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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर 15 बाल श्रमिकों का रेस्क्यू, बिहार-यूपी से हरियाणा, पंजाब और हिमाचल भेजे जा रहे थे बच्चे
Jan Nayak Express में सफर कर रहे नाबालिगों को संयुक्त अभियान में बचाया गया, फैक्ट्रियों में काम कराने की थी तैयारी
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर चलाए गए विशेष अभियान में 15 बच्चों को बाल श्रम और संभावित मानव तस्करी से बचाया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बच्चों को हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की फैक्ट्रियों में काम के लिए भेजा जा रहा था।
अंबाला में संयुक्त अभियान के दौरान 15 बच्चों का रेस्क्यू
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर एक संयुक्त अभियान के तहत 15 नाबालिग बच्चों को बचाया गया, जिन्हें कथित तौर पर मजदूरी के लिए हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जा रहा था।
यह कार्रवाई Zila Yuva Vikas Sangathan, सरकारी रेलवे पुलिस (GRP), एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
H2: Jan Nayak Express में मिले बच्चे
जानकारी के अनुसार, बच्चों को Jan Nayak Express से ले जाया जा रहा था। एक गुप्त सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने ट्रेन की जांच की और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।H3: हेल्पलाइन पर मिली थी सूचना
Ajay Tiwari ने बताया कि यह सूचना Just Rights for Children Alliance की टोल-फ्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त हुई थी।
सूचना मिलते ही मामले को Child Welfare Committee Ambala, GRP, AHTU और RPF के साथ साझा किया गया। इसके बाद रात करीब 11 बजे विशेष जांच अभियान चलाया गया।
H2: फैक्ट्रियों में काम के लिए भेजे जा रहे थे बच्चे
प्रारंभिक पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उनमें से चार बच्चों को अंबाला की एक फैक्ट्री में धागा बनाने के काम के लिए भेजा जा रहा था।
बच्चों के अनुसार:
- प्रत्येक बच्चे को 5,000 रुपये अग्रिम राशि दी गई थी।
- 10,000 रुपये मासिक वेतन का वादा किया गया था।
- लंबे समय तक काम कराने की योजना थी।
इसके अलावा दो बच्चों को हिमाचल प्रदेश भेजा जा रहा था, जबकि अन्य बच्चों का गंतव्य पंजाब बताया गया।
H3: जालंधर की फैक्ट्री में भी भेजे जा रहे थे बच्चे
बचाए गए बच्चों के अनुसार, कुछ बच्चों को Jalandhar स्थित एक जीरा (मसाला) फैक्ट्री में काम के लिए भेजा जा रहा था।
उन्हें:
- 2,000 रुपये अग्रिम भुगतान दिया गया था।
- 12,000 रुपये मासिक वेतन का आश्वासन दिया गया था।
- सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक काम करने की अपेक्षा थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी कम उम्र में लंबे समय तक कार्य कराना बाल श्रम कानूनों के दायरे में गंभीर मामला माना जाता है।
H2: बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किए गए बच्चे
रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों की आवश्यक चिकित्सीय जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके पश्चात उन्हें Ranjeeta Sachdeva के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
H3: ओपन शेल्टर होम में भेजा गया
बाल कल्याण समिति के निर्देश पर सभी बच्चों को देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए ओपन शेल्टर होम भेज दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के परिवारों और उन्हें ले जाने वाले लोगों के संबंध में विस्तृत जांच जारी है।
H2: मानव तस्करी और बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई जारी
Parmjeet Singh Badola ने कहा कि सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई की और बच्चों को संभावित शोषण से बचाने में सफलता हासिल की।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों के खिलाफ लगातार निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी।
Key Highlights:
- अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से 15 बच्चों का रेस्क्यू
- बच्चे बिहार और उत्तर प्रदेश से लाए जा रहे थे
- हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में काम के लिए भेजने की तैयारी
- Jan Nayak Express में चलाया गया विशेष जांच अभियान
- बच्चों को अग्रिम भुगतान और वेतन का लालच दिया गया था
- बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर शेल्टर होम भेजा गया
- GRP, RPF, AHTU और सामाजिक संगठन की संयुक्त कार्रवाई
FAQ Section:
Q1. कितने बच्चों को बचाया गया?
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर 15 बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
Q2. बच्चों को कहाँ ले जाया जा रहा था?
उन्हें हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में विभिन्न फैक्ट्रियों और कार्यस्थलों पर भेजा जा रहा था।
Q3. यह कार्रवाई किस ट्रेन में की गई?
Jan Nayak Express (15211) में विशेष जांच अभियान चलाकर बच्चों को बचाया गया।
Q4. सूचना कैसे मिली थी?
Just Rights for Children Alliance की हेल्पलाइन पर सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई।
Q5. रेस्क्यू के बाद बच्चों को कहाँ रखा गया?
उन्हें Child Welfare Committee के समक्ष पेश कर ओपन शेल्टर होम भेजा गया।
Conclusion:
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर 15 बच्चों का रेस्क्यू बाल श्रम और मानव तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है। समय रहते मिली सूचना और विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयास से बच्चों को संभावित शोषण से बचाया जा सका। यह मामला बाल सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और सतर्क निगरानी की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

