि परियोजना की शुरुआत के पीछे वास्तविक मांग या जरूरत क्या थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि टेंडर की कुछ शर्तें कथित तौर पर कंपनी के अनुकूल थीं और विदेशी कंपनियों को आवेदन से बाहर रखा गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 2016 के बीच किराये की वसूली के लिए नौ नोटिस जारी हुए, लेकिन लीज रद्द करने की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
एक दिन में 7-8 बार बदले लीज अधिकार
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु लीज अधिकारों को गिरवी रखने से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, GINC को 23 मार्च 2009 को ₹40 करोड़ के बैंक लोन के लिए लीजहोल्ड अधिकारों को मॉर्गेज करने की NOC और अनुमति दी गई थी।
लोकायुक्त के अनुसार, इसके बाद ये अधिकार एक ही दिन में 7 से 8 बार हाथ बदले, जबकि मूल समझौते में इस तरह के हस्तांतरण की कोई शर्त नहीं थी।
₹3.92 करोड़ का चेक भी हुआ था बाउंस
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2014 में कंपनी ने HSVP को करीब ₹3.92 करोड़ का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया।
HSVP ने चेक बाउंस का मामला दर्ज किया, लेकिन बाद में मामला लोक अदालत में पहुंचा और समझौता हो गया। लोकायुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, न तो राशि का भुगतान हुआ और न ही HSVP ने शिकायत को दोबारा आगे बढ़ाया।
Lokayukta ने CM से की ये सिफारिशें
लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरि पाल वर्मा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को कई सिफारिशें भेजी हैं।
मुख्य सिफारिशों में शामिल हैं:
- कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
- Great Indian Nautanki Company से ₹434.02 करोड़ की वसूली की जाए।
- मामले को CBI को सौंपने पर विचार किया जाए।
- अधिकारियों की भूमिका और बकाया राशि की वसूली में हुई कथित लापरवाही की जांच हो।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने The Tribune से कहा कि लोकायुक्त ने आदेश पारित किया है और सरकार उसका सम्मान करती है।
‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ अब भी बंद
गुरुग्राम का ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ जुलाई 2022 में करीब ₹100 करोड़ के बकाये के कारण सील कर दिया गया था। HSVP ने लंबे समय से किराया नहीं मिलने के बाद कार्रवाई की थी।
लोकायुक्त की ताजा रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हरियाणा सरकार की वेबसाइट पर यह स्थान अभी भी पर्यटन स्थल के रूप में सूचीबद्ध है, जबकि परिसर 2022 से बंद है।
Key Highlights:
- गुरुग्राम के ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ लीज मामले में ₹434.02 करोड़ के नुकसान का उल्लेख।
- जमीन HSVP की 5.66 एकड़ संपत्ति थी।
- GINC ने 15 साल के लिए जमीन लीज पर ली थी।
- मासिक किराया करीब ₹36 लाख तय किया गया था।
- जून 2022 तक किराया और ब्याज का बकाया ₹107.15 करोड़ बताया गया।
- 1.34 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर कथित कब्जे का भी मामला सामने आया।
- लोकायुक्त ने कई HSVP अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
- मामले को CBI को सौंपने की जरूरत बताई गई।
- मुख्यमंत्री से कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और ₹434.02 करोड़ की वसूली की सिफारिश की गई।
- मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि सरकार लोकायुक्त के आदेश का सम्मान करती है।
FAQ Section:
Q1. ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ मामला क्या है?
Answer: यह गुरुग्राम के सेक्टर-29 में HSVP की जमीन को Great Indian Nautanki Company को लीज पर देने और उससे जुड़े किराये, जमीन के कथित अतिरिक्त कब्जे तथा प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित मामला है।
Q2. लोकायुक्त की रिपोर्ट में कितने रुपये के नुकसान का उल्लेख है?
Answer: रिपोर्ट में हरियाणा सरकार को ₹434.02 करोड़ के नुकसान का उल्लेख किया गया है।
Q3. जमीन कितने क्षेत्र में थी?
Answer: HSVP की करीब 5.66 एकड़ जमीन को लीज पर दिया गया था। जांच में अतिरिक्त 1.34 एकड़ जमीन पर कथित कब्जे का भी उल्लेख किया गया है।
Q4. लोकायुक्त ने मामले में क्या सिफारिश की है?
Answer: लोकायुक्त ने कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने, कंपनी से ₹434.02 करोड़ की वसूली करने और मामले को CBI को सौंपने की सिफारिश की है।
Q5. ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ कब सील हुआ था?
Answer: HSVP ने जुलाई 2022 में बकाया भुगतान नहीं होने के कारण परिसर को सील किया था। उस समय बकाया करीब ₹100 करोड़ बताया गया था।
Conclusion:
गुरुग्राम के ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ से जुड़े लीज विवाद में हरियाणा लोकायुक्त की रिपोर्ट ने सरकारी जमीन, बकाया किराये, कथित अतिक्रमण और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में ₹434.02 करोड़ की राशि की वसूली और कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और जांच किस एजेंसी को सौंपी जाती है, यह अब महत्वपूर्ण विषय रहेगा।
