अमृतसर के गांव में कबड्डी की अनोखी पाठशाला, 14 साल से युवाओं को तराश रहे कोच रणजीत सिंह

कुकरावाला के साधारण से हॉल से निकले कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी, 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं रणजीत सिंह

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अमृतसर के कुकरावाला गांव में सीमित संसाधनों के बावजूद कबड्डी की प्रतिभाओं को तराशने का काम जारी है। कोच रणजीत सिंह पिछले 14 वर्षों में 500 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं, जिनमें करीब 300 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।

 

अमृतसर के कुकरावाला गांव के एक उपेक्षित और सुनसान पड़े खेल मैदान के बीच बना एक हॉल आज कबड्डी की नई प्रतिभाओं को तराशने का केंद्र बन चुका है। यहां लड़के और लड़कियां राष्ट्रीय शैली की कबड्डी यानी मैट पर खेले जाने वाले कबड्डी के प्रारूप का प्रशिक्षण लेते हैं।

गांव में पर्याप्त खेल सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद यह केंद्र वर्षों से खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। केवल जिले ही नहीं, बल्कि पंजाब के अलग-अलग हिस्सों और आसपास के गांवों से भी युवा यहां कबड्डी सीखने पहुंचते हैं।

14 साल से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे कोच रणजीत सिंह

कबड्डी कोच रणजीत सिंह पिछले 14 वर्षों से युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वह खुद ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में खेल चुके हैं।

अब तक वह 500 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। इनमें से करीब 300 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।

रणजीत सिंह का प्रशिक्षण केंद्र ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का उदाहरण बन गया है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं।

हरशा छीना जैसे सीमावर्ती गांवों से भी सामने आई प्रतिभाएं

अजनाला के सीमावर्ती उपमंडल में स्थित हरशा छीना गांव में भी रणजीत सिंह ने बिना पर्याप्त खेल सुविधाओं के कबड्डी प्रतिभाओं की पहचान की और उन्हें राज्य तथा राष्ट्रीय टीमों तक पहुंचाने में मदद की।

उनके प्रशिक्षित खिलाड़ी गुरसाहिब सिंह पंजाब की उस कबड्डी टीम का हिस्सा रहे, जिसने 2024 में ओडिशा में आयोजित सीनियर नेशनल मीट में कांस्य पदक जीता था। इस पदक के साथ पंजाब ने सीनियर नेशनल स्तर पर 18 साल से चले आ रहे पदक के इंतजार को समाप्त किया था।

कई खिलाड़ी राष्ट्रीय कैंप तक पहुंचे

रणजीत सिंह के प्रशिक्षित खिलाड़ियों में जोबनजीत सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने 2024 में ऑल इंडिया सब-जूनियर इंडिया कैंप में हिस्सा लिया था।

वहीं, राजबीर सिंह ने 2023 में ऑल इंडिया जूनियर इंडिया कैंप में जगह बनाई थी।

इन उपलब्धियों से पता चलता है कि ग्रामीण पंजाब में भी सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने पर खिलाड़ी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

90 खिलाड़ी नियमित रूप से ले रहे प्रशिक्षण

फिलहाल रणजीत सिंह के केंद्र में करीब 90 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें 30 लड़कियां भी शामिल हैं और सभी खिलाड़ी 14 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।

लड़कों को अंडर-14 के साथ-साथ अंडर-17, अंडर-19, जूनियर और सीनियर वर्गों के लिए तैयार किया जा रहा है। वहीं, 30 लड़कियां अंडर-17, अंडर-19 और सीनियर वर्ग में प्रशिक्षण ले रही हैं।

खेल विभाग की ओर से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके 21 खिलाड़ियों को डाइट भी उपलब्ध कराई जा रही है।

10 साल में खिलाड़ियों ने 68 बार हासिल किए शीर्ष तीन स्थान

रणजीत सिंह की अकादमी के खिलाड़ियों ने पिछले 10 वर्षों में विभिन्न प्रतियोगिताओं में शीर्ष तीन स्थानों पर 68 बार जगह बनाई है।

अकादमी से प्रशिक्षण लेने वाले कई खिलाड़ियों को अलग-अलग सरकारी विभागों में रोजगार भी मिला है। 10 से अधिक लड़के भारतीय सेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि एक महिला खिलाड़ी को पिछले वर्ष केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में भर्ती किया गया।

यह उपलब्धियां दिखाती हैं कि कबड्डी यहां केवल खेल नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए करियर का रास्ता भी बन रही है।

मैट पर शिफ्ट होने के बाद बदली प्रशिक्षण की दिशा

बदलते समय और कबड्डी के वैश्विक स्वरूप के साथ रणजीत सिंह के केंद्र ने मैट पर खेले जाने वाले राष्ट्रीय शैली के कबड्डी प्रारूप को अपनाया है।

मैट पर प्रशिक्षण के बाद केंद्र के खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार आया है। इस केंद्र ने पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों से कई राष्ट्रीय और कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी तैयार किए हैं।

National-style कबड्डी क्या है?

सर्कल-स्टाइल कबड्डी गांवों में लंबे समय से लोकप्रिय रही है। इस प्रारूप में एक रेडर को आम तौर पर एक डिफेंडर रोकता है।

हालांकि, समय के साथ यह प्रारूप धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है और मैट पर खेले जाने वाली राष्ट्रीय शैली की कबड्डी को अधिक महत्व मिल रहा है।

Key Highlights:

• कुकरावाला गांव में सीमित संसाधनों के बीच कबड्डी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
• कोच रणजीत सिंह पिछले 14 वर्षों से खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
• अब तक 500 से अधिक खिलाड़ी उनके केंद्र से प्रशिक्षण ले चुके हैं।
• करीब 300 प्रशिक्षित खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।
• वर्तमान में लगभग 90 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें 30 लड़कियां हैं।
• खिलाड़ियों ने पिछले 10 वर्षों में शीर्ष तीन स्थान 68 बार हासिल किए हैं।
• गुरसाहिब सिंह 2024 में पंजाब की सीनियर नेशनल कांस्य पदक विजेता टीम का हिस्सा रहे।
• जोबनजीत सिंह 2024 के ऑल इंडिया सब-जूनियर कैंप में शामिल हुए।
• राजबीर सिंह ने 2023 में ऑल इंडिया जूनियर कैंप में हिस्सा लिया।
• 10 से अधिक प्रशिक्षित खिलाड़ी भारतीय सेना में शामिल हो चुके हैं।
• एक महिला खिलाड़ी पिछले वर्ष CRPF में भर्ती हुई।
• खेल विभाग 21 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को डाइट उपलब्ध करा रहा है।

FAQ Section:

कुकरावाला में कबड्डी खिलाड़ियों को कौन प्रशिक्षण देता है?

कबड्डी कोच रणजीत सिंह पिछले 14 वर्षों से कुकरावाला स्थित प्रशिक्षण केंद्र में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

रणजीत सिंह कितने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं?

वह अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं, जिनमें करीब 300 खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।

वर्तमान में कितने खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं?

फिलहाल करीब 90 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें 30 लड़कियां भी शामिल हैं।

रणजीत सिंह के प्रशिक्षित खिलाड़ियों की प्रमुख उपलब्धियां क्या हैं?

उनके खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और पिछले 10 वर्षों में शीर्ष तीन स्थान 68 बार हासिल किए हैं। कई खिलाड़ी सरकारी विभागों में नौकरी भी हासिल कर चुके हैं।

क्या प्रशिक्षित खिलाड़ी सेना में भी गए हैं?

हां। 10 से अधिक पुरुष खिलाड़ी भारतीय सेना में शामिल हो चुके हैं। एक महिला खिलाड़ी को पिछले वर्ष CRPF में भर्ती किया गया था।

National-style कबड्डी क्या होती है?

National-style कबड्डी मैट पर खेली जाने वाली कबड्डी का प्रारूप है। यह आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित कबड्डी के स्वरूप से जुड़ा है, जबकि सर्कल-स्टाइल कबड्डी ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से लोकप्रिय रही है।

Conclusion:

कुकरावाला गांव का यह कबड्डी केंद्र दिखाता है कि खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए बड़े शहरों जैसी सुविधाएं ही जरूरी नहीं हैं। कोच रणजीत सिंह के 14 वर्षों के प्रयासों ने ग्रामीण युवाओं को राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मंच दिया है। 500 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और दर्जनों खिलाड़ियों की उल्लेखनीय उपलब्धियां इस केंद्र की मेहनत और ग्रामीण पंजाब की खेल प्रतिभा की मजबूत तस्वीर पेश करती हैं।Screenshot_859

Edited By: Atul Sharma

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