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National Medical Commission की नई अनाम फीडबैक प्रणाली चर्चा में
MBBS छात्रों को शिकायत दर्ज करने की सुविधा, लेकिन प्रभावशीलता पर उठे सवाल
नेशनल मेडिकल कमीशन की नई अनाम फीडबैक व्यवस्था को मेडिकल शिक्षा में सुधार की दिशा में कदम माना जा रहा है, हालांकि इसकी प्रभावशीलता पर सवाल भी उठ रहे हैं।
National Medical Commission (NMC) की हालिया पहल, जिसमें MBBS छात्रों के लिए एक अनाम फीडबैक प्रणाली शुरू की गई है, मेडिकल शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गई है। इस प्रणाली के तहत छात्र शिक्षण गुणवत्ता, फैकल्टी की कमी, क्लिनिकल प्रशिक्षण, मरीजों के संपर्क, लैब सुविधाएं, रैगिंग, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कैंपस सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को सीधे रिपोर्ट कर सकते हैं।
इस पहल की खास बात यह है कि NMC ने स्पष्ट किया है कि छात्रों द्वारा दी गई सभी प्रतिक्रियाएं पूरी तरह गोपनीय और अनाम रखी जाएंगी। यह फीडबैक केवल आंतरिक शैक्षणिक मूल्यांकन और गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से उपयोग किया जाएगा।
रोहतक के PGIMS Rohtak के 2020 बैच के एक MBBS स्नातक (गोपनीयता की शर्त पर) ने बताया कि पहले भी शिकायत दर्ज करने के लिए एक पोर्टल मौजूद था, लेकिन वह अकादमिक गुणवत्ता सुधारने और समस्याओं के समाधान में प्रभावी नहीं रहा।
कई MBBS स्नातक संगठनों ने मेडिकल कॉलेजों में नियमों के उल्लंघन, खासकर रेजिडेंट डॉक्टरों के कार्य घंटों को लेकर बार-बार मुद्दे उठाए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि NMC वास्तव में सुधार चाहता है, तो उसे सख्त और निर्णायक कदम उठाने होंगे।
एक निजी कॉलेज के छात्र ने कहा कि फीडबैक प्रणाली शुरू करना सराहनीय है, लेकिन असली चुनौती उन कॉलेजों में गुणवत्ता सुधारना है, जहां डॉक्टर और सुविधाएं केवल कागजों पर मौजूद हैं।
छात्र ने सुझाव दिया कि NMC को राज्य या क्षेत्र स्तर पर निरीक्षण निकाय बनाने चाहिए, जो नियमित रूप से कॉलेजों का दौरा कर सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की वास्तविक स्थिति का आकलन करें और छात्रों से सीधे बातचीत करें। साथ ही, इन निकायों के सदस्यों का समय-समय पर रोटेशन होना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार और हेरफेर की संभावना कम हो।
रोहतक के स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और Jan Swasthya Abhiyan के सह-संयोजक Ranbir Singh Dahiya ने इस पहल का स्वागत किया, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव को लेकर संदेह भी जताया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी कई मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी ढांचे, सुविधाओं और फैकल्टी की कमी के कारण शिक्षा का स्तर कमजोर है। कई बार छात्रों द्वारा शिकायत करने पर भी उचित कार्रवाई नहीं होती और कुछ मामलों में शिकायत करने वालों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की गोपनीयता सुनिश्चित करना सराहनीय कदम है, लेकिन NMC को पहले से सामने आए गंभीर मुद्दों पर भी ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है ताकि अनुचित तरीकों से कोर्स पूरा करने की प्रवृत्ति को रोका जा सके।
उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि यह देखना बाकी है कि यह नई प्रणाली मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार ला पाएगी या यह भी पहले की पहलों की तरह सीमित प्रभाव तक ही सिमट कर रह जाएगी।
Democratic Medical Association (DMA) ने भी इस नई व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
