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हरियाणा के राइस मिलर्स ने CM नायब सैनी से लगाई गुहार, FCI से 6.5 लाख टन लंबित CMR स्वीकार कराने की मांग
हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हस्तक्षेप की मांग की है। मिलर्स ने लंबित कस्टम-मिल्ड राइस स्वीकार कराने और डिलीवरी की समय सीमा बढ़ाने का मुद्दा उठाया।
हरियाणा के राइस मिलर्स ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से FCI द्वारा पिछले धान खरीद सीजन का लंबित कस्टम-मिल्ड राइस स्वीकार नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन CMR के साथ डिलीवरी की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाने की मांग की गई।
हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर पिछले धान खरीद सीजन के लंबित कस्टम-मिल्ड राइस (CMR) को भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की, ताकि हरियाणा के राइस मिलर्स का लंबित चावल स्वीकार किया जा सके। मिलर्स के अनुसार, FCI के पास करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन CMR की डिलीवरी लंबित है।
6.5 लाख मीट्रिक टन लंबित CMR स्वीकार करने की मांग
राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार से बातचीत कर FCI को लंबित कस्टम-मिल्ड राइस स्वीकार करने के लिए आवश्यक निर्देश दिलाने में हस्तक्षेप करें।मिलर्स का कहना है कि पिछले धान खरीद सीजन का लगभग 6.5 लाख मीट्रिक टन CMR अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है, जिससे मिलिंग उद्योग को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर करने की मांग
एसोसिएशन ने CMR डिलीवरी की मौजूदा अंतिम तिथि बढ़ाने की भी मांग की है। मिलर्स ने कहा कि डिलीवरी की समय सीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर की जानी चाहिए।
उनका तर्क है कि कई कारणों से मिलिंग और डिलीवरी का काम तय समय के अनुसार पूरा नहीं हो सका, इसलिए उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाना जरूरी है।
IPR स्टैक की सीमित उपलब्धता से प्रभावित हुआ काम
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ राइस मिलर्स से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि FCI में इम्प्रूव्ड राइस (IPR) के लिए स्टोरेज स्टैक की उपलब्धता कुल खरीदी गई मात्रा के केवल 20 प्रतिशत तक सीमित रही। इसके कारण CMR से संबंधित काम प्रभावित हुआ।
FRK की कमी के कारण कई बार रुका CMR कार्य
मिलर्स ने बैठक में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRK) की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि पर्याप्त मात्रा में FRK उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार CMR का काम रोकना पड़ा।
इसका सीधा असर चावल की मिलिंग और समय पर डिलीवरी पर पड़ा, जिससे प्रक्रिया में महत्वपूर्ण देरी हुई।
केवल चार एजेंसियों को टेंडर मिलने से सप्लाई पर असर
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा के अनुसार, FRK टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई और टेंडर केवल चार पार्टियों को दिया गया।
उनका कहना है कि सीमित संख्या में आपूर्तिकर्ता होने के कारण समय पर पर्याप्त मात्रा में FRK उपलब्ध नहीं हो पाया। नतीजतन कई अवसरों पर CMR कार्य कई दिनों तक बंद रहा।
मिलिंग और डिलीवरी में बढ़ती गई देरी
FRK की कमी और CMR कार्य के बार-बार रुकने से चावल की मिलिंग और उसकी डिलीवरी में देरी हुई।
मिलर्स का कहना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए लंबित CMR डिलीवरी के लिए समय सीमा बढ़ाना जरूरी है, ताकि प्रक्रिया पूरी की जा सके।
FCI गोदामों में स्टोरेज क्षमता की कमी भी बनी समस्या
राइस मिलर्स ने FCI के गोदामों में पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।
एसोसिएशन के अनुसार, स्टोरेज स्पेस की कमी के कारण मिल किया गया चावल समय पर डिलीवर नहीं किया जा सका।
गेहूं खरीद के दौरान चावल के लिए कम हुआ स्थान
मिलर्स ने कहा कि गेहूं खरीद सीजन के दौरान FCI ने गेहूं के भंडारण और डिलीवरी को प्राथमिकता दी। इसके चलते CMR चावल के लिए उपलब्ध स्टोरेज स्पेस पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
भंडारण क्षमता की कमी को भी लंबित CMR डिलीवरी की बड़ी वजहों में शामिल किया गया।
पिछले और मौजूदा वर्ष के बोनस का मुद्दा भी उठाया
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष पिछले और मौजूदा वर्ष के लंबित बोनस का मामला भी उठाया।
अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि सरकार से बोनस के संबंध में आवश्यक संचार जल्द जारी करने का अनुरोध किया गया है।
FCI द्वारा CMR स्वीकार न करना मुख्य मुद्दा
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि उनका सबसे प्रमुख मुद्दा FCI द्वारा लंबित CMR को स्वीकार नहीं किया जाना है।
मिलर्स ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से केंद्र सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप करने और FCI को लंबित CMR स्वीकार करने के लिए निर्देश दिलाने की मांग की है।
Key Highlights:
- हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने CM नायब सिंह सैनी से मुलाकात की।
- पिछले धान खरीद सीजन के लंबित CMR को FCI द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया।
- करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन कस्टम-मिल्ड राइस की डिलीवरी लंबित बताई गई।
- CMR डिलीवरी की समय सीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर करने की मांग की गई।
- IPR स्टोरेज स्टैक की सीमित उपलब्धता को देरी का एक कारण बताया गया।
- FCI में IPR स्टोरेज कुल खरीदी गई मात्रा के करीब 20 प्रतिशत तक सीमित होने की बात कही गई।
- FRK की कमी के कारण कई बार CMR कार्य रोकना पड़ा।
- FRK टेंडर केवल चार पार्टियों को दिए जाने से आपूर्ति प्रभावित होने का दावा।
- FCI गोदामों में स्टोरेज स्पेस की कमी का मुद्दा भी उठाया गया।
- पिछले और मौजूदा वर्ष के लंबित बोनस का मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा गया।
FAQ Section:
सवाल: हरियाणा के राइस मिलर्स ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की है?
राइस मिलर्स ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से केंद्र सरकार के समक्ष हस्तक्षेप कर FCI द्वारा लंबित कस्टम-मिल्ड राइस स्वीकार कराने की मांग की है।
सवाल: कितना CMR लंबित बताया गया है?
एसोसिएशन के अनुसार, करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन कस्टम-मिल्ड राइस की डिलीवरी लंबित है।
सवाल: CMR डिलीवरी की समय सीमा बढ़ाने की क्या मांग है?
मिलर्स ने डिलीवरी की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर करने की मांग की है।
सवाल: CMR कार्य में देरी के क्या कारण बताए गए?
एसोसिएशन ने IPR स्टोरेज स्टैक की सीमित उपलब्धता, FRK की कमी, टेंडर प्रक्रिया में देरी और FCI गोदामों में पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं होने को प्रमुख कारण बताया।
सवाल: मिलर्स ने बोनस को लेकर क्या मुद्दा उठाया?
प्रतिनिधिमंडल ने पिछले और मौजूदा वर्ष के लंबित बोनस का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जल्द आवश्यक संचार जारी करने की मांग की।
Conclusion:
हरियाणा के राइस मिलर्स के सामने लंबित CMR की डिलीवरी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। एसोसिएशन का कहना है कि FRK की कमी, सीमित स्टोरेज क्षमता और FCI द्वारा लंबित चावल स्वीकार नहीं किए जाने से मिलिंग और डिलीवरी प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब मिलर्स ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से केंद्र सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप की उम्मीद जताई है, ताकि करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन लंबित CMR के मुद्दे का समाधान हो सके और डिलीवरी के लिए अतिरिक्त समय मिल सके।
