यमुनानगर में नवजात शिशुओं की देखभाल को लेकर ASHA वर्कर्स को दिया गया प्रशिक्षण, शिशु मृत्यु दर घटाने पर जोर

ICMR के ‘पालन मां’ प्रोजेक्ट के तहत SWACH फाउंडेशन ने ASHA वर्कर्स, ANM और CHO के लिए आयोजित की संयुक्त कार्यशालाएं।

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हरियाणा के यमुनानगर में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशालाओं में समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों की देखभाल, स्तनपान तथा खतरे के संकेतों की पहचान करने की जानकारी दी गई।

यमुनानगर में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं

हरियाणा के यमुनानगर में फाउंडेशन फॉर सर्वाइवल वुमेन एंड चिल्ड्रन (SWACH), चंडीगढ़ की ओर से आशा (ASHA) वर्कर्स, सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।

ये कार्यशालाएं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के ‘पालन मां’ प्रोजेक्ट के तहत आयोजित की गईं। इनका मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं की देखभाल से जुड़ी जानकारी देना और जिले में शिशु मृत्यु दर को कम करने के प्रयासों को मजबूत करना था।

कार्यशालाओं का समापन यमुनानगर की कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला की मौजूदगी में हुआ। इस अवसर पर SWACH की निदेशक डॉ. मीनाक्षी और कार्यकारी निदेशक डॉ. नीना रैना भी उपस्थित रहीं।

समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों की देखभाल का प्रशिक्षण

डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि SWACH फाउंडेशन ने आशा वर्कर्स को नवजात शिशुओं की देखभाल और उनके स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम कारकों के बारे में जानकारी देने के लिए ये कार्यशालाएं आयोजित कीं।

प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष रूप से समय से पहले जन्मे बच्चों और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की देखभाल के बारे में बताया गया। उन्हें बच्चों में खतरे के संकेतों की पहचान करने और अभिभावकों को उचित स्वास्थ्य सलाह देने का प्रशिक्षण भी दिया गया।

स्तनपान और मां की सेहत पर भी दिया गया जोर

कार्यशालाओं में आशा वर्कर्स को नवजात शिशुओं के माता-पिता को जरूरी स्वास्थ्य जानकारी देने के तरीके समझाए गए।

इसमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान का महत्व।

  • बच्चे के शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखना।

  • कम वजन वाले बच्चों की विशेष देखभाल।

  • समय से पहले जन्मे बच्चों के स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान।

  • प्रसव के बाद मां के खानपान और स्वास्थ्य की देखभाल।

  • नवजात शिशु में खतरे के संकेत पहचानना।

गंभीर स्थिति में बच्चे को उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजने के निर्देश

डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि आशा वर्कर्स को यह भी निर्देश दिए गए कि यदि किसी बच्चे में गंभीर स्वास्थ्य समस्या या खतरे के संकेत दिखाई दें तो उसे तुरंत उच्च स्तर के स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाए।

ऐसे बच्चों को विशेषज्ञ जांच और समय पर उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या सिविल अस्पताल भेजने पर जोर दिया गया, ताकि उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके।

मुख्य बातें

  • यमुनानगर में SWACH फाउंडेशन ने संयुक्त प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित कीं।

  • प्रशिक्षण ICMR के ‘पालन मां’ प्रोजेक्ट के तहत दिया गया।

  • ASHA वर्कर्स, ANM और CHO ने कार्यशालाओं में भाग लिया।

  • समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों की देखभाल पर जानकारी दी गई।

  • स्तनपान, तापमान नियंत्रण और प्रसव के बाद मां की सेहत पर जोर दिया गया।

  • गंभीर स्थिति में नवजात को CHC या सिविल अस्पताल रेफर करने के निर्देश दिए गए।

निष्कर्ष

नवजात शिशुओं की समय पर देखभाल और स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यमुनानगर में आयोजित इन प्रशिक्षण कार्यशालाओं के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को जरूरी जानकारी और व्यावहारिक मार्गदर्शन देने का प्रयास किया गया है।Screenshot_392

Edited By: Atul Sharma

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