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नाभा के द पंजाब पब्लिक स्कूल का गौरव बढ़ा, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी को मिला 23वां रोल ऑफ ऑनर अवॉर्ड
स्कूल के 66वें स्थापना दिवस समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया सम्मानित, 1974 में इसी संस्थान में विद्यार्थी के रूप में लिया था दाखिला।
पंजाब के नाभा स्थित द पंजाब पब्लिक स्कूल ने अपने 66वें स्थापना दिवस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी को वर्ष 2026 का 23वां रोल ऑफ ऑनर अवॉर्ड प्रदान किया। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें यह सम्मान दिया। खास बात यह है कि जस्टिस पुरी इसी स्कूल के पूर्व छात्र रह चुके हैं।
पंजाब के नाभा स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान द पंजाब पब्लिक स्कूल में आयोजित 66वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान न्यायिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी को सम्मानित किया गया।
स्कूल की ओर से उन्हें वर्ष 2026 का 23वां रोल ऑफ ऑनर अवॉर्ड प्रदान किया गया। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने गुरुवार को आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया। कटारिया स्कूल के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन भी हैं।
यह सम्मान न्यायमूर्ति पुरी की कानून के क्षेत्र में उपलब्धियों, न्यायिक सेवाओं और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया है।
जिस स्कूल में पढ़े, वहीं मिला बड़ा सम्मान
न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी के लिए यह समारोह बेहद खास रहा, क्योंकि उनका इस स्कूल से पुराना संबंध है।
उन्होंने वर्ष 1974 में द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा में दाखिला लिया था और वर्ष 1980 में यहां से ICSE की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
स्कूल की ओर से जारी प्रशस्ति पत्र के अनुसार, विद्यार्थी जीवन के दौरान जस्टिस पुरी पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल के ऑर्केस्ट्रा और सामाजिक एवं परोपकारी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे।
स्कूल से शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज, नाभा में प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई की।
इसके बाद उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से वर्ष 1984 में अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की।
कानून की पढ़ाई में हासिल की उच्च शिक्षा
अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बाद न्यायमूर्ति पुरी ने कानून के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।
उन्होंने वर्ष 1987 में एलएलबी और वर्ष 1990 में एलएलएम की डिग्री पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से प्राप्त की।
कानूनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने नाभा की अधीनस्थ अदालतों में वकालत शुरू की। वह पहली पीढ़ी के वकील थे और उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत स्वयं की मेहनत और योग्यता के आधार पर की।
वकालत के साथ कानून की शिक्षा में भी दिया योगदान
न्यायमूर्ति पुरी ने वकालत के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कानून विषय में UGC-NET परीक्षा उत्तीर्ण की, जिसके बाद उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के फैकल्टी ऑफ लॉ में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया गया।
वर्ष 1991 में चंडीगढ़ आने के बाद उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।
वर्ष 1992 से 1998 तक उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में विजिटिंग लेक्चरर के रूप में अंतिम वर्ष के एलएलबी विद्यार्थियों को पढ़ाया।
इस दौरान उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, परिसीमा अधिनियम, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और उपभोक्ता संरक्षण कानून जैसे महत्वपूर्ण विषयों की शिक्षा दी।
प्रशासनिक अधिकारियों और कानून अधिकारियों को भी दिया प्रशिक्षण
न्यायमूर्ति पुरी का योगदान केवल अदालतों और विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने चंडीगढ़ स्थित महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पंजाब के प्रशासनिक और राजस्व अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए व्याख्यान दिए।
इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक के कानून अधिकारियों और पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।
उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के IAS और PCS प्रशिक्षण केंद्रों में भी व्याख्यान दिए।
पंजाब के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल के पद पर भी रहे
वर्ष 2009 में न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी को पंजाब का अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Advocate-General) नियुक्त किया गया था।
उन्होंने जून 2017 तक करीब आठ वर्षों तक इस पद पर सेवाएं दीं।
हाईकोर्ट में अपनी वकालत के दौरान उन्होंने कई तरह के महत्वपूर्ण मामलों में काम किया। इनमें दीवानी, सेवा संबंधी, आपराधिक, कॉरपोरेट, पर्यावरण, सहकारी और चुनाव से जुड़े मामले शामिल रहे।
2019 में बने हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश
न्यायिक क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और योगदान के बाद 22 नवंबर 2019 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई।
इसके बाद 25 अक्टूबर 2021 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
अब द पंजाब पब्लिक स्कूल की ओर से उन्हें 2026 का 23वां रोल ऑफ ऑनर अवॉर्ड प्रदान किया जाना उनके शैक्षणिक संस्थान और न्यायिक क्षेत्र के बीच एक विशेष उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
Key Highlights
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जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी को 2026 का 23वां रोल ऑफ ऑनर अवॉर्ड मिला।
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सम्मान द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा की ओर से दिया गया।
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पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने पुरस्कार प्रदान किया।
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स्कूल में 66वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया।
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जस्टिस पुरी ने 1974 में स्कूल में दाखिला लिया था।
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उन्होंने 1980 में ICSE परीक्षा पास की थी।
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वर्ष 2009 में पंजाब के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल बने।
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22 नवंबर 2019 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने।
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25 अक्टूबर 2021 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए।
FAQ Section
1. जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी को कौन सा सम्मान मिला है?
उन्हें द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा की ओर से वर्ष 2026 का 23वां रोल ऑफ ऑनर अवॉर्ड प्रदान किया गया है।
2. जस्टिस पुरी को सम्मानित किसने किया?
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
3. जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने किस स्कूल से पढ़ाई की है?
उन्होंने नाभा स्थित द पंजाब पब्लिक स्कूल में 1974 में दाखिला लिया और 1980 में ICSE परीक्षा पास की।
4. जस्टिस पुरी कब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने?
उन्हें 22 नवंबर 2019 को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 25 अक्टूबर 2021 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।
5. जस्टिस पुरी पंजाब के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल कब रहे?
उन्हें 2009 में इस पद पर नियुक्त किया गया था और उन्होंने जून 2017 तक सेवाएं दीं।
Conclusion
द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा की ओर से जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी को दिया गया 23वां रोल ऑफ ऑनर अवॉर्ड उनकी मेहनत, शैक्षणिक उपलब्धियों और न्यायिक सेवाओं का सम्मान है। जिस संस्थान से उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की शुरुआत की थी, उसी संस्थान में इतने वर्षों बाद सम्मानित होना उनके लिए एक यादगार उपलब्धि है। यह सम्मान विद्यार्थियों के लिए भी शिक्षा, समर्पण और मेहनत के माध्यम से सफलता हासिल करने की प्रेरणा है।

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