फगवाड़ा के 17 वर्षीय वीर प्रताप ने बनाई पराली से इको-फ्रेंडली पंचिंग बैग, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल

‘HarvestHit’ पहल के तहत धान की पराली से तैयार हो रहे टिकाऊ बॉक्सिंग पंचिंग बैग, सेना, शिक्षण संस्थानों और खेल संगठनों से मिल रही सराहना।

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फगवाड़ा के 17 वर्षीय छात्र वीर प्रताप सरदाना ने ‘HarvestHit’ नामक पहल शुरू कर धान की पराली को इको-फ्रेंडली बॉक्सिंग पंचिंग बैग में बदलने की अनूठी तकनीक विकसित की है। यह पहल पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ टिकाऊ खेल उपकरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

फगवाड़ा के युवा नवप्रवर्तक की अनोखी सोच, पराली से बना दिए इको-फ्रेंडली बॉक्सिंग पंचिंग बैग

पंजाब के फगवाड़ा के 17 वर्षीय वीर प्रताप सरदाना ने पर्यावरण संरक्षण और नवाचार का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने ‘HarvestHit’ नामक पहल के तहत धान की पराली (पैडी स्ट्रॉ) को इको-फ्रेंडली बॉक्सिंग पंचिंग बैग में बदलने का अभिनव समाधान विकसित किया है।

यह पहल उत्तर भारत की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक पराली जलाने की समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती है। साथ ही यह कृषि अपशिष्ट को उपयोगी और व्यावसायिक उत्पाद में बदलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास है।


H2: पराली से तैयार हो रहे टिकाऊ स्पोर्ट्स उपकरण

HarvestHit के तहत धान की पराली को विशेष प्रक्रिया से संपीड़ित (Compressed) कर मजबूत और टिकाऊ पंचिंग बैग तैयार किए जाते हैं। इन्हें बॉक्सिंग और फिटनेस प्रशिक्षण के लिए डिजाइन किया गया है।

इस नवाचार का उद्देश्य उस कृषि अवशेष को उपयोग में लाना है, जिसे आमतौर पर खेतों में जला दिया जाता है। इससे वायु प्रदूषण और श्वसन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


H2: दादा की बीमारी बनी प्रेरणा

वीर प्रताप सरदाना के इस नवाचार के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी जुड़ी है।

उनके माता-पिता निधि सरदाना और धीरज सरदाना के अनुसार, वीर अपने दिवंगत दादा इंदर कृष्ण सरदाना के बेहद करीब थे। दादा अस्थमा से पीड़ित थे और प्रदूषण के कारण उन्हें काफी परेशानी होती थी।

दादा की बीमारी और बाद में उनके निधन ने वीर को वायु प्रदूषण, विशेषकर पराली जलाने की समस्या का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक शोध, प्रयोग और उत्पाद विकास पर काम किया।


H2: कई परीक्षणों के बाद तैयार हुआ सफल मॉडल

लगातार परीक्षण और सुधार के बाद वीर ने ऐसा पंचिंग बैग विकसित किया, जिसमें संपीड़ित धान की पराली का उपयोग किया गया। यह उत्पाद मजबूती और पर्यावरण संरक्षण—दोनों मानकों पर खरा उतरता है।

HarvestHit यह दर्शाता है कि कृषि अपशिष्ट को व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पाद में बदलकर किसानों और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुंचाया जा सकता है।


H2: सेना और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचा नवाचार

वीर प्रताप की इस पहल को सरकारी संस्थानों, रक्षा संगठनों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों से सराहना मिली है।

रिपोर्ट के अनुसार अब तक 2,000 से अधिक इको-फ्रेंडली पंचिंग बैग विभिन्न संस्थानों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इनमें शामिल हैं—

  • पंजाब आर्म्ड पुलिस
  • कपूरथला कैंटोनमेंट
  • जयपुर कैंटोनमेंट
  • जालंधर और कपूरथला के सरकारी स्कूल एवं कॉलेज
  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के जिम
  • GNA यूनिवर्सिटी
  • कमला नेहरू कॉलेज फॉर वूमेन

H2: भारतीय सेना के साथ सहयोग की दिशा में पहल

वीर प्रताप ने केवल एक उत्पाद तक खुद को सीमित नहीं रखा है। वह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक प्रभाव से जुड़े विभिन्न संगठनों के साथ साझेदारी विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्ढा और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने HarvestHit की अवधारणा और भविष्य की योजनाएं प्रस्तुत कीं।

उनके नवाचार से प्रभावित होकर लेफ्टिनेंट जनरल चड्ढा ने भारतीय सेना की ताइक्वांडो सर्विसेज टीम, बेंगलुरु के साथ सहयोग की संभावना तलाशने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। इस प्रस्तावित साझेदारी का उद्देश्य टिकाऊ खेल उपकरणों को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है।


Key Highlights:

  • 17 वर्षीय वीर प्रताप सरदाना ने ‘HarvestHit’ पहल शुरू की।
  • धान की पराली से इको-फ्रेंडली बॉक्सिंग पंचिंग बैग तैयार किए जा रहे हैं।
  • नवाचार का उद्देश्य पराली जलाने और वायु प्रदूषण को कम करना है।
  • अब तक 2,000 से अधिक पंचिंग बैग विभिन्न संस्थानों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
  • भारतीय सेना के साथ संभावित सहयोग पर भी चर्चा हुई है।

FAQ Section

Q1. HarvestHit क्या है?

HarvestHit एक पहल है, जिसके तहत धान की पराली से इको-फ्रेंडली बॉक्सिंग पंचिंग बैग तैयार किए जाते हैं।

Q2. इस पहल की शुरुआत किसने की?

फगवाड़ा के 17 वर्षीय वीर प्रताप सरदाना ने इस नवाचार को विकसित किया।

Q3. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

पराली जलाने की समस्या को कम करना, कृषि अपशिष्ट का उपयोग बढ़ाना और पर्यावरण-अनुकूल खेल उपकरण तैयार करना।

Q4. किन संस्थानों ने इन पंचिंग बैग का उपयोग किया है?

पंजाब आर्म्ड पुलिस, कपूरथला और जयपुर कैंटोनमेंट, सरकारी स्कूल-कॉलेज, LPU, GNA यूनिवर्सिटी और कमला नेहरू कॉलेज फॉर वूमेन सहित कई संस्थानों ने इनका उपयोग किया है।


Conclusion:

वीर प्रताप सरदाना की ‘HarvestHit’ पहल यह साबित करती है कि युवा सोच और नवाचार से पर्यावरण संबंधी गंभीर चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है। पराली को उपयोगी खेल उपकरण में बदलने का यह प्रयास न केवल प्रदूषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि टिकाऊ विनिर्माण (Sustainable Manufacturing) और हरित खेल संस्कृति को भी नई पहचान दे रहा है।Screenshot_442

Edited By: Atul Sharma

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