सरकारी स्कूलों में डेढ़ महीने बाद भी नहीं पहुंचीं किताबें, बिना पाठ्यपुस्तकों के पढ़ाई करने को मजबूर छात्र

गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान समेत कई विषयों की किताबों की कमी, बोर्ड कक्षाओं के छात्रों की बढ़ी चिंता

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नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के डेढ़ महीने बाद भी सरकारी स्कूलों के हजारों छात्र पाठ्यपुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं। किताबों की कमी के कारण छात्र पुराने और साझा पुस्तकों के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

सरकारी स्कूलों में किताबों की भारी कमी

नए शैक्षणिक सत्र को शुरू हुए करीब डेढ़ महीना बीत चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को अब तक पूरी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, खासकर उन विद्यार्थियों की जो पूरी तरह सरकारी सप्लाई पर निर्भर हैं।

स्कूलों में बिना किताबों के कक्षाएं चल रही हैं, जिससे छात्रों को पढ़ाई समझने और घर पर तैयारी करने में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कई विषयों की किताबें अब तक उपलब्ध नहीं

जानकारी के अनुसार कई कक्षाओं और विषयों की किताबें अभी तक स्कूलों तक नहीं पहुंची हैं। इनमें प्रमुख रूप से गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, शारीरिक शिक्षा, पर्यावरण विज्ञान, राजनीतिक विज्ञान और कंप्यूटर साइंस की किताबें शामिल हैं।

जिन कक्षाओं की किताबें उपलब्ध नहीं:

  • कक्षा 2 और 3: गणित (अंग्रेजी माध्यम)
  • कक्षा 6 और 8: शारीरिक शिक्षा (अंग्रेजी माध्यम)
  • कक्षा 9: सामाजिक विज्ञान (अंग्रेजी माध्यम)
  • कक्षा 10: गणित (पंजाबी माध्यम), सामाजिक विज्ञान (हिंदी माध्यम), विज्ञान (पंजाबी माध्यम)
  • कक्षा 11: पर्यावरण विज्ञान (पंजाबी माध्यम), राजनीतिक विज्ञान
  • कक्षा 12: कंप्यूटर साइंस (पंजाबी माध्यम), सामाजिक विज्ञान और जनरल पंजाबी

एक किताब से पूरी कक्षा पढ़ने को मजबूर

शिक्षकों के अनुसार किताबों की कमी का सबसे अधिक असर बोर्ड कक्षाओं के छात्रों पर पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि कई बार पूरी कक्षा में केवल एक या दो छात्रों के पास ही किताब होती है।

एक शिक्षक ने बताया कि बाकी छात्रों को एक-दूसरे के साथ बैठकर किताब साझा करनी पड़ती है। कई बार पूरी कक्षा के लिए सिर्फ एक ही किताब उपलब्ध होती है, जिससे पढ़ाई बाधित हो रही है।

पुराने छात्रों की किताबों से चल रही पढ़ाई

लाडोवाली रोड स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस के एक शिक्षक ने बताया कि शुरुआत में पढ़ाई पिछले साल पास आउट हुए छात्रों की पुरानी किताबों से शुरू करवाई गई थी।

उन्होंने कहा कि पढ़ाई रुकने न पाए, इसलिए पुराने बैच की किताबें नए छात्रों में बांटी गईं, लेकिन यह केवल अस्थायी व्यवस्था है।

हर साल सामने आती है यही समस्या

डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला अध्यक्ष कुलविंदर सिंह ने कहा कि किताबों की कमी की समस्या हर वर्ष देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल भी जून-जुलाई तक किताबें पहुंची थीं। सरकार को चाहिए कि नए सत्र की शुरुआत यानी 1 अप्रैल तक सभी किताबें उपलब्ध करवाई जाएं, क्योंकि किताबों के बिना प्रभावी पढ़ाई संभव नहीं है।

छात्रों की सेल्फ स्टडी पर असर

छात्रों का कहना है कि किताबें न मिलने से उनकी सेल्फ स्टडी और नोट्स तैयार करने में परेशानी हो रही है।

कक्षा 10 की छात्रा गुरमनदीप कौर ने बताया कि उसे अब तक गणित और विज्ञान की किताबें नहीं मिली हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल में शिक्षक पढ़ा देते हैं, लेकिन घर पर बिना किताबों के तैयारी करना बेहद मुश्किल हो जाता है।


Key Highlights:

  • डेढ़ महीने बाद भी सरकारी स्कूलों में किताबों की कमी
  • कई विषयों की पाठ्यपुस्तकें अब तक नहीं पहुंचीं
  • बोर्ड कक्षाओं के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
  • पुराने छात्रों की किताबों से चल रही पढ़ाई
  • छात्रों की सेल्फ स्टडी और नोट्स तैयारी प्रभावित
  • शिक्षकों ने सरकार से समय पर किताबें उपलब्ध कराने की मांग की

FAQ Section:

Q1. सरकारी स्कूलों में किताबों की कमी क्यों है?

कई विषयों और कक्षाओं की किताबें अभी तक स्कूलों तक नहीं पहुंची हैं, जिससे यह समस्या बनी हुई है।

Q2. किन छात्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है?

बोर्ड कक्षाओं के छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।

Q3. फिलहाल स्कूलों में पढ़ाई कैसे चल रही है?

कई स्कूलों में पुराने बैच की किताबों और साझा पुस्तकों के सहारे पढ़ाई करवाई जा रही है।

Q4. कौन-कौन से विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं हैं?

गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, शारीरिक शिक्षा, राजनीतिक विज्ञान और कंप्यूटर साइंस समेत कई विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं हैं।

Q5. शिक्षकों ने सरकार से क्या मांग की है?

शिक्षकों ने मांग की है कि नए सत्र की शुरुआत से पहले ही सभी किताबें स्कूलों में उपलब्ध करवाई जाएं।


Conclusion:

सरकारी स्कूलों में समय पर पाठ्यपुस्तकें न पहुंचने से छात्रों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि सरकार समय रहते सभी स्कूलों में पर्याप्त किताबें उपलब्ध कराए, ताकि छात्रों की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।Screenshot_1487

Edited By: Karan Singh

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