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कुरुक्षेत्र में ‘Thinking Like Charaka’ सेमिनार, BHU प्रोफेसर बोले- आयुर्वेद को समझने के लिए चरक की सोच को जानना जरूरी
श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में एक दिवसीय कार्यक्रम, छात्रों को आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं और ज्ञान प्रणाली को समझने पर दिया गया जोर
कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में ‘Thinking Like Charaka’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने छात्रों को आचार्य चरक की विचार पद्धति के जरिए आयुर्वेद को समझने की जरूरत बताई।
कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में सोमवार को आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों और आचार्य चरक की विचार पद्धति पर केंद्रित एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के क्रिया शरीर विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘Thinking Like Charaka’ रखा गया।
सेमिनार में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के क्रिया शरीर विभाग के प्रोफेसर किशोर पटवर्धन ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने आयुर्वेद को समझने के लिए आचार्य चरक की सोच और उनके ज्ञान-विचार के तरीके को समझने को महत्वपूर्ण बताया।
आयुर्वेद को समझने के लिए चरक की विचार पद्धति जरूरीप्रोफेसर किशोर पटवर्धन ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि आचार्य चरक किस तरह सोचते थे, इसे समझना आयुर्वेद को वास्तविक रूप से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी चरक की विचार पद्धति को समझना सीख लें, तो आयुर्वेद की कई अवधारणाओं और सिद्धांतों को अधिक स्पष्टता के साथ समझा जा सकता है।
आधुनिक विज्ञान से तुलना तक सीमित न रहे आयुर्वेद की समझ
पटवर्धन ने जोर देकर कहा कि आयुर्वेद को केवल आधुनिक विज्ञान के सिद्धांतों से तुलना करके समझने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, आयुर्वेद की अपनी ज्ञान प्रणाली, मूलभूत सिद्धांत और सोचने की एक विशिष्ट पद्धति है। आयुर्वेद को बेहतर ढंग से समझने के लिए इन मूल आधारों को समझना जरूरी है।
छात्रों को मूल ज्ञान प्रणाली पर ध्यान देने की सलाह
सेमिनार के दौरान विद्यार्थियों को आयुर्वेद के सिद्धांतों को उनके मूल संदर्भ और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के आधार पर समझने पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञ ने बताया कि आयुर्वेद की अवधारणाओं को केवल आधुनिक वैज्ञानिक अवधारणाओं के संदर्भ में देखने के बजाय उसकी अपनी विचार प्रक्रिया को समझने से विषय की गहरी समझ विकसित की जा सकती है।
Key Highlights:
- श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में एक दिवसीय सेमिनार आयोजित हुआ।
- कार्यक्रम का आयोजन क्रिया शरीर विभाग ने किया।
- सेमिनार का विषय ‘Thinking Like Charaka’ रहा।
- BHU के क्रिया शरीर विभाग के प्रोफेसर किशोर पटवर्धन मुख्य वक्ता रहे।
- चरक की विचार पद्धति को आयुर्वेद समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
- छात्रों को आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं और सिद्धांतों को समझने पर जोर दिया गया।
- आयुर्वेद को केवल आधुनिक विज्ञान से तुलना करके नहीं समझने की सलाह दी गई।
- आयुर्वेद की अपनी ज्ञान प्रणाली और विचार पद्धति को समझने पर विशेष जोर रहा।
FAQ Section:
Q: कुरुक्षेत्र में सेमिनार का आयोजन कहां हुआ?
A: सेमिनार श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में आयोजित किया गया।
Q: सेमिनार का विषय क्या था?
A: सेमिनार का विषय ‘Thinking Like Charaka’ था।
Q: कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कौन थे?
A: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के क्रिया शरीर विभाग के प्रोफेसर किशोर पटवर्धन ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
Q: आयुर्वेद को समझने के लिए चरक की सोच क्यों महत्वपूर्ण बताई गई?
A: प्रोफेसर पटवर्धन के अनुसार, चरक की विचार पद्धति समझने से आयुर्वेद की कई अवधारणाओं और मूल सिद्धांतों को अधिक स्पष्टता से समझा जा सकता है।
Q: आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान से तुलना करके समझने पर क्या कहा गया?
A: सेमिनार में कहा गया कि आयुर्वेद को केवल आधुनिक विज्ञान से तुलना करके नहीं समझना चाहिए, बल्कि उसकी अपनी ज्ञान प्रणाली और मूल सिद्धांतों के आधार पर भी समझना जरूरी है।
Conclusion:
श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित ‘Thinking Like Charaka’ सेमिनार में आयुर्वेद को उसकी मूल ज्ञान प्रणाली और विचार पद्धति के आधार पर समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रोफेसर किशोर पटवर्धन ने छात्रों को आचार्य चरक की सोच को समझने की सलाह दी, ताकि आयुर्वेद के सिद्धांतों और अवधारणाओं की गहरी समझ विकसित हो सके।
