- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- भारत सरकार की विशेष मंजूरी से 49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते लौटे पाकिस्तान...
भारत सरकार की विशेष मंजूरी से 49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते लौटे पाकिस्तान
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के हस्तक्षेप के बाद गृह मंत्रालय ने दी विशेष अनुमति, हवाई यात्रा के बजाय सड़क मार्ग से लौटने पर श्रद्धालुओं का खर्च भी बचा।
पाकिस्तान से भारत आए 49 सिख श्रद्धालुओं को केंद्र सरकार ने विशेष अनुमति देकर अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते वापस पाकिस्तान जाने की इजाजत दी। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के प्रयासों के बाद गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया। इससे श्रद्धालुओं को हवाई यात्रा के अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिली।
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित आवागमन के बीच 49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की विशेष अनुमति मिलने के बाद पाकिस्तान से आए सिख श्रद्धालुओं का जत्था बुधवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते अपने देश वापस लौट गया।
यह अनुमति दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के हस्तक्षेप और गृह मंत्रालय से किए गए अनुरोध के बाद मिली।
श्रद्धालुओं का यह जत्था पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर और ननकाना साहिब से संबंधित था। सभी श्रद्धालुओं को अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के माध्यम से पाकिस्तान में प्रवेश की अनुमति दी गई।
खास बात यह रही कि श्रद्धालुओं को पहले हवाई मार्ग से पाकिस्तान लौटना था, लेकिन विशेष मंजूरी मिलने के बाद वे सड़क मार्ग से अपने देश जा सके। इससे उनकी यात्रा का खर्च भी कम हुआ।
गृह मंत्रालय की विशेष मंजूरी से खुला रास्ता
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य सलाहकार (NRI Affairs) परमजीत सिंह चंडोक ने श्रद्धालुओं की वापसी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया था।
उन्होंने श्रद्धालुओं को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते वापस भेजने के लिए विशेष अनुमति और जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया था।
DSGMC की पहल के बाद गृह मंत्रालय ने विशेष अनुमति प्रदान की, जिससे 49 सदस्यीय जत्था सड़क मार्ग से पाकिस्तान लौट सका।
1 मई 2025 से आम यात्रियों के लिए बंद है अटारी-वाघा बॉर्डर
अटारी-वाघा बॉर्डर पर आम नागरिकों और कम अवधि के यात्रियों की आवाजाही 1 मई 2025 से बंद है।
यह फैसला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया था।
वर्तमान व्यवस्था के तहत 1974 के भारत-पाकिस्तान धार्मिक स्थलों की यात्रा संबंधी प्रोटोकॉल के अंतर्गत अधिसूचित धार्मिक अवसरों पर आयोजित संगठित तीर्थयात्राओं को ही अनुमति दी जाती है।
ऐसे में 49 पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को विशेष मंजूरी के तहत सड़क मार्ग से वापस भेजना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
8 अक्टूबर को भारत पहुंचे थे श्रद्धालु
जानकारी के अनुसार, यह जत्था 8 अक्टूबर को लाहौर-ताशकंद-नई दिल्ली हवाई मार्ग से भारत पहुंचा था।
श्रद्धालुओं की वापसी की मूल योजना हवाई यात्रा के माध्यम से पाकिस्तान लौटने की थी। उनका वीजा 6 नवंबर को समाप्त होने वाला था।
हालांकि, DSGMC के प्रयासों और गृह मंत्रालय की विशेष अनुमति के बाद उन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते वापस जाने का अवसर मिला।
श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन करना रहा यात्रा का खास हिस्सा
इस धार्मिक यात्रा का एक खास आकर्षण उत्तराखंड स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन करना रहा।
जत्थे के करीब 40 सदस्यों को श्री हेमकुंड साहिब जाने का अवसर मिला। यह यात्रा गुरुद्वारा साहिब के वार्षिक कपाट बंद होने से महज दो दिन पहले हुई थी।
इसके लिए गृह मंत्रालय की ओर से विशेष अनुमति और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई गई थीं।
इसके अलावा श्रद्धालुओं ने श्री हरमंदिर साहिब में गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व के समारोह में भी हिस्सा लिया।
जत्थे के नेता ने भारत-पाकिस्तान सरकारों का जताया आभार
जत्थे के नेता पपिंदर सिंह ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों की इच्छा होती है कि वे उन पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन कर सकें, जिनसे 1947 के विभाजन के बाद उनका संपर्क टूट गया था।
उन्होंने बताया कि श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा उनके लिए अप्रत्याशित लेकिन बेहद यादगार अनुभव रही।
पपिंदर सिंह के मुताबिक, अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते वापसी की अनुमति मिलने से उनकी यात्रा आसान और किफायती हो गई। उन्होंने बताया कि जत्थे के सदस्यों ने अपनी वापसी की हवाई टिकटें भी सरेंडर कर दी हैं और अब उन्हें रिफंड मिलने की उम्मीद है।
Key Highlights
-
पाकिस्तान से आए 49 सिख श्रद्धालु अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस लौटे।
-
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष अनुमति प्रदान की।
-
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने वापसी में मदद की।
-
जत्थे में पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर और ननकाना साहिब के श्रद्धालु शामिल थे।
-
श्रद्धालु 8 अक्टूबर को नई दिल्ली पहुंचे थे।
-
उनका वीजा 6 नवंबर को समाप्त होने वाला था।
-
करीब 40 श्रद्धालुओं ने श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन किए।
-
श्रद्धालुओं ने श्री हरमंदिर साहिब में गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व में भी हिस्सा लिया।
-
सड़क मार्ग से वापसी के कारण हवाई यात्रा का खर्च बचा।
FAQ Section
1. कितने पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु अटारी बॉर्डर से लौटे?
कुल 49 सिख श्रद्धालु बुधवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान लौटे।
2. श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से लौटने की अनुमति किसने दी?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अनुरोध के बाद विशेष अनुमति दी।
3. अटारी-वाघा बॉर्डर आम यात्रियों के लिए कब से बंद है?
आम और अल्पकालिक यात्रियों के लिए यह बॉर्डर 1 मई 2025 से बंद है।
4. पाकिस्तानी श्रद्धालु भारत कब पहुंचे थे?
यह जत्था 8 अक्टूबर को लाहौर-ताशकंद-नई दिल्ली मार्ग से भारत पहुंचा था।
5. कितने श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब के दर्शन किए?
जत्थे के करीब 40 सदस्यों ने उत्तराखंड स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन किए।
6. श्रद्धालुओं की वापसी में किस संस्था ने मदद की?
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने गृह मंत्रालय से विशेष अनुमति और यात्रा व्यवस्था के लिए संपर्क किया था।
Conclusion
49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं की अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते वापसी धार्मिक आस्था और आपसी सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की पहल और गृह मंत्रालय की विशेष मंजूरी से श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली। इस यात्रा के दौरान श्री हरमंदिर साहिब और श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन उनके लिए यादगार रहे। यह घटनाक्रम विभाजन के बाद बिछड़े धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों की अहमियत को भी दर्शाता है।
