Uttar Pradesh में छोटे शहरों और गांवों तक फैल रहा साइबर अपराध

NCRB रिपोर्ट के अनुसार 2024 में यूपी में 11,073 साइबर अपराध मामले दर्ज, डिजिटल जागरूकता की कमी का फायदा उठा रहे ठग।

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उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। स्मार्टफोन, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठगी के मामले छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे हैं।

Uttar Pradesh में साइबर अपराध अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा।

National Crime Records Bureau (NCRB) के आंकड़ों और पुलिस आकलन के अनुसार, धोखाधड़ी करने वाले गिरोह अब तेजी से छोटे शहरों, अर्ध-शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों को निशाना बना रहे हैं। इसका मुख्य कारण राज्य में स्मार्टफोन उपयोग, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं का तेजी से विस्तार है।

NCRB के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में 11,073 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। यह संख्या 2023 में 10,794 और 2022 में 10,117 थी, जिससे लगातार वृद्धि का संकेत मिलता है।

हालांकि Lucknow, Noida, Ghaziabad और Kanpur अभी भी शिकायतों के बड़े केंद्र बने हुए हैं, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी साइबर ठगी के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, जिन जिलों में पहले केवल छिटपुट डिजिटल धोखाधड़ी के मामले सामने आते थे, वहां अब फर्जी निवेश योजनाएं, UPI धोखाधड़ी, फिशिंग लिंक, OTP चोरी, सेक्सटॉर्शन और सोशल मीडिया प्रतिरूपण जैसे संगठित साइबर अपराध हो रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह स्थिति उत्तर प्रदेश में चल रहे व्यापक डिजिटल बदलाव को दर्शाती है, जहां सस्ते स्मार्टफोन और इंटरनेट की उपलब्धता के कारण छोटे बाजारों और ग्रामीण आबादी तक ऑनलाइन लेनदेन और ऐप आधारित वित्तीय सेवाएं तेजी से पहुंच रही हैं।

एक साइबर अपराध जांच अधिकारी ने कहा, “अब ठग केवल महानगरों के लोगों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं। छोटे शहर आसान निशाना बनते जा रहे हैं क्योंकि वहां डिजिटल जागरूकता अपेक्षाकृत कम है, जबकि ऑनलाइन वित्तीय गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।”

अधिकारियों ने बताया कि छोटे जिलों में कई पीड़ित पहली बार डिजिटल बैंकिंग का उपयोग कर रहे हैं और वे फर्जी कस्टमर केयर कॉल, स्क्रीन-शेयरिंग ऐप, खतरनाक लिंक और नकली पेमेंट इंटरफेस जैसी धोखाधड़ी तकनीकों से परिचित नहीं हैं।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, संगठित साइबर अपराध गिरोह अब अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए काम कर रहे हैं। ये गिरोह पकड़ से बचने के लिए म्यूल बैंक खाते, फर्जी सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा पकड़े गए कई गिरोह अन्य राज्यों से संचालित हो रहे थे, लेकिन वे बड़े पैमाने पर कॉलिंग और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए उत्तर प्रदेश के लोगों को निशाना बना रहे थे।

NCRB के आंकड़ों के अनुसार, कुल मामलों के लिहाज से उत्तर प्रदेश साइबर अपराध के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है और इस सूची में केवल Telangana और Karnataka उससे आगे हैं।

हालांकि, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश की साइबर अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 4.6 रही, जो राष्ट्रीय औसत 7.3 से कम है।Screenshot_1126

Edited By: Karan Singh

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