UP Smart Meter Update: उपभोक्ता खुद चुन सकेंगे प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर, UPERC ने किया बड़ा स्पष्टिकरण

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कहा- प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, उपभोक्ताओं को मिलेगा भुगतान मोड चुनने का अधिकार

On

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही भ्रम की स्थिति पर UPERC ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में से अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने का अधिकार है और प्रीपेड मोड अनिवार्य नहीं है।

स्मार्ट मीटर को लेकर UPERC का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने स्मार्ट मीटर को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के बीच चयन करने का पूरा अधिकार है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी उपभोक्ता के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर को अनिवार्य नहीं बनाया गया है।

यह स्पष्टीकरण उन चर्चाओं और आशंकाओं के बीच आया है, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि स्मार्ट मीटर केवल प्रीपेड मोड में ही लगाए जाएंगे।

H2: UPPCL को जारी किया गया आधिकारिक पत्र

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को जारी एक पत्र में इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट किया।

आयोग ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 (Electricity Act, 2003), उपभोक्ता अधिकार नियम 2020 (Electricity Rights of Consumers Rules, 2020) और 31 दिसंबर 2025 को जारी Cost Data Book के प्रावधानों के अनुसार स्मार्ट मीटर दोनों भुगतान प्रणालियों — प्रीपेड और पोस्टपेड — में लगाए जा सकते हैं।

H2: उपभोक्ताओं के पास रहेगा विकल्प

आयोग के अनुसार, कानून की मंशा उपभोक्ताओं को विकल्प प्रदान करना है, न कि किसी एक भुगतान प्रणाली को अनिवार्य बनाना।

इसका मतलब है कि उपभोक्ता अपनी सुविधा, भुगतान क्षमता और उपयोग की आदतों के आधार पर यह तय कर सकते हैं कि वे प्रीपेड स्मार्ट मीटर लेना चाहते हैं या पोस्टपेड।

H3: Electricity Act की धारा 47(5) का हवाला

UPERC ने अपने पत्र में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का भी उल्लेख किया है।

इस धारा के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता प्रीपेड मीटर चुनता है, तो उससे सुरक्षा जमा (Security Deposit) नहीं लिया जा सकता। आयोग का कहना है कि यह प्रावधान स्वयं इस बात का संकेत देता है कि प्रीपेड मीटर उपभोक्ता की पसंद का विषय है, न कि अनिवार्य व्यवस्था।

H2: RDSS योजना के तहत लगाए जा रहे हैं स्मार्ट मीटर

आयोग ने बताया कि राज्य की सभी प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) में Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

इन स्मार्ट मीटरों की स्थापना Advanced Metering Infrastructure Service Providers (AMISPs) के माध्यम से की जा रही है।

H3: स्मार्ट मीटर से मिलेंगे कई फायदे

स्मार्ट मीटर तकनीक से बिजली खपत की रियल टाइम निगरानी, सटीक बिलिंग, चोरी पर नियंत्रण और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, मीटर रीडिंग की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और डिजिटल होगी।

H2: उपभोक्ताओं की चिंताओं पर लगा विराम

UPERC के इस स्पष्टिकरण से उन लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है जो प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर असमंजस में थे।

अब आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि स्मार्ट मीटर का भुगतान मॉडल चुनने का अधिकार पूरी तरह उपभोक्ता के पास रहेगा।

Key Highlights:

  • UPERC ने स्मार्ट मीटर को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया
  • उपभोक्ता प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुन सकेंगे
  • प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं है
  • UPPCL को आयोग ने आधिकारिक पत्र जारी किया
  • Electricity Act 2003 और Consumer Rights Rules 2020 का हवाला
  • RDSS योजना के तहत राज्यभर में लगाए जा रहे हैं स्मार्ट मीटर
  • प्रीपेड मीटर चुनने पर सुरक्षा जमा नहीं देना होगा

FAQ Section:

Q1. क्या उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य हैं?

नहीं। UPERC ने स्पष्ट किया है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं।

Q2. क्या उपभोक्ता पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुन सकते हैं?

हाँ। उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे।

Q3. UPERC ने यह स्पष्टीकरण क्यों जारी किया?

स्मार्ट मीटर को लेकर फैली भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए आयोग ने यह स्पष्टिकरण जारी किया है।

Q4. RDSS योजना क्या है?

Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की केंद्र सरकार की योजना है।

Q5. प्रीपेड मीटर चुनने पर क्या लाभ मिलेगा?

Electricity Act की धारा 47(5) के अनुसार प्रीपेड मीटर चुनने पर उपभोक्ता से सुरक्षा जमा नहीं लिया जाएगा।

Conclusion:

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का यह स्पष्टीकरण स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है। आयोग ने साफ कर दिया है कि प्रीपेड मीटर को अनिवार्य नहीं बनाया गया है और उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड विकल्प चुन सकते हैं। इससे राज्य में स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़ने की उम्मीद है।Screenshot_1880

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

हमले के बाद अस्पताल में भर्ती कांग्रेस नेता Jagga Gill ने दर्ज की रायकोट की सबसे बड़ी जीत

Advertisement

नवीनतम

Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software