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IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही का इस्तीफा, बिना काम दिए रखने का आरोप
Rinku Singh Rahi बोले—“बिना काम वेतन लेना भी भ्रष्टाचार का एक रूप”
IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने लंबे समय तक कोई जिम्मेदारी न मिलने का आरोप लगाते हुए नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया।
2022 बैच के IAS अधिकारी Rinku Singh Rahi ने मंगलवार को यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि उन्हें लंबे समय से कोई पदस्थापन या सार्थक जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें “अटैच” स्थिति में रखा गया, जहां वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनता की सेवा करने का अवसर नहीं दिया गया।
अपने इस्तीफे को नैतिक निर्णय बताते हुए राही ने कहा कि सिस्टम में ईमानदार लोगों के लिए एक तरह की सजा होती है—उन्हें वेतन तो दिया जाता है, लेकिन काम नहीं दिया जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना काम किए वेतन लेना कैसे ईमानदारी के मूल्यों के अनुरूप हो सकता है। उनके अनुसार, यह भी भ्रष्टाचार का एक रूप है।
पिछले साल जुलाई में, एक वीडियो वायरल होने के बाद राही को उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड, लखनऊ में अटैच कर दिया गया था। इस वीडियो में वे शाहजहांपुर में वकीलों के विरोध के बीच कान पकड़कर उठक-बैठक करते नजर आए थे।
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने जिला मजिस्ट्रेट से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट मिलने के बाद राही को SDM पद से हटा दिया गया और लखनऊ में अटैच कर दिया गया।
Rinku Singh Rahi को 28 जुलाई 2025 को शाहजहांपुर के पुवायां में उप-जिलाधिकारी (SDM) नियुक्त किया गया था, लेकिन वे महज 36 घंटे के भीतर ही इस पद से हटा दिए गए।
घटना के अनुसार, पदभार संभालने के बाद निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक वकील के मुंशी को दीवार के पास पेशाब करते देखा। इसके बाद उन्होंने उसे मौके पर उठक-बैठक करने को कहा, जिससे वकीलों में नाराजगी फैल गई।
विवाद बढ़ने पर राही ने खुद भी कान पकड़कर पांच उठक-बैठक की, जिसे कुछ लोगों ने नेतृत्व और विनम्रता का उदाहरण माना, जबकि सोशल मीडिया पर इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई।
IAS बनने से पहले, राही ने 2004 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर PCS अधिकारी के रूप में सेवा दी थी। 2008 में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं में भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। मार्च 2009 में उन पर हमला भी हुआ था, जिसमें वे बच गए थे।

