हरियाणा के Baijalpur गांव में पिछले 22 वर्षों से एक अनोखा “फाग उत्सव” मनाया जा रहा है, जो यहां की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाता है। तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत बुधवार को हुई, जिसमें पारंपरिक “कोरड़ा मार होली” मुख्य आकर्षण रहती है।
गुरुवार तक इस खास परंपरा में 84 जोड़ों ने भाग लिया। इस आयोजन में देवर और भाभी के बीच मजेदार रस्म निभाई जाती है, जिसमें भाभियां रस्सी से बने ‘कोरड़े’ से देवर को प्रतीकात्मक रूप से मारती हैं, जबकि देवर पानी डालकर जवाब देते हैं।
इस उत्सव की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी, जब कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गांव में होली के दौरान होने वाले विवादों को खत्म करने के उद्देश्य से एक समिति बनाई। इस पहल का नेतृत्व Satbir Singh Jhajharia, Rohitash Bhakhar और Dharmveer Kadian ने किया था।
पहले गांव के लोग अपने-अपने मोहल्लों में अलग-अलग होली मनाते थे, जिससे अक्सर झगड़े हो जाते थे। लेकिन जब इस उत्सव को गांव के सार्वजनिक चौक में आयोजित करना शुरू किया गया, तो माहौल बदल गया और गांव में आपसी भाईचारा और सहयोग बढ़ा।
समिति में Ransingh Ola, Balwan Singh और Monu Singh जैसे कई स्थानीय सदस्य भी शामिल हैं, जो हर साल इस आयोजन को सफल बनाते हैं।
उत्सव के दौरान गांव के सार्वजनिक चौक में बड़े लोहे के कड़ाहों में पानी भरा जाता है। जरूरत पड़ने पर टैंकरों से अतिरिक्त पानी भी उपलब्ध कराया जाता है। इसी पानी का उपयोग करके महिलाएं और पुरुष इस पारंपरिक खेल में हिस्सा लेते हैं।
आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन और आपसी मेल-मिलाप बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि होली के दौरान होने वाली पानी की बर्बादी को भी कम करना है।
उत्सव के अंत में सबसे अधिक उत्साह और जोश दिखाने वाले जोड़े को आकर्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है। समय के साथ यह परंपरा बैजलपुर गांव की पहचान बन चुकी है और आसपास के इलाकों में भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। 🎉🌸

