इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम, छात्रों से भाषा और साहित्य के प्रति सम्मान बढ़ाने की अपील

पूर्व कुलपति राधेश्याम शर्मा ने हिंदी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर डाला प्रकाश, बोले- वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा भाषा का प्रभाव

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इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व, साहित्यिक परंपराओं और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की गई।

 

हिंदी भाषा के महत्व और उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपराओं को उजागर करने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि, सम्मान और समझ विकसित करना रहा।

कार्यक्रम में चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पूर्व कुलपति राधेश्याम शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व के बारे में जानकारी दी।

हिंदी सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं: राधेश्याम शर्मा

मुख्य अतिथि राधेश्याम शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल विचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है। यह संस्कृति, भावनाओं और विविधता को एक साझा सूत्र में जोड़ने वाली प्रभावशाली भाषा है।

उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रभाव अब भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों में हिंदी का इस्तेमाल बढ़ रहा है और विदेशों में भी लोग हिंदी सीखने तथा पढ़ने में रुचि दिखा रहे हैं।

यूरोपीय देशों में भी बढ़ रही हिंदी की लोकप्रियता

राधेश्याम शर्मा ने कहा कि यूरोपीय देशों में हिंदी को पढ़ाया और पढ़ा जा रहा है। हिंदी फिल्मों और गीतों ने भी भाषा को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने छात्रों से हिंदी साहित्य पढ़ने और उसके अध्ययन की आदत विकसित करने का आह्वान किया।

14 सितंबर 1949 को हिंदी को मिला आधिकारिक भाषा का दर्जा

कॉलेज के प्राचार्य कुशल पाल ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कई भाषाओं का ज्ञान हासिल करना चाहिए, लेकिन अपनी मातृभाषा हिंदी के प्रति विशेष सम्मान बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास और प्रचार-प्रसार में सार्थक योगदान देने के लिए भाषा के प्रति सम्मान और उसके उपयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।

विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा से परिचित कराने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने छात्रों से हिंदी पढ़ने, लिखने और दैनिक जीवन में अधिक इस्तेमाल करने की अपील की।

Key Highlights:

  • इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज के हिंदी विभाग ने हिंदी दिवस मनाया।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाना रहा।
  • चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पूर्व कुलपति राधेश्याम शर्मा मुख्य अतिथि रहे।
  • शर्मा ने हिंदी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।
  • उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की सीमाओं से बाहर भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
  • यूरोपीय देशों में हिंदी के अध्ययन और शिक्षण का भी उल्लेख किया गया।
  • हिंदी फिल्मों और गीतों को भाषा के वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण बताया गया।
  • छात्रों से हिंदी साहित्य पढ़ने और भाषा का अधिक प्रयोग करने की अपील की गई।
  • प्राचार्य कुशल पाल ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अपनाए जाने की जानकारी दी।

FAQ Section:

Q: इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज में हिंदी दिवस क्यों मनाया गया?
A: विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व, उसकी साहित्यिक परंपराओं और सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराने के उद्देश्य से हिंदी दिवस मनाया गया।

Q: हिंदी दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौन थे?
A: चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पूर्व कुलपति राधेश्याम शर्मा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।

Q: राधेश्याम शर्मा ने हिंदी के बारे में क्या कहा?
A: उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं है, बल्कि संस्कृति, भावनाओं और विविधता को जोड़ने वाला माध्यम भी है।

Q: हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में कब अपनाया गया था?
A: 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया गया था।

Q: हिंदी को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में किन चीजों की भूमिका रही है?
A: कार्यक्रम में हिंदी फिल्मों और गीतों को भाषा के वैश्विक प्रसार और लोकप्रियता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला बताया गया।

Conclusion:

इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज में आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम में भाषा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ उसके वैश्विक विस्तार पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से हिंदी के अधिक उपयोग और हिंदी साहित्य के अध्ययन की आदत विकसित करने की अपील की। कार्यक्रम का संदेश रहा कि दूसरी भाषाओं का ज्ञान हासिल करने के साथ अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और उसके विकास में योगदान भी जरूरी है।Screenshot_1469

Edited By: Atul Sharma

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