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GNDU में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी शाम, प्रो. शुभेंदु घोष ने रागों से बांधा समां
हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक प्रो. शुभेंदु घोष ने अहिर भैरव, तोड़ी, हंसध्वनि, यमन और किरवानी की प्रस्तुति से विद्यार्थियों को भारतीय संगीत परंपरा से रूबरू कराया
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आयोजित संगीतमय शाम में हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक प्रो. शुभेंदु घोष ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को सुरों से भर दिया। रामपुर घराने से जुड़े प्रो. घोष ने विभिन्न रागों, बंदिशों और तरानों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और विविधता को समझाया।
कैंपस की भागदौड़ के बीच संगीत ने बांधा समां
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) में कैंपस की व्यस्त दिनचर्या के बीच विद्यार्थियों को एक यादगार संगीतमय शाम का अनुभव मिला। हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक प्रो. शुभेंदु घोष की प्रस्तुति शुरू होते ही सभागार का माहौल धीरे-धीरे सुरों और संगीत की गहराई में डूब गया।
प्रो. घोष ने अपनी प्रस्तुति के दौरान भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न परंपराओं और रागों की बारीकियों से विद्यार्थियों को परिचित कराया।विज्ञान से संगीत तक का अनूठा सफर
प्रो. शुभेंदु घोष की पहचान केवल एक शास्त्रीय गायक के रूप में नहीं है। वह पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में बायोफिजिक्स पढ़ा चुके हैं। विज्ञान के क्षेत्र में अकादमिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को भी अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
वह रामपुर घराने से जुड़े हैं और रमेश नाडकर्णी के शिष्य रहे हैं। नाडकर्णी स्वयं पद्मश्री उस्ताद हाफिज अहमद खान और भिंडी बाजार घराने के अमन अली से जुड़े रहे हैं।
प्रो. घोष लोक संगीत और गजल गायन में भी अपनी विशेष रुचि और दक्षता रखते हैं।
भारतीय संगीत परंपरा को बताया सांस्कृतिक यात्रा
विद्यार्थियों से संवाद के दौरान प्रो. घोष ने संगीत को भारत की सांस्कृतिक और धर्मनिरपेक्ष काव्य परंपरा से जोड़ते हुए इसके लंबे इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने अमीर खुसरो, कबीर, तानसेन, बुल्ले शाह, लालन फकीर, रवींद्रनाथ टैगोर और फैज जैसे प्रमुख रचनाकारों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानी राग और पारंपरिक लोक संगीत भारत के संगीत इतिहास की आत्मा हैं। संगीत सीखने के लिए रचनात्मकता के साथ-साथ सटीकता, अनुशासन और जिज्ञासा भी जरूरी है।
रामपुर और भिंडी बाजार घरानों की विशेषताओं पर चर्चा
प्रो. घोष ने विद्यार्थियों को रामपुर और भिंडी बाजार घरानों की विशिष्ट संगीत परंपराओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि अलग-अलग घरानों की अपनी गायकी, प्रस्तुति शैली और संगीत की व्याख्या करने की विशिष्ट परंपरा होती है।
इसके बाद उन्होंने कई प्रसिद्ध रागों की प्रस्तुति दी, जिनमें अहिर भैरव, तोड़ी, हंसध्वनि, यमन और किरवानी शामिल रहे।
बंदिश और तराने से समझाई रागों की खूबसूरती
प्रस्तुति के दौरान प्रत्येक राग ने अलग भाव और वातावरण पैदा किया। बंदिशों और तरानों के माध्यम से प्रो. घोष ने यह दिखाया कि राग केवल स्वरों का निश्चित क्रम नहीं है, बल्कि कलाकार की आवाज, कल्पना और तात्कालिक सृजनात्मकता से उसमें एक अलग व्यक्तित्व विकसित होता है।
उनकी प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गहराई को करीब से समझने का अवसर दिया।
संगत कलाकारों ने भी निभाई अहम भूमिका
प्रस्तुति में विभाग के हरसिमरन सिंह ने हारमोनियम पर संगत की। गनवीर सिंह ने तबले पर लय का आधार संभाला, जबकि विभाग के विद्यार्थी योगेश शर्मा ने तानपुरे पर निरंतर स्वर का आधार बनाए रखा।
इन कलाकारों की संगत ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।
Key Highlights:
- गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में आयोजित हुई संगीतमय शाम।
- प्रो. शुभेंदु घोष ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी।
- प्रो. घोष का संबंध रामपुर घराने से है।
- वह दिल्ली विश्वविद्यालय में बायोफिजिक्स पढ़ा चुके हैं।
- लोक संगीत और गजल गायन में भी उनकी रुचि है।
- अमीर खुसरो, कबीर, तानसेन और बुल्ले शाह सहित कई सांस्कृतिक हस्तियों का उल्लेख किया।
- अहिर भैरव, तोड़ी, हंसध्वनि, यमन और किरवानी जैसे राग प्रस्तुत किए गए।
- हरसिमरन सिंह ने हारमोनियम, गनवीर सिंह ने तबला और योगेश शर्मा ने तानपुरे पर संगत की।
FAQ Section:
प्रो. शुभेंदु घोष कौन हैं?
प्रो. शुभेंदु घोष हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक हैं और रामपुर घराने से जुड़े हैं। वह अकादमिक क्षेत्र में बायोफिजिक्स भी पढ़ा चुके हैं।
GNDU में किन रागों की प्रस्तुति हुई?
कार्यक्रम में अहिर भैरव, तोड़ी, हंसध्वनि, यमन और किरवानी सहित कई राग प्रस्तुत किए गए।
प्रो. शुभेंदु घोष किन संगीत शैलियों में रुचि रखते हैं?
वह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ लोक संगीत और गजल गायन में भी रुचि रखते हैं।
कार्यक्रम में किन कलाकारों ने संगत की?
हरसिमरन सिंह ने हारमोनियम, गनवीर सिंह ने तबला और योगेश शर्मा ने तानपुरे पर संगत की।
Conclusion:
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में आयोजित यह संगीतमय शाम विद्यार्थियों के लिए भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को करीब से समझने का अवसर बनी। प्रो. शुभेंदु घोष ने अपनी प्रस्तुति और संवाद के माध्यम से राग, घराना, परंपरा और रचनात्मकता के बीच संबंध को सहज तरीके से सामने रखा।
