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Delhi से Jaipur का सफर अब सिर्फ 2 घंटे में, सितंबर से शुरू होगा नया एक्सप्रेसवे
86 किलोमीटर लंबा पनियाला-बरोडामेव एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अंबाला-कोटपुतली कॉरिडोर को जोड़ेगा।
दिल्ली और जयपुर के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सितंबर से नया पनियाला-बरोडामेव ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दिल्ली से जयपुर का सफर सिर्फ दो घंटे में पूरा हो सकेगा, जबकि गुरुग्राम से जयपुर की दूरी मात्र 90 मिनट में तय होगी।
दिल्ली और जयपुर के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। इस साल सितंबर से दिल्ली से जयपुर का सफर घटकर केवल दो घंटे का रह जाएगा, जबकि गुरुग्राम से जयपुर पहुंचने में सिर्फ 90 मिनट लगेंगे।
यात्रा समय में यह भारी कमी राजस्थान में बन रहे 86 किलोमीटर लंबे नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे — पनियाला-बरोडामेव एक्सप्रेसवे — के पूरा होने से संभव होगी।

गोल्डन ट्रायंगल पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
दैनिक यात्रियों के अलावा यह नया एक्सप्रेसवे दिल्ली, आगरा और जयपुर को जोड़ने वाले प्रसिद्ध “गोल्डन ट्रायंगल” पर्यटन सर्किट को भी बड़ा बढ़ावा देगा।
इन ऐतिहासिक शहरों के बीच यात्रा अधिक तेज और सुगम होने से पर्यटक कम समय में यात्रा कर सकेंगे। इससे वीकेंड ट्रिप्स और अंतरराष्ट्रीय टूर पैकेज भी अधिक सुविधाजनक बनेंगे।
परियोजना की लागत और प्रमुख विशेषताएं
करीब 2,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह 86 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट क्षेत्रीय आधारभूत ढांचे के बड़े विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रमुख बिंदु:
- भूमि अधिग्रहण:
परियोजना के लिए लगभग 600 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। भूमि मालिकों को अब तक 600 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में वितरित किए जा चुके हैं। - इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं:
तेज और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए इस मार्ग पर सात बड़े जंक्शन, तीन फ्लाईओवर, 50 अंडरपास और 125 क्रॉसिंग बनाई जाएंगी। - सुरक्षा और तकनीक:
एक्सप्रेसवे पर इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) और आधुनिक स्पीड मॉनिटरिंग कैमरे लगाए जाएंगे। सुरक्षा और तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों जैसे धीमी गति वाले वाहनों को मुख्य मार्ग पर प्रवेश नहीं मिलेगा। - आर्थिक प्रभाव:
अधिकारियों के अनुसार, इस कॉरिडोर से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित होने की संभावना है। इसके जरिए 500 से अधिक स्थायी नौकरियां पैदा होंगी, जबकि लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्रों में हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बनेंगे।

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