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कौशांबी के बंसकटी गांव में महिलाओं का ‘D-39’ गैंग, मजबूरी से अपराध की राह
गरीबी, हिंसा और हालातों ने महिलाओं को बनाया संगठित अपराध सिंडिकेट का हिस्सा
कौशांबी के एक गांव में महिलाएं मजबूरी में अपराध की दुनिया में उतरकर ‘D-39’ नामक गैंग चला रही हैं।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर स्थित बंसकटी गांव बाहर से सामान्य दिखता है, लेकिन इसके भीतर एक चौंकाने वाली सच्चाई छिपी हुई है।
गांव के डेरा पार मोहल्ला में एक नई प्रवृत्ति सामने आई है, जो पहले से ही राज्य में सबसे अधिक पुरुष हिस्ट्रीशीटर (28) देने के लिए कुख्यात रहा है, जिनमें से 23 अभी जीवित हैं।
वर्षों की गरीबी, उपेक्षा और अभाव के बीच, कई महिलाएं अब ‘D-39’ नामक एक संगठित महिला अपराध गिरोह का हिस्सा बन चुकी हैं, जिसे उत्तर प्रदेश का पहला ऑल-वुमन क्राइम सिंडिकेट बताया जा रहा है।
ये महिलाएं, जिनकी उम्र 25 से 40 वर्ष के बीच है, पारंपरिक घूंघट में और अक्सर बच्चों को साथ लेकर खुद को असहाय दिखाती हैं। वे मेलों, शादियों और धार्मिक आयोजनों जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों को निशाना बनाकर चोरी और चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देती हैं।
करारी थाने के अधिकारी Siyakant Chaurasia के अनुसार, ये महिलाएं सर्जिकल ब्लेड, देसी पिस्तौल और नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करती हैं। वे भीड़ में नकली झगड़ा कर ध्यान भटकाती हैं और फिर चेन, पर्स और मोबाइल चुरा लेती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस गिरोह का गठन तब हुआ जब इन महिलाओं के पति—जो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले थे—या तो जेल में बंद हो गए, मारे गए या फरार हो गए।
अशिक्षा, बाल विवाह और घरेलू हिंसा से जूझ रही इन महिलाओं ने जीविका के लिए घर से बाहर कदम रखा, जहां उन्हें जल्दी पैसे कमाने का रास्ता मिला और धीरे-धीरे वे अपराध की दुनिया में शामिल हो गईं।
यह कहानी न केवल अपराध की, बल्कि उन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों की भी है, जो लोगों को ऐसे रास्ते पर जाने के लिए मजबूर कर देती हैं।
