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जालंधर में ट्रक ऑपरेटरों का DC ऑफिस के बाहर प्रदर्शन, निजी कंटेनर ऑपरेटरों को काम देने का विरोध
All Punjab Truck Operators Union ने गेहूं-धान ढुलाई से जुड़े काम में स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की अनदेखी का आरोप लगाया, परमिट और RC में देरी समेत बढ़ती लागत पर भी जताई चिंता
जालंधर में ट्रक ऑपरेटरों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर निजी कंटेनर ऑपरेटरों को कथित तौर पर परिवहन का काम दिए जाने का विरोध किया। यूनियन ने परमिट, RC और फिटनेस सर्टिफिकेट में देरी के साथ टोल, परमिट फीस और अन्य करों में राहत की मांग की।
जालंधर में ट्रक ऑपरेटरों का गुस्सा मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। All Punjab Truck Operators Union के बैनर तले ट्रक ऑपरेटरों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गेहूं की ढुलाई से जुड़ा महत्वपूर्ण काम स्थानीय ट्रक ऑपरेटरों से लेकर निजी कंटेनर ऑपरेटरों को दिया जा रहा है।
ट्रक यूनियनों ने बढ़ती परिचालन लागत और जरूरी दस्तावेज हासिल करने में हो रही लंबी देरी को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कथित निर्णय वापस नहीं लिया तो वे परिवहन कार्य का बहिष्कार करने को मजबूर हो सकते हैं।
गेहूं-धान की ढुलाई में अहम भूमिका का दावा
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हैप्पी संधू ने कहा कि स्थानीय ट्रक ऑपरेटर किसानों से मंडियों तक गेहूं और धान पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उन्होंने बताया कि खरीद के बाद चावल को शेलरों और गेहूं को सरकारी गोदामों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद भारतीय खाद्य निगम (FCI) के तहत गेहूं को गोदामों से रेलवे रैक तक भी पहुंचाया जाता है, ताकि उसे दूसरे राज्यों में भेजा जा सके।
निजी कंटेनर ऑपरेटरों को काम देने पर विरोध
हैप्पी संधू के अनुसार, ट्रक यूनियनों को जानकारी मिली है कि सरकार ने गोदामों से रेलवे लोडिंग पॉइंट तक गेहूं पहुंचाने का काम निजी कंटेनर ऑपरेटरों को देने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि जालंधर में नौ ट्रक यूनियन मिलकर परिवहन का काम करती हैं और जिले के करीब 60 से 70 गांवों के लोगों को इससे रोजगार मिलता है।
उनका दावा है कि सैकड़ों युवा इस काम पर निर्भर हैं, क्योंकि इन ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े उद्योग या रोजगार के अन्य महत्वपूर्ण साधन सीमित हैं।
स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका
यूनियन ने आरोप लगाया कि परिवहन का काम निजी ऑपरेटरों को देने का कदम स्थानीय ट्रक ऑपरेटरों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है।
हैप्पी संधू ने कहा कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो ट्रक यूनियनें सभी परिवहन कार्यों का बहिष्कार करने पर विचार कर सकती हैं।
उन्होंने सरकार से स्थानीय ट्रक ऑपरेटरों के हितों को ध्यान में रखते हुए मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
परमिट और RC के लिए महीनों इंतजार का आरोप
प्रदर्शन के दौरान ट्रक ऑपरेटरों ने परिवहन विभाग से जुड़े दस्तावेज हासिल करने में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया।
यूनियन के अनुसार, पंजाब परमिट, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए किए गए आवेदन कई बार Regional Transport Authority (RTA) और District Transport Office (DTO) कार्यालयों में महीनों तक लंबित रहते हैं।
ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि दस्तावेजों में इस तरह की देरी से उनके कामकाज पर सीधा असर पड़ता है और आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
टोल और परमिट फीस में कमी की मांग
ट्रक ऑपरेटरों ने बढ़ती परिचालन लागत को देखते हुए सरकार के सामने कई अन्य मांगें भी रखीं।
यूनियन ने टोल टैक्स, परमिट फीस और अन्य करों को कम करने की मांग की। इसके अलावा व्यावसायिक रूप से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई।
ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्ती की मांग
यूनियन ने ट्रकों में क्षमता से अधिक सामान लादने यानी ओवरलोडिंग के खिलाफ नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग भी की।
ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि नियमों का समान रूप से पालन होने से परिवहन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा अधिक निष्पक्ष हो सकती है और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
Key Highlights:
• जालंधर में ट्रक ऑपरेटरों ने DC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
• प्रदर्शन All Punjab Truck Operators Union के बैनर तले हुआ।
• निजी कंटेनर ऑपरेटरों को गेहूं की ढुलाई का काम दिए जाने का विरोध किया गया।
• यूनियन के अनुसार जालंधर में नौ ट्रक यूनियनें मिलकर काम करती हैं।
• करीब 60 से 70 गांवों के लोगों की आजीविका इस परिवहन कार्य से जुड़ी होने का दावा।
• पंजाब परमिट, RC और फिटनेस सर्टिफिकेट में देरी की शिकायत।
• RTA और DTO कार्यालयों में आवेदन महीनों लंबित रहने का आरोप।
• टोल टैक्स, परमिट फीस और अन्य करों में कमी की मांग।
• व्यावसायिक रूप से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के इस्तेमाल पर रोक की मांग।
• ओवरलोडिंग के खिलाफ नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग।
• फैसला वापस न होने पर परिवहन कार्य के बहिष्कार की चेतावनी।
FAQ Section:
जालंधर में ट्रक ऑपरेटरों ने प्रदर्शन क्यों किया?
ट्रक ऑपरेटरों ने निजी कंटेनर ऑपरेटरों को कथित तौर पर गेहूं की ढुलाई का काम दिए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने बढ़ती लागत और दस्तावेजों में देरी को लेकर भी चिंता जताई।
प्रदर्शन किस संगठन ने आयोजित किया?
प्रदर्शन All Punjab Truck Operators Union की ओर से आयोजित किया गया।
ट्रक ऑपरेटरों के अनुसार कितने गांवों के लोग इस काम पर निर्भर हैं?
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हैप्पी संधू के अनुसार, जालंधर की नौ ट्रक यूनियनें करीब 60 से 70 गांवों के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
ट्रक ऑपरेटरों ने दस्तावेजों को लेकर क्या शिकायत की?
उन्होंने पंजाब परमिट, RC और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में देरी की शिकायत की। यूनियन का दावा है कि कई आवेदन RTA और DTO कार्यालयों में महीनों तक लंबित रहते हैं।
ट्रक ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
यूनियन ने स्थानीय ट्रांसपोर्टरों के परिवहन कार्य को बनाए रखने, टोल टैक्स और परमिट फीस कम करने, अन्य करों में राहत देने, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक और ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
Conclusion:
जालंधर में ट्रक ऑपरेटरों के प्रदर्शन ने स्थानीय परिवहन कारोबार और रोजगार से जुड़े मुद्दों को सामने ला दिया है। यूनियन ने निजी कंटेनर ऑपरेटरों को काम दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की आजीविका के लिए चुनौती बताया है। साथ ही परमिट और अन्य दस्तावेजों में देरी तथा बढ़ती लागत को लेकर भी राहत की मांग की गई है। अब ट्रक ऑपरेटर सरकार से इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
