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Amritsar में सिविल डिफेंस व्यवस्था को फिर किया जा रहा मजबूत, ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी तैयारियां
सीमा क्षेत्र के संवेदनशील शहर अमृतसर में नए सायरन सिस्टम, मॉक ड्रिल और स्वयंसेवकों की भर्ती पर जोर।
अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित अमृतसर में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सिविल डिफेंस तंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्वयंसेवकों की भर्ती बढ़ाने, आधुनिक सायरन प्रणाली लगाने और नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने की योजना बनाई है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट रणनीतिक स्थिति के कारण सरकार द्वारा श्रेणी-II सिविल डिफेंस शहर घोषित किए गए Amritsar में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सिविल डिफेंस तंत्र को मजबूत करने के प्रयास तेज हो गए हैं।
इस सैन्य अभियान ने शहर की आपातकालीन और शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने की आवश्यकता को उजागर किया।

लेकिन पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर उत्पन्न तनाव के बाद प्रशासन ने इस व्यवस्था को फिर से सक्रिय और आधुनिक बनाने का निर्णय लिया।
स्वयंसेवकों की बड़े स्तर पर भर्ती
नए अभियान के तहत सिविल डिफेंस विभाग ने बड़े पैमाने पर स्वयंसेवकों का पंजीकरण शुरू किया है।
Hajrai Khanna ने बताया कि विभाग के पास अब प्रशिक्षित मानव संसाधन की बड़ी संख्या उपलब्ध है।
उन्होंने कहा, “हमारे पास 600 से अधिक स्वयंसेवक हैं और उनके लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों, कॉलेजों और NCC इकाइयों में भी जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि युवा स्वयंसेवकों को ब्लैकआउट, निकासी (इवैक्यूएशन) और राहत एवं बचाव कार्य जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जा सके।
आधुनिक सायरन सिस्टम लगाने की योजना
जिला कमांडेंट Manpreet Singh Randhawa ने बताया कि सरकार शहर की चेतावनी प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए नए सायरन सिस्टम की योजना पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “वर्तमान में शहर के लगभग 25 स्थानों पर सायरन लगे हुए हैं। नया सिस्टम अपग्रेडेड होगा, जिसे एक केंद्रीकृत स्थान से एक ही स्विच के जरिए संचालित किया जा सकेगा।”
अधिकारियों के अनुसार, यह केंद्रीकृत प्रणाली आपातकालीन स्थितियों में पूरे शहर में तेज़ी से अलर्ट जारी करने में मदद करेगी।
पांच हिस्सों में बांटा गया शहर
बेहतर समन्वय और निगरानी के लिए पूरे शहर को सिविल डिफेंस ढांचे के तहत पांच डिवीजनों में विभाजित किया गया है।
प्रशासन का मानना है कि इस डिवीजन आधारित व्यवस्था से संकट के समय तेज प्रतिक्रिया और बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।
मॉक ड्रिल की संख्या बढ़ाई गई
सिविल डिफेंस विभाग ने मॉक ड्रिल की आवृत्ति भी बढ़ा दी है।
अप्रैल में Ranjit Avenue क्षेत्र में एक सिविल डिफेंस अभ्यास आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य आपातकालीन तैयारियों और जनता की प्रतिक्रिया प्रणाली का परीक्षण करना था।
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