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अमृतसर में 100 से ज्यादा किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, रासायनिक इनपुट पर निर्भरता घटाने पर जोर
मार्गिंदपुरा के नुहार फार्म में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खाद, माइक्रोबियल इनोकुलेंट और पौधों से तैयार घोल बनाने की दी गई जानकारी
अमृतसर के मार्गिंदपुरा स्थित नुहार फार्म में सरबत दा भला प्रोजेक्ट के तहत प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 100 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों को प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक तरीकों और खेत में प्राकृतिक इनपुट तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।
100 से ज्यादा किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण
मार्गिंदपुरा स्थित नुहार फार्म में सरबत दा भला प्रोजेक्ट के तहत पंजाब एग्रो के सहयोग से प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 100 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया और प्राकृतिक खेती से जुड़े व्यावहारिक तरीकों की जानकारी हासिल की।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को रासायनिक कृषि इनपुट पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक विकल्पों को खेती की नियमित प्रक्रिया में शामिल करने के लिए प्रशिक्षित करना था।प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा सरबत दा भला प्रोजेक्ट
सरबत दा भला प्रोजेक्ट को कोएक्सिस्टेंस कंसोर्टियम और टीडीयू, बेंगलुरु का सहयोग प्राप्त है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो प्राकृतिक खेती, स्वस्थ खाद्य प्रणालियों और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम करती है।
प्रोजेक्ट के माध्यम से प्राकृतिक खेती को घरेलू स्तर से आगे बढ़ाकर खेतों और संगठित व्यावसायिक उत्पादन तक ले जाने पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों को प्राकृतिक खाद और जैविक विकल्पों की जानकारी
कार्यक्रम के मुख्य रिसोर्स पर्सन अरविंद सिंह धूत ने किसानों को रासायनिक इनपुट की निर्भरता कम करने के व्यावहारिक तरीकों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खाद, माइक्रोबियल इनोकुलेंट और पौधों से तैयार किए जाने वाले विभिन्न घोल बनाने और इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में बताया। इन प्राकृतिक इनपुट का उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता, फसल पोषण और पौधों की सुरक्षा में मदद करना है।
खेत में कराया गया प्राकृतिक इनपुट तैयार करने का डेमो
प्रशिक्षण के दौरान किसानों के लिए व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। इसमें प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले इनपुट तैयार करने की प्रक्रिया को मौके पर करके दिखाया गया।
किसानों को इस तरह प्रशिक्षित किया गया कि वे इन तरीकों को अपने खेतों पर स्वयं दोहरा सकें और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को व्यावहारिक रूप से अपना सकें।
किचन गार्डन से खेतों तक प्राकृतिक खेती का विस्तार
सरबत दा भला प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे वरिंदर पाल सिंह ने बताया कि पहल के तहत प्राकृतिक खेती को घरेलू स्तर पर खाद्य उत्पादन से आगे बढ़ाकर मुख्य फसलों और संगठित व्यावसायिक उत्पादन तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि करीब 100 किसानों ने किचन गार्डन के जरिए प्राकृतिक खेती शुरू की है। इससे परिवार अपने इस्तेमाल के लिए प्राकृतिक तरीके से उगाई गई सब्जियां तैयार कर रहे हैं।
22 किसान मुख्य फसलों में अपना रहे प्राकृतिक खेती
वरिंदर पाल सिंह के अनुसार, 22 किसान अपनी मुख्य फसलों में प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपना रहे हैं। वहीं, एक किसान ने मल्टी-क्रॉपिंग मॉडल भी शुरू किया है।
इस मॉडल के जरिए प्राकृतिक खेती में फसल विविधता की संभावनाओं को प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है।
व्यावसायिक स्तर पर संगठित होने पर जोर
वरिंदर पाल सिंह ने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को समूहों में संगठित होने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को धीरे-धीरे योजनाबद्ध उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ते हुए व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन की ओर बढ़ना चाहिए।
उन्होंने स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने को इस पहल का बड़ा उद्देश्य बताया, ताकि परिवारों को अपने आसपास के किसानों से विविध, पौष्टिक और प्राकृतिक तरीके से उत्पादित भोजन उपलब्ध हो सके।
Key Highlights:
- मार्गिंदपुरा के नुहार फार्म में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
- 100 से अधिक किसानों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
- पंजाब एग्रो के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- किसानों को प्राकृतिक खाद और माइक्रोबियल इनपुट तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।
- पौधों से तैयार प्राकृतिक घोल के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
- करीब 100 किसान किचन गार्डन के जरिए प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
- 22 किसान मुख्य फसलों में प्राकृतिक खेती के तरीके अपना रहे हैं।
- एक किसान ने मल्टी-क्रॉपिंग मॉडल शुरू किया है।
- किसानों को समूह बनाकर व्यावसायिक स्तर पर प्राकृतिक खेती बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
FAQ Section:
प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम कहां आयोजित हुआ?
प्रशिक्षण कार्यक्रम मार्गिंदपुरा स्थित नुहार फार्म में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कितने किसानों ने हिस्सा लिया?
कार्यक्रम में 100 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया।
किसानों को किस तरह का प्रशिक्षण दिया गया?
किसानों को प्राकृतिक खाद, माइक्रोबियल इनोकुलेंट और पौधों से तैयार घोल बनाने तथा उनके इस्तेमाल के व्यावहारिक तरीके बताए गए।
कितने किसान मुख्य फसलों में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं?
कार्यक्रम में दी गई जानकारी के अनुसार, 22 किसान अपनी मुख्य फसलों में प्राकृतिक खेती के तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती परियोजना का बड़ा उद्देश्य क्या है?
परियोजना का उद्देश्य प्राकृतिक खेती को घरेलू खाद्य उत्पादन से आगे बढ़ाकर खेतों और संगठित व्यावसायिक उत्पादन तक ले जाना तथा स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूत करना है।
Conclusion:
मार्गिंदपुरा में आयोजित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए किसानों को खेती में प्राकृतिक विकल्पों के इस्तेमाल की व्यावहारिक जानकारी दी गई। सरबत दा भला प्रोजेक्ट के तहत किचन गार्डन से लेकर मुख्य फसलों और मल्टी-क्रॉपिंग मॉडल तक प्राकृतिक खेती के विस्तार पर काम किया जा रहा है। आयोजकों ने किसानों को समूहों में संगठित होकर योजनाबद्ध और व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया।
