डिप्टी कमिश्नर गुलप्रीत सिंह औलख ने आज अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले में लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
जिला प्रशासनिक परिसर में जिला टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी कमिश्नर ने स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को अभियान को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।
औलख ने कहा कि एचपीवी टीकाकरण अभियान का मुख्य उद्देश्य लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर, जिसे गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भी कहा जाता है, से सुरक्षित रखना है। उन्होंने बताया कि यह टीका उन लड़कियों को लगाया जाएगा जिनकी आयु 14 वर्ष पूरी हो चुकी है लेकिन अभी 15 वर्ष नहीं हुई है।
उन्होंने सभी विभागों को स्वास्थ्य विभाग को पूरा सहयोग देने के लिए कहा ताकि लक्षित आयु वर्ग की सभी लड़कियों का 100 प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके।
डिप्टी कमिश्नर ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपनी बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए उन्हें एचपीवी का टीका अवश्य लगवाएं।
उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया कि पात्र आयु वर्ग की स्कूली छात्राओं की सटीक सूची तैयार की जाए। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने और गांवों में घोषणाओं के माध्यम से जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए।
सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदरजीत सिंह ने बताया कि पंजाब स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य भविष्य में राज्य को सर्वाइकल कैंसर मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) है, जो महिलाओं में गर्भाशय के निचले हिस्से को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि समय पर टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का प्रभावी तरीका है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह टीका निजी अस्पतालों में काफी महंगा होता है, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में इसे निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. हरपिंदर सिंह ने प्रस्तुति देते हुए बताया कि यह टीका 14 वर्ष पूरी कर चुकी लेकिन 15 वर्ष से कम आयु की लड़कियों को लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एचपीवी वायरस से सर्वाइकल कैंसर होता है और टीकाकरण इससे बचाव का सुरक्षित और प्रभावी उपाय है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है, जबकि भारत में यह महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। टीकाकरण के जरिए इससे बचाव संभव होने के बावजूद यह देश में महिलाओं की मौत का एक बड़ा कारण बना हुआ है।

