Hisar Airport को Aviation-Cargo Hub बनाने की योजना, US एजेंसी की तकनीकी मदद का काम अब तक अटका

हरियाणा सरकार ने हिसार एयरपोर्ट के विकास पर करोड़ों रुपये किए खर्च, USTDA से 10.53 करोड़ रुपये की तकनीकी सहायता के बावजूद फर्म का चयन बाकी

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हरियाणा सरकार महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हिसार को आधुनिक एविएशन और कार्गो हब के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए USTDA के साथ MoU हुआ था, लेकिन तकनीकी सहायता देने वाली फर्म का चयन अभी तक नहीं हो पाया है।

 

हरियाणा सरकार हिसार स्थित महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस कर एक बड़े एविएशन और कार्गो हब के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। राज्य सरकार ने एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं और हिसार से दिल्ली, अयोध्या, अहमदाबाद, जम्मू और जयपुर के लिए हवाई सेवाएं भी शुरू की हैं।

अब सरकार की योजना एयरपोर्ट को एक इंटीग्रेटेड एविएशन एवं कार्गो हब में बदलने की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए हरियाणा एयरपोर्ट्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HADC) ने यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी (USTDA) के साथ समझौता किया था। हालांकि, परियोजना के लिए तकनीकी सहायता देने वाली फर्म का चयन अभी तक नहीं हुआ है।

USTDA के साथ क्या हुआ समझौता?

USTDA की 10 दिसंबर 2024 की प्रेस रिलीज के अनुसार, एजेंसी ने HADC को तकनीकी सहायता देने के लिए करीब 1.25 मिलियन डॉलर यानी लगभग 10.53 करोड़ रुपये का अनुदान दिया था।

इस सहायता का उद्देश्य महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हिसार के व्यापक पुनर्विकास में मदद करना था। प्रस्तावित परियोजना में एयरपोर्ट को कार्गो और लॉजिस्टिक्स पर केंद्रित इंटीग्रेटेड एविएशन हब के रूप में विकसित करने की योजना शामिल है।

परियोजना से हिसार एयरपोर्ट की एयर कार्गो क्षमता बढ़ाने, स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने और अमेरिकी कंपनियों के लिए आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।

एयरपोर्ट पर किन सुविधाओं की योजना?

हिसार एयरपोर्ट के प्रस्तावित विकास में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शामिल किया गया है।

प्रमुख प्रस्तावित सुविधाएं

  • इंटीग्रेटेड एविएशन हब
  • एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब
  • मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर
  • UPS Worldport कार्गो लॉजिस्टिक्स हब
  • मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा
  • एंटरटेनमेंट विलेज
  • एयरपोर्ट संचालन को अधिक व्यवस्थित और एकीकृत करना

सरकार का उद्देश्य एयरपोर्ट को केवल यात्री सेवाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग, कार्गो और लॉजिस्टिक्स से जोड़ना है।

कब हुआ था MoU?

हरियाणा एयरपोर्ट्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और USTDA के बीच MoU 10 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में हुआ था।

समझौते के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी मौजूद थे।

उस समय इस समझौते को हरियाणा और अमेरिका के बीच सिविल एविएशन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया था।

परियोजना की समयसीमा क्या थी?

समझौते के तहत परियोजना को पूरा करने के लिए दो साल की समयसीमा तय की गई थी।

USTDA की भूमिका में निवेश आकर्षित करने, एयरपोर्ट से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को एकीकृत करने और अलग-अलग प्रोजेक्ट्स को विकास एवं क्रियान्वयन के लिए तैयार करने में सहायता शामिल थी।

इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के इस्तेमाल और Worldport कार्गो एवं लॉजिस्टिक्स परियोजना की व्यवहार्यता का अध्ययन भी प्रस्तावित था।

तकनीकी सहायता देने वाली फर्म का चयन अभी बाकी

परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए USTDA ने इच्छुक अमेरिकी कंपनियों से तकनीकी सहायता संबंधी प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। इसके बावजूद अब तक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने वाली फर्म का चयन नहीं हो पाया है।

यही वजह है कि हिसार एयरपोर्ट को इंटीग्रेटेड एविएशन और कार्गो हब में बदलने की महत्वाकांक्षी योजना के अगले चरण में देरी बनी हुई है।

Key Highlights:

  • महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हिसार को एविएशन और कार्गो हब बनाने की योजना।
  • हिसार से दिल्ली, अयोध्या, अहमदाबाद, जम्मू और जयपुर के लिए हवाई सेवाएं शुरू की गई हैं।
  • HADC और USTDA के बीच 10 दिसंबर 2024 को MoU हुआ था।
  • USTDA ने करीब 1.25 मिलियन डॉलर यानी 10.53 करोड़ रुपये की तकनीकी सहायता का अनुदान दिया।
  • एयरपोर्ट पर कार्गो, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और MRO सुविधाओं की योजना है।
  • प्रस्तावित परियोजना के लिए दो साल की समयसीमा तय की गई थी।
  • तकनीकी सहायता देने वाली फर्म का चयन अभी तक नहीं हुआ है।
  • परियोजना में PPP मॉडल और Worldport कार्गो हब की व्यवहार्यता पर भी काम प्रस्तावित है।

FAQ Section:

Q: हिसार एयरपोर्ट का नाम क्या है?
A: हिसार एयरपोर्ट का आधिकारिक नाम महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट है।

Q: हिसार एयरपोर्ट को किस रूप में विकसित करने की योजना है?
A: इसे इंटीग्रेटेड एविएशन और कार्गो-लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना है।

Q: USTDA ने हिसार एयरपोर्ट परियोजना के लिए कितनी सहायता दी?
A: USTDA ने करीब 1.25 मिलियन डॉलर यानी लगभग 10.53 करोड़ रुपये का तकनीकी सहायता अनुदान दिया था।

Q: HADC और USTDA के बीच MoU कब हुआ था?
A: दोनों के बीच MoU 10 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में हुआ था।

Q: हिसार एयरपोर्ट परियोजना में कौन-कौन सी सुविधाएं प्रस्तावित हैं?
A: परियोजना में कार्गो लॉजिस्टिक्स हब, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, UPS Worldport, MRO सुविधा और एंटरटेनमेंट विलेज जैसी योजनाएं शामिल हैं।

Q: परियोजना को पूरा करने की समयसीमा कितनी थी?
A: समझौते के तहत परियोजना के लिए दो साल की समयसीमा निर्धारित की गई थी।

Conclusion:

हिसार एयरपोर्ट को एक आधुनिक एविएशन और कार्गो हब में बदलने की हरियाणा सरकार की योजना राज्य के एविएशन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार ने इस दिशा में हवाई सेवाओं के विस्तार के साथ USTDA से तकनीकी सहायता भी हासिल की है। हालांकि, तकनीकी सहायता देने वाली फर्म का चयन लंबित रहने से परियोजना के अगले चरण की प्रगति प्रभावित हो रही है।Screenshot_1468

Edited By: Atul Sharma

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